अंजान जी, नई दिल्ली: लोकसभा में बुधवार को वक्फ संशोधन बिल पारित किया गया, जिसे अब राज्यसभा में पेश किया जाएगा। इस विधेयक का उद्देश्य वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाना और गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करना है। इसके अलावा, सरकार को वक्फ के खातों का ऑडिट कराने का अधिकार भी मिलेगा। इस विधेयक के लागू होने के बाद वक्फ संपत्तियों पर बड़े बदलाव होंगे। आइए जानते हैं इस बिल से जुड़ी 10 बड़ी बातें।
1. ऑनलाइन होगा वक्फ का डेटाबेस
वक्फ बोर्ड संशोधन बिल के तहत वक्फ संपत्तियों का एक सेंट्रल डेटाबेस तैयार करना अनिवार्य होगा। कानून लागू होने के छह महीने के भीतर हर वक्फ संपत्ति का विवरण ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड किया जाएगा। यह कदम वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने के लिए उठाया गया है, जिससे वक्फ के बारे में कोई जानकारी छिपाई नहीं जा सकेगी।
2. जमीन का ऑनलाइन डेटाबेस
अब हर वक्फ संपत्ति, जो डोनेशन में दी गई है, उसका पूरी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध होगी। इसमें यह भी जानकारी दी जाएगी कि जमीन किसने डोनेट की, वक्फ बोर्ड को कितनी इनकम होती है, और मुतव्वली (देखरेख करने वाला) को कितनी तनख्वाह मिलती है। इससे वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग सुनिश्चित होगा।
3. गैर-मुस्लिमों को वक्फ बोर्ड में शामिल करना अनिवार्य
वक्फ बोर्ड में अब दो मुस्लिम महिलाओं के साथ दो गैर-मुस्लिमों का भी प्रतिनिधित्व होना अनिवार्य होगा। यह बदलाव वक्फ बोर्ड में पिछड़े और गरीब मुस्लिमों के साथ-साथ मुस्लिम महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करेगा। इसके अलावा, शिया, सुन्नी, बोहरा और आगाखानी समुदायों के लिए अलग-अलग वक्फ बोर्ड बनाने का प्रावधान भी है।
4. वक्फ बोर्ड में दो मुस्लिम महिलाएं भी होंगी
राज्यों के वक्फ बोर्ड में दो मुस्लिम महिलाएं और दो गैर-मुस्लिम सदस्य होंगे। इसके साथ ही शिया, सुन्नी, बोहरा और आगाखानी समुदायों से एक-एक सदस्य का प्रतिनिधित्व भी सुनिश्चित किया जाएगा।
5. अफसर के पास होगा विवाद निपटाने का अधिकार
विधेयक के अनुसार, राज्य सरकार के अफसर को यह अधिकार होगा कि वह यह तय कर सकें कि कोई संपत्ति वक्फ की है या सरकार की। हालांकि, विपक्ष ने इस प्रावधान पर आपत्ति जताई है, क्योंकि उनका कहना है कि अफसर सरकार के पक्ष में फैसला देंगे और यह तय नहीं है कि कोई विवाद कितने दिनों में निपटाया जाएगा।
6. सिविल कोर्ट या हाईकोर्ट में अपील करना मुमकिन
अब डोनेशन में दी गई संपत्तियों पर दावा करने वाला व्यक्ति रेवेन्यू कोर्ट, सिविल कोर्ट या हाई कोर्ट में अपील कर सकेगा। इसके अलावा, वक्फ ट्रिब्यूनल के फैसले के खिलाफ 90 दिनों के भीतर अपील दायर की जा सकेगी, जो पहले संभव नहीं था।
7. सरकार के पास वक्फ के खातों का ऑडिट कराने का अधिकार
केंद्र और राज्य सरकारों को वक्फ के खातों का ऑडिट कराने का अधिकार मिलेगा। इससे किसी भी तरह के भ्रष्टाचार को रोकने में मदद मिलेगी। वक्फ बोर्ड को सरकार को जानकारी देने से मना नहीं कर सकेगा, और न ही वह यह दावा कर सकेगा कि कोई संपत्ति धार्मिक उद्देश्य से वक्फ की है।
8. महिलाएं भी वक्फ की जमीन में उत्तराधिकारी होंगी
वक्फ (अल-औलाद) के तहत, अब महिलाओं को भी वक्फ संपत्ति का उत्तराधिकारी माना जाएगा। यानी अगर किसी परिवार ने वक्फ की जमीन दी है, तो उस जमीन से होने वाली इनकम में पुरुषों के साथ-साथ महिलाओं का भी हिस्सा होगा।
9. प्रॉपर्टी का ब्यौरा राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज होगा
जो सरकारी प्रॉपर्टी वक्फ बोर्ड दावा कर रहा है, उन्हें पहले से वक्फ की संपत्ति नहीं माना जाएगा। यदि कोई सरकारी प्रॉपर्टी वक्फ की बताई जाती है, तो राज्य सरकार जांच कराएगी। यदि वक्फ का दावा गलत पाया जाता है, तो वह प्रॉपर्टी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज हो जाएगी।
10. प्रॉपर्टी पर वक्फ का कब्जा बिना दस्तावेज के नहीं होगा
वक्फ बोर्ड अब बिना दस्तावेज या सर्वे के किसी प्रॉपर्टी पर अपना दावा नहीं कर सकेगा। राज्य सरकार को वक्फ संपत्तियों के बारे में आवश्यक जांच करने के अधिकार दिए गए हैं, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वक्फ संपत्तियां सही तरीके से उपयोग में लाई जा रही हैं।
वक्फ संशोधन बिल में प्रस्तावित बदलाव वक्फ संपत्तियों के बेहतर प्रबंधन और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हैं। यदि यह विधेयक राज्यसभा से पारित हो जाता है और राष्ट्रपति की मंजूरी मिलती है, तो यह कानून के रूप में लागू हो जाएगा, जिससे वक्फ संपत्तियों का उपयोग और अधिक व्यवस्थित होगा।
संतोष श्रीवास्तव “अंजान जी”