वक्फ संशोधन बिल लोकसभा में पास, अब राज्यसभा में होगी चर्चा: 12 घंटे की बहस के बाद संसद में ऐतिहासिक फैसला

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अंजान जी, नई दिल्ली : 12 घंटे लंबी बहस और तीखी राजनीतिक जद्दोजहद के बाद, बुधवार की रात वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को लोकसभा में बहुमत से मंजूरी मिल गई। अब यह विधेयक राज्यसभा में पेश किया जाएगा, जहाँ इसके लेकर और भी विवाद की संभावना जताई जा रही है। लोकसभा में इस विधेयक के पक्ष में 288 और विपक्ष में 232 वोट पड़े। विपक्ष ने विधेयक के सभी संशोधनों को ध्वनिमत से खारिज कर दिया, जिससे यह बिल बहुमत से पास हुआ।

गिरिराज सिंह का बयान: कांग्रेस की गलतियों को सुधारा

इस विधेयक को पेश करते हुए केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने 2013 में कांग्रेस द्वारा की गई गलतियों को सुधारने का कार्य किया है। सिंह ने कहा, “कांग्रेस ने 2013 में तुष्टीकरण की नीति अपनाई थी, लेकिन इस विधेयक के माध्यम से हम गरीबों और महिलाओं के हित में एक महत्वपूर्ण कदम उठा रहे हैं।”

रविशंकर प्रसाद ने किया विधेयक का समर्थन

भा.ज.पा. के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने इस विधेयक को मुस्लिम समुदाय के लिए फायदेमंद बताया और कहा, “यह एक ऐतिहासिक कदम है, जो गरीब मुसलमानों के हित में है। इस विधेयक से उनका जीवन बेहतर होगा।”

सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती का बयान: भारतीय लोकतंत्र की विजय

वक्फ संशोधन विधेयक के पारित होने पर ऑल इंडिया सूफी सज्जादानशीन काउंसिल (AISSC) के अध्यक्ष सैयद नसीरुद्दीन चिश्ती ने इसे भारतीय लोकतंत्र की विजय करार दिया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक मुसलमानों के लिए सरकार का बड़ा कदम है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अन्य मंत्रियों को इस निर्णय के लिए बधाई दी और मुसलमानों के विकास के लिए योजनाओं की आवश्यकता पर बल दिया।

विधेयक का मुस्लिम समुदाय द्वारा विरोध

वहीं दूसरी ओर, मुस्लिम संगठनों और नेताओं ने इस विधेयक का कड़ा विरोध किया है। उनका कहना है कि यह विधेयक वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता को कमजोर करेगा और समुदाय के हितों के खिलाफ है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा, “हमने अपनी चिंताओं को संसद की संयुक्त संसदीय समिति के सामने रखा, लेकिन उनका समाधान नहीं किया गया।”

वक्फ संशोधन विधेयक में क्या है?

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 में 1995 के वक्फ अधिनियम में कई महत्वपूर्ण बदलावों का प्रस्ताव है। इस विधेयक के तहत वक्फ बोर्डों में मुस्लिम महिलाओं और गैर-मुसलमानों का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। इसके अलावा, यह विधेयक वक्फ संपत्तियों की स्वायत्तता और पारदर्शिता को बढ़ावा देने का दावा करता है। इसमें वक्फ बोर्ड के नियंत्रण से जुड़ी शक्तियों को पुनः परिभाषित किया गया है।

दिल्ली बीजेपी का प्रदर्शन और विधेयक का समर्थन

वहीं, दिल्ली बीजेपी ने वक्फ (संशोधन) विधेयक के समर्थन में प्रदर्शन किया। दिल्ली बीजेपी अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने कहा कि यह विधेयक मुसलमानों के कल्याण के लिए एक महत्वपूर्ण कदम है और यह सुनिश्चित करेगा कि वक्फ संपत्तियों का सही तरीके से इस्तेमाल हो। उन्होंने विधेयक के विरोधियों से सवाल किया कि वक्फ संपत्तियों पर दशकों से कुछ लोग काबिज होने के बावजूद वहां कोई अस्पताल या स्कूल क्यों नहीं बनवाए गए।

राहुल गांधी का आरोप: यह विधेयक असंवैधानिक है

वहीं विपक्षी नेता राहुल गांधी ने इस विधेयक को “संविधान पर हमला” बताया। उन्होंने कहा कि यह विधेयक मुसलमानों को हाशिए पर धकेलने के उद्देश्य से लाया गया है और यह उनके धार्मिक स्वतंत्रता और संपत्ति अधिकारों का उल्लंघन करता है।

वक्फ विधेयक पर राज्यसभा में होगी चर्चा

लोकसभा में इस विधेयक के पास होने के बाद अब यह राज्यसभा में आज पेश किया जाएगा। राज्यसभा में इस विधेयक पर भी हंगामे की संभावना जताई जा रही है, क्योंकि विपक्ष इसके असंवैधानिक होने का दावा कर रहा है। विधेयक को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों के विरोध और समर्थन के बीच आगामी दिनों में और भी बयानबाजी देखने को मिल सकती है।

अंत में, इस विधेयक का उद्देश्य यह है कि वक्फ संपत्तियों का उपयोग समाज के विकास के लिए किया जाए और किसी विशेष वर्ग का इन संपत्तियों पर एकाधिकार न हो। यह विधेयक सरकार के ‘सबका साथ, सबका विकास’ के दृष्टिकोण को साकार करने की दिशा में एक कदम है।

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