बिहार: प्रधान शिक्षक की पोस्टिंग पर उठ रहे गंभीर सवाल, पारदर्शिता की मांग

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अंजान जी, पटना – हाल ही में बिहार में आयोजित शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और मेरिट के आधार पर प्रधान शिक्षकों की पोस्टिंग में असमानता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। राज्य के कई शिक्षक संगठन और समुदाय के सदस्य इस प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता महसूस कर रहे हैं।

शिक्षकों का आरोप है कि जिन उम्मीदवारों ने उच्च मेरिट प्राप्त किया है, उन्हें उनके गृह जिले में प्रधान शिक्षक के रूप में पोस्टिंग नहीं मिली, जबकि कम मेरिट वाले उम्मीदवारों को उनके जिले में नियुक्ति दे दी गई। इस स्थिति ने शिक्षकों के बीच असंतोष और भ्रम पैदा किया है।

एक प्रमुख शिक्षक ने इस मुद्दे पर अपनी चिंता व्यक्त करते हुए कहा, “मुझे समझ में नहीं आ रहा है कि शिक्षा विभाग द्वारा चयन प्रक्रिया में ऐसी अनियमितताएँ क्यों हो रही हैं? जिन्होंने अच्छे अंक प्राप्त किए, उन्हें उनका अधिकारिक जिला क्यों नहीं मिला?” उन्होंने आगे कहा कि यह स्थिति न केवल शिक्षकों के लिए, बल्कि छात्रों के लिए भी समस्या उत्पन्न कर सकती है, क्योंकि इससे शिक्षा की गुणवत्ता पर प्रभाव पड़ सकता है।

इसके अतिरिक्त, कुछ शिक्षक यह भी कह रहे हैं कि विभाग द्वारा नियुक्ति के लिए दी गई तीन जिलों की प्राथमिकता प्रणाली में भी खामियाँ हैं, जिससे योग्य उम्मीदवारों को उनका सही स्थान नहीं मिल रहा है। इस पर राज्य सरकार से पारदर्शिता और स्पष्टता की मांग की जा रही है, ताकि भविष्य में इस प्रकार की समस्याओं से बचा जा सके।

शिक्षकों का मानना है कि अगर विभाग मेरिट आधारित नियुक्तियाँ सही तरीके से लागू करता, तो यह विवाद उत्पन्न नहीं होता। अब समय आ गया है कि शिक्षा विभाग इस प्रक्रिया में सुधार करे और शिक्षक समुदाय की परेशानियों को गंभीरता से ले।

शिक्षक समुदाय की अपील है कि सरकार इस मामले को शीघ्र सुलझाए और नियुक्ति प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करें, ताकि हर योग्य शिक्षक को न्याय मिल सके और शिक्षा का स्तर बेहतर हो सके।

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