Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher
बोकारो | 7 मार्च 2026
हाइपोक्लोराइट डोज़िंग स्टेशन से पेयजल गुणवत्ता और सुरक्षा में बड़ा सुधार
बोकारो इस्पात संयंत्र (बीएसएल) ने जल प्रबंधन और सुरक्षा मानकों को आधुनिक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। संयंत्र के जल प्रबंधन विभाग में नवनिर्मित हाइपोक्लोराइट डोज़िंग स्टेशन का शनिवार को औपचारिक उद्घाटन किया गया। इस नई प्रणाली के शुरू होने से अब शहरवासियों और संयंत्र कर्मियों को मिलने वाले पेयजल की गुणवत्ता बेहतर होगी और जल शोधन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित बन जाएगी।
क्लोरीन गैस के खतरे से मिली राहत
अब तक संयंत्र में जल शोधन के लिए क्लोरीन गैस का उपयोग किया जाता था। यह विधि प्रभावी होने के बावजूद इसके भंडारण और उपयोग में सुरक्षा संबंधी जोखिम बने रहते थे। नई हाइपोक्लोराइट डोज़िंग प्रणाली लागू होने से इस संभावित खतरे को समाप्त कर दिया गया है।
इस नई व्यवस्था का उद्घाटन मुख्य अतिथि अतानु भौमिक और अधिशासी निदेशक (संकार्य) अनुप कुमार दत्त ने संयुक्त रूप से किया।
तकनीकी उन्नयन से ‘जीरो हार्म’ लक्ष्य को बल
अधिकारियों के अनुसार आधुनिक डोज़िंग स्टेशन के माध्यम से अब पेयजल में कीटाणुनाशक की सटीक मात्रा मिलाना संभव होगा। इससे जल शोधन प्रक्रिया अधिक नियंत्रित और सुरक्षित बनेगी।
संयंत्र प्रबंधन का मानना है कि यह तकनीकी उन्नयन जीरो हार्म (Zero Harm) के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगा। साथ ही इससे परिचालन दक्षता भी बढ़ेगी और सुरक्षा संस्कृति को मजबूती मिलेगी।
इन अधिकारियों के नेतृत्व में पूरा हुआ प्रोजेक्ट
इस परियोजना को मुख्य महाप्रबंधक (उपयोगिताएं) संजीव रंजन सिंह के नेतृत्व में जल प्रबंधन विभाग की टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया।
इसके क्रियान्वयन में महाप्रबंधक अनुपम कुमार, के. भट्टाचार्या, उप महाप्रबंधक ई. मिंज तथा सहायक महाप्रबंधक एच. शेखर, एस. गंगवार, अंकित कुमार, मनोज कुमार और बी. राम की टीम का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
अतिथियों ने इस पहल को बीएसएल के तकनीकी विकास और सुरक्षित कार्य संस्कृति की दिशा में एक बड़ा कदम बताया।
