Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher
नई दिल्ली, 25 मार्च 2026 (बुधवार)
बैंकिंग क्षेत्र में परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स (UFBU) द्वारा एकतरफा लागू किए जा रहे संशोधित PLI फार्मूले के खिलाफ शुरू किया गया आंदोलन अब देशव्यापी रूप ले चुका है। बैंक शाखाओं से लेकर प्रशासनिक कार्यालयों तक कर्मचारियों और अधिकारियों की स्वतःस्फूर्त भागीदारी इस मुद्दे पर गहरी नाराजगी और असहमति को दर्शा रही है।
UFBU के महासचिव रूपम राय ने कहा कि इस आंदोलन को पूरे बैंकिंग उद्योग में व्यापक समर्थन मिला है। कर्मचारियों और अधिकारियों ने एकजुट होकर विरोध दर्ज कराया है, जो निष्पक्षता, सामूहिक अधिकारों और औद्योगिक सौहार्द की रक्षा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
यह विवाद केवल प्रोत्साहन राशि तक सीमित नहीं है, बल्कि बैंकिंग कार्यबल की एकता और स्थापित सेवा शर्तों से भी जुड़ा हुआ है। वित्तीय सेवा विभाग (DFS) द्वारा प्रस्तावित संशोधित PLI फार्मूले को कर्मचारियों द्वारा एकतरफा और विभाजनकारी कदम के रूप में देखा जा रहा है। मौजूदा PLI व्यवस्था जहां बैंक के सामूहिक प्रदर्शन पर आधारित है, वहीं नया प्रस्ताव अधिकारियों के बीच वर्गीकरण और असमानता पैदा करने वाला माना जा रहा है।
विवाद के मुख्य बिंदु:
- संशोधित PLI फार्मूले को एकतरफा लागू करने का आरोप
- कर्मचारियों और अधिकारियों में व्यापक असंतोष
- स्केल IV और उससे ऊपर के अधिकारियों के लिए अलग व्यवस्था का विरोध
- सामूहिक सौदेबाजी और स्थापित सेवा शर्तों पर असर की आशंका
- बैंकिंग कार्यबल की एकता पर खतरे की चिंता
UFBU का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव कार्यबल को विभाजित कर सकता है और टीमवर्क की भावना को कमजोर कर सकता है। इससे न केवल असमानताएं बढ़ेंगी, बल्कि बैंकिंग संचालन पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
इस बीच, यह मामला पहले से ही मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के समक्ष सुलह प्रक्रिया में है। 9 मार्च 2026 को हुई सुनवाई में वित्तीय वर्ष 2024-25 के लिए स्केल IV से VII तक के अधिकारियों को PLI भुगतान के मुद्दे पर चर्चा हुई थी। आगे की प्रक्रिया द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
UFBU ने स्पष्ट किया है कि सुलह प्रक्रिया लंबित रहने के दौरान DFS, IBA या बैंक प्रबंधन द्वारा किसी भी प्रकार की एकतरफा कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है। यूनियन का मानना है कि यह औद्योगिक संबंधों के स्थापित नियमों और कानूनी प्रावधानों के खिलाफ है।
यूनियन ने मुख्य श्रम आयुक्त से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करते हुए कहा है कि इस तरह की एकतरफा कार्रवाई औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33 के तहत गंभीर प्रश्न खड़े करती है। साथ ही, यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि स्थिति को जल्द नहीं संभाला गया, तो बैंकिंग क्षेत्र में औद्योगिक अशांति बढ़ सकती है।
UFBU की प्रमुख मांगें:
- एकतरफा PLI फार्मूले को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए
- सुलह प्रक्रिया का सम्मान किया जाए
- DFS और IBA के साथ संवाद के जरिए समाधान निकाला जाए
- सभी पक्ष मिलकर न्यायसंगत और संतुलित निर्णय लें
वर्तमान आंदोलन यह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि बैंक कर्मचारी और अधिकारी अपनी एकता, अधिकारों और स्थापित व्यवस्थाओं की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। UFBU ने दोहराया है कि वह समाधान के लिए वार्ता के पक्ष में है, लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि संबंधित पक्ष एकतरफा कदम उठाने से बचें और सकारात्मक संवाद की दिशा में आगे बढ़ें।
