Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher
बोकारो | 16 जनवरी 2026
बोकारो इस्पात संयंत्र के तत्वावधान में सेक्टर-5 स्थित बोकारो पुस्तकालय में आयोजित कवि गोष्ठी साहित्य, भावनाओं और रचनात्मक ऊर्जा की स्वरलहरियों से सराबोर रही। शब्दों की गरिमा और संवेदनाओं की गहराई से सजी इस साहित्यिक संध्या ने बोकारो के सशक्त होते सांस्कृतिक और साहित्यिक परिवेश को एक बार फिर रेखांकित किया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सामग्री प्रबंधन डिवीजन के महाप्रबंधक (क्रय) उदय कुमार सिंह ने कहा कि कविता कम शब्दों में गहरे भावों को व्यक्त करने की सबसे सशक्त विधा है। उन्होंने इसे गागर में सागर भरने जैसा बताते हुए कहा कि कविता समाज को सोचने, समझने और संवेदना के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
विशिष्ट अतिथि महाप्रबंधक (संपर्क एवं प्रशासन) चौधरी रत्नेश कुमार सुधांशु ने बोकारो में निरंतर सुदृढ़ हो रहे साहित्यिक माहौल पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए ऐसे आयोजनों को विचार और संवाद की सेतु बताया।
गोष्ठी का शुभारंभ करते हुए डॉ. नरेंद्र कुमार राय ने अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि बीएसएल द्वारा उपलब्ध कराया गया यह साहित्यिक मंच रचनाकारों के लिए आने वाले समय में प्रेरणास्रोत और मील का पत्थर सिद्ध होगा।
काव्य पाठ में विविध भाव और विचार
कवि गोष्ठी के दौरान प्रस्तुत रचनाओं में समाज, राजनीति, संवेदना और लोक-जीवन के विविध रंग देखने को मिले।
- उप महाप्रबंधक (वित्त) बी. बी. तिवारी ने अपनी रचनाओं के माध्यम से साम्राज्यवादी प्रवृत्तियों पर तीखा और प्रभावशाली व्यंग्य प्रस्तुत किया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
- अतुल कुमार, मनोज कुमार निशांत, डॉ. योगेंद्र प्रसाद मुसहर, कनक लता राय, अंकित कुमार उपाध्याय ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को विचारशील बनाया।
इसी क्रम में पद्मावती कोमल, रीना यादव, माला कुमारी, क्रांति श्रीवास्तव, अमृता शर्मा, कस्तूरी सिन्हा, नीलम झा, आर. पी. वर्मा, प्रिय रंजन कुमार और डॉ. नरेंद्र कुमार राय ने भी अपनी रचनाओं से साहित्यिक वातावरण को समृद्ध किया।
लोकसंगीत ने बांधा समां
कार्यक्रम में भोजपुरी गायक श्रीकांत सिंह ने “सोहर – ए राजा जी, एकरे त रहल ह जरूरत” की प्रस्तुति देकर श्रोताओं को लोकसंस्कृति से जोड़ा और पूरे माहौल को भावनात्मक रंग दे दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कस्तूरी सिन्हा ने की, मंच संचालन लव कुमार ने किया जबकि धन्यवाद ज्ञापन अमृता शर्मा द्वारा प्रस्तुत किया गया। आयोजन को सफल बनाने में सहायक प्रबंधक मानस चंद्र रजवार की भूमिका सराहनीय रही।
कुल मिलाकर यह कवि गोष्ठी न केवल कविता का उत्सव बनी, बल्कि बोकारो के साहित्यिक और सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा देने वाला मंच भी सिद्ध हुई।
