Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher
बोकारो | 16 जनवरी 2026
बोकारो को बाल विवाह मुक्त जिला बनाने की दिशा में प्रशासन और समाज को एकजुट करने का सशक्त संदेश शुक्रवार को सेक्टर-05 स्थित पुस्तकालय मैदान से दिया गया। सुरक्षित एवं सशक्त झारखंड विषय पर आयोजित अनुमंडल स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला में उपायुक्त अजय नाथ झा ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि देश का सबसे महत्वपूर्ण और सशक्त संसाधन हैं। उनके जन्म को उत्सव की तरह मनाने की जरूरत है, न कि चिंता का विषय बनाने की।
उपायुक्त ने कहा कि जिस घर में बेटी जन्म ले, वहां गर्व के साथ कहा जाना चाहिए-आपके घर लक्ष्मी आई है। समाज की सोच बदले बिना किसी भी तरह का विकास संभव नहीं है।
कुरीतियों के खिलाफ सख्त संदेश
अपने संबोधन में उपायुक्त ने बाल विवाह और डायन प्रथा जैसी सामाजिक कुरीतियों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि ये प्रथाएं विकास की सबसे बड़ी बाधा हैं। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि जिस तरह सती प्रथा और अन्य अमानवीय परंपराएं समाप्त हुईं, उसी तरह बाल विवाह और डायन कुप्रथा को भी जड़ से मिटाकर इतिहास बनाना होगा।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का आह्वान
महिलाओं के अधिकारों और आत्मसम्मान पर जोर देते हुए उपायुक्त ने कहा कि
- महिला की अभिव्यक्ति, पहनावा और जीवनशैली उसकी निजी पसंद है
- इस पर किसी और का अधिकार नहीं हो सकता
- महिलाओं को दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी आंतरिक शक्ति पहचाननी होगी
उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि केवल उन्हीं हाथों का आशीर्वाद स्वीकार करें, जो आगे बढ़ने और खुश रहने की प्रेरणा दें।
कार्यशाला में यह जानकारी भी साझा की गई कि गोमिया प्रखंड को पूरी तरह बाल विवाह मुक्त घोषित किया जा चुका है। इसी मॉडल पर पूरे बोकारो जिले को बाल विवाह मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया और उपस्थित लोगों को शपथ दिलाई गई।
आंकड़े और सामाजिक जिम्मेदारी
उप विकास आयुक्त शताब्दी मजूमदार ने आंकड़ों के माध्यम से बताया कि वर्तमान में हर पांच में से एक विवाह बाल विवाह है, जिससे भारत वैश्विक स्तर पर चिंताजनक स्थिति में है। उन्होंने कहा कि इसे बदलना केवल प्रशासन की नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक नैतिक जिम्मेदारी है। किसी भी संदिग्ध मामले की सूचना तुरंत पुलिस या संबंधित विभाग को देने की अपील की गई।
ग्रामीण स्तर से लड़ाई जरूरी
जिला परिषद अध्यक्ष सुनीता देवी ने कहा कि बाल विवाह बेटियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य तीनों को प्रभावित करता है। उन्होंने पंचायत प्रतिनिधियों, सहिया और आंगनबाड़ी सेविकाओं से आग्रह किया कि वे गांव-गांव जाकर इस कुप्रथा के खिलाफ मोर्चा संभालें।
कानून, हेल्पलाइन और योजनाओं की जानकारी
जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सुमन गुप्ता ने बताया कि प्रमंडल से लेकर पंचायत स्तर तक बाल विवाह निषेध पदाधिकारी तैनात हैं।
लोगों को निम्न संसाधनों के उपयोग की सलाह दी गई –
- डायल 112
- चाइल्ड हेल्पलाइन 1098
- सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना
- मुख्यमंत्री कन्यादान योजना
सहायक निदेशक सुमन सिंह ने महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े कानूनों और शिकायत निवारण तंत्र की विस्तृत जानकारी दी।
कार्यशाला में जिला शिक्षा अधीक्षक अतुल चौबे, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी रवि कुमार, सहायक जनसंपर्क पदाधिकारी अविनाश कुमार सिंह सहित कई गणमान्य लोग और कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय की छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं।
