Rajesh Mohan Sahay –
रांची, 21 दिसंबर 2025 : रांची स्थित हेवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (एचईसी) में मजदूरों और अधिकारियों का लंबित वेतन एक बार फिर गंभीर मुद्दा बन गया है। एचईसी मजदूर संघ के महामंत्री रमाशंकर प्रसाद ने प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि जहां एक ओर कर्मचारी 28 माह और अधिकारी 31 माह से वेतन के इंतजार में हैं, वहीं दूसरी ओर निदेशकों और शीर्ष अधिकारियों की सुविधाओं में लगातार इजाफा किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि केंद्र सरकार के मंत्रियों द्वारा एचईसी को पुनः पटरी पर लाने के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट है। प्रबंधन द्वारा 18 नई नेक्सॉन एसयूवी और इलेक्ट्रिक गाड़ियों की खरीद की तैयारी की जा रही है, जिससे यह सवाल उठ रहा है कि आर्थिक संकट के दौर में प्रबंधन की प्राथमिकताएं आखिर किस ओर हैं।
भूखा मजदूर, सुविधाओं में लिप्त निदेशक
वेतन नहीं मिलने के कारण मजदूरों के सामने परिवार के भरण-पोषण का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कई मजदूर भूखे पेट काम करने को मजबूर हैं। इसके विपरीत निदेशकों के लिए महंगी लिफ्ट सुविधाएं, मिनरल वाटर, निजी वाहन और कार्यालय कक्षों में बड़े साइज के टीवी उपलब्ध कराए गए हैं। मजदूर संघ का आरोप है कि प्रबंधन को कर्मचारियों की दुर्दशा से कोई सरोकार नहीं है।
जर्जर क्वार्टर बनाम आलीशान आवास
संघ के अनुसार, कई मजदूरों को पिछले दो वर्षों से आवासीय क्वार्टर आवंटित नहीं किए गए हैं। मजदूर क्वार्टरों की हालत अत्यंत जर्जर है। बरसात के समय घरों में पानी भर जाता है और कई स्थानों पर दीवारों में करंट उतरने की शिकायतें सामने आ रही हैं। इसके बावजूद निदेशकों के आवासों पर मरम्मत, पेंटिंग और सुविधाओं के विस्तार पर हजारों रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
बुनियादी सुविधाओं का अभाव
कार्यस्थलों पर मजदूरों के लिए पीने के पानी और शौचालय की समुचित व्यवस्था तक नहीं है। महिला कर्मियों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। शिकायत करने पर प्रबंधन द्वारा सुविधाएं देने से इनकार कर दिया जाता है, जबकि अधिकारियों को सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। आवाज उठाने वाले मजदूरों को परेशान किए जाने का भी आरोप लगाया गया है।
इलाज के लिए भटकते मजदूर
निदेशक (कार्मिक) पर आरोप है कि चिकित्सा सुविधाओं को जानबूझकर दुरुस्त नहीं किया जा रहा। गंभीर रूप से बीमार कर्मचारियों को समय पर रेफर नहीं किए जाने के कारण कई जानें जा चुकी हैं। एक ओर मजदूर इलाज के लिए भटक रहे हैं, तो दूसरी ओर निदेशक अपने कार्यालय कक्षों में मनोरंजन की सुविधाओं का लाभ उठा रहे हैं।
सरकारी निगरानी की मांग
इन हालातों को देखते हुए एचईसी मजदूर संघ और कर्मचारियों ने केंद्र सरकार से सख्त निगरानी की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते वेतन भुगतान, चिकित्सा सुविधा और बुनियादी जरूरतों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो स्थिति और भयावह हो सकती है।
सार्वजनिक उपक्रम एचईसी में अधिकारियों की सुविधाएं और मजदूरों की पीड़ा के बीच बढ़ती खाई आज संस्था की सबसे बड़ी सच्चाई बनकर सामने आ रही है।
