मिथिला काली मंदिर में महारास की रसवृष्टि, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

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Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher

बोकारो, 28 फरवरी 2026: बोकारो के सेक्टर 2डी स्थित श्यामा माई मंदिर (मिथिला काली मंदिर) परिसर में चल रहे होली महोत्सव सह श्रीमद्भागवत कथा रसवृष्टि कार्यक्रम के छठे दिन भक्ति और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। मैथिली कला मंच कालीपूजा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस आयोजन में शनिवार को भारी संख्या में श्रद्धालु जुटे।

वृंदावन से पधारे कथा प्रवक्ता पं. गोविंद कृष्ण शास्त्री ने कृष्ण-रुक्मिणी विवाह, महारास और मथुरा-गमन के भावपूर्ण प्रसंग सुनाकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। गीत-संगीत, मनमोहक झांकियों और शंख-ध्वनि के बीच कथा का प्रवाह श्रद्धालुओं को भावविभोर करता रहा।

कृष्ण-रुक्मिणी विवाह का दिव्य प्रसंग

कथा में बताया गया कि भगवान श्रीकृष्ण ने सभी राजाओं को पराजित कर विदर्भ की राजकुमारी रुक्मिणी को द्वारका लाकर विधिपूर्वक पाणिग्रहण किया। रुक्मिणी को साक्षात लक्ष्मी का स्वरूप बताते हुए कहा गया कि नारायण और लक्ष्मी का मिलन सनातन सत्य है।

महारास और शरद पूर्णिमा की लीला

महारास प्रसंग में शरद पूर्णिमा की रात्रि का वर्णन किया गया, जब यमुना तट पर बांसुरी की मधुर धुन सुनकर गोपियां सज-धजकर पहुंचीं। सभी के हृदय में प्रेम का भाव था, जो पूर्णतः निष्काम और वासना रहित था।
मान्यता के अनुसार निधिवन वह पावन स्थल है जहां श्रीकृष्ण ने महारास रचाया। कथा के दौरान बताया गया कि जितनी गोपियां थीं, उतने ही श्रीकृष्ण के प्रतिरूप प्रकट हो गए और दिव्य रास आरंभ हुआ।

गोपी-उद्धव संवाद का संदेश

मथुरा-गमन प्रसंग में गोपियों का विरह और उनका प्रेमपूर्ण प्रश्न—“जब छोड़कर जाना था तो प्रेम क्यों किया?”—श्रद्धालुओं को भावुक कर गया। कथा में स्पष्ट किया गया कि जब जीव में अहंकार आता है तो ईश्वर दूर हो जाते हैं, लेकिन सच्चे विरह और समर्पण में भगवान स्वयं अनुग्रह करते हैं।

आयोजन में प्रमुख सहभागिता

कार्यक्रम में ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्ण चंद्र झा, महामंत्री सुनील मोहन ठाकुर, यज्ञाचार्य पं. राहुल शर्मा, मुख्य यजमान सुशीला मिश्र, कौशलेंद्र मिश्र, सतीश चंद्र मिश्र, कैलाश कुमार मिश्र, अरुण कुमार ठाकुर, प्रमिला देवी, किरण मिश्र सहित सैकड़ों श्रद्धालु उपस्थित रहे।

आयोजन समिति के अनुसार 01 मार्च को होली उत्सव, भजन-कीर्तन, कृष्ण झांकी और महाप्रसाद वितरण के साथ यज्ञ की पूर्णाहुति होगी। मंदिर परिसर में सजी कृष्ण झांकी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी रही।

भक्ति, संगीत और आध्यात्मिक संदेशों से ओतप्रोत यह आयोजन शहर के सांस्कृतिक कैलेंडर में विशेष स्थान बना रहा है।

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