मिडिल ईस्ट में युद्ध का विस्तार: अमेरिका-इज़राइल के हमलों से ईरान दहला, कई देशों तक फैला तनाव

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Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher

मिसाइल हमले, ड्रोन युद्ध और समुद्री टकराव से बढ़ा संकट; हजारों लोग प्रभावित, वैश्विक तेल आपूर्ति पर भी असर

मध्य-पूर्व में तनाव तेजी से गहराता जा रहा है। ईरान, इज़राइल और संयुक्त राज्य अमेरिका के बीच जारी सैन्य टकराव अब क्षेत्रीय युद्ध का रूप लेता दिखाई दे रहा है। मिसाइल हमलों, हवाई हमलों और समुद्री टकराव के कारण हालात बेहद गंभीर हो गए हैं और कई देशों तक इसका असर फैलने लगा है।

ताजा घटनाक्रम में ईरान के कई शहरों में जोरदार विस्फोटों की आवाज सुनी गई है, जबकि इज़राइल ने ईरानी ठिकानों के साथ-साथ लेबनान में भी हमले तेज कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि हिंद महासागर में अमेरिकी पनडुब्बी ने ईरान के एक युद्धपोत को डुबो दिया, जिससे समुद्री मोर्चे पर भी तनाव काफी बढ़ गया है।

युद्ध के कारण भारी जनहानि की खबरें सामने आ रही हैं। ईरान में अब तक एक हजार से अधिक लोगों के मारे जाने की रिपोर्ट है, जबकि लेबनान और इज़राइल में भी कई लोगों की मौत हुई है। राजधानी तेहरान लगातार हमलों की चपेट में है और संयुक्त राष्ट्र के अनुसार हजारों लोग शहर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं।

इस बीच ईरान की आंतरिक राजनीति को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है। देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली ख़ामेनेई के संभावित उत्तराधिकारी को लेकर चर्चा तेज हो गई है, जिससे राजनीतिक अस्थिरता की आशंका भी बढ़ रही है।

वहीं लेबनान के दक्षिणी हिस्से में सक्रिय संगठन हिज़्बुल्लाह ने दावा किया है कि उसने इज़राइली सेना के सैन्य वाहनों को निशाना बनाया है। दूसरी ओर इज़राइल ने लेबनान की राजधानी बेरूत के दक्षिणी उपनगरों में कई हवाई हमले किए हैं। हमले से पहले इज़राइली सेना ने लोगों को क्षेत्र खाली करने की चेतावनी भी दी थी।

युद्ध का असर क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ने लगा है। फारस की खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ के आसपास मिसाइल हमलों के कारण तेल टैंकरों की आवाजाही काफी कम हो गई है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है और वैश्विक व्यापार पर दबाव बढ़ रहा है।

अमेरिका की घरेलू राजनीति में भी इस युद्ध को लेकर बहस जारी है। अमेरिकी संसद में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की युद्ध संबंधी शक्तियों को सीमित करने का प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है, जिससे संकेत मिलता है कि सरकार को सैन्य कार्रवाई जारी रखने के लिए राजनीतिक समर्थन प्राप्त है। हालांकि ट्रम्प प्रशासन ने फिलहाल ईरान में जमीनी सैनिक भेजने की संभावना से इनकार किया है, लेकिन भविष्य में विकल्प खुले रखने की बात भी कही है।

उधर भारत ने भी इस संकट पर चिंता जताई है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि फारस की खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है। उनके अनुसार मौजूदा स्थिति बेहद जटिल हो चुकी है और आने वाले समय में यह और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

कुल मिलाकर मध्य-पूर्व का यह संघर्ष केवल क्षेत्रीय संकट नहीं रह गया है। बढ़ते सैन्य टकराव, वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर खतरे और कई देशों के इसमें शामिल होने से यह संकट अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में कूटनीतिक प्रयास और सैन्य गतिविधियां ही तय करेंगी कि यह तनाव और बढ़ेगा या किसी समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगा।

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