Arvind Prakash : Sr. Correspondent
नई दिल्ली, 19 मार्च 2026
राजधानी दिल्ली में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कमी ने खाने-पीने के कारोबार को गहरे संकट में डाल दिया है। पिछले एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बावजूद हालात पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाए हैं, जिससे रेस्टोरेंट, होटल और स्ट्रीट फूड विक्रेता सीमित संसाधनों के साथ काम करने को मजबूर हैं।
व्यवसायियों का कहना है कि गैस की अनियमित सप्लाई के कारण उन्हें अपने मेनू में भारी कटौती करनी पड़ी है और कई स्थानों पर काम के घंटे भी घटा दिए गए हैं। इसका सीधा असर उनकी आय पर पड़ा है, जिससे रोजमर्रा का खर्च निकालना भी मुश्किल हो गया है।
कारोबार पर बड़ा असर:
- कमर्शियल LPG की कमी से रेस्टोरेंट और होटल प्रभावित
- मेनू में 70-80% तक कटौती
- काम के घंटे घटे, कई आउटलेट अस्थायी रूप से बंद
- आमदनी में भारी गिरावट
रेस्टोरेंट संचालकों के अनुसार, जहां पहले प्रतिदिन लाखों रुपये की बिक्री होती थी, अब वह घटकर कुछ हजार तक सीमित रह गई है। कई जगहों पर केवल 20% मेनू ही उपलब्ध कराया जा रहा है और खाना भी सीमित मात्रा में तैयार किया जा रहा है।
संचालन में बढ़ी चुनौतियां:
गैस की कमी के साथ-साथ बिजली आधारित उपकरणों के उपयोग से भी समस्याएं सामने आ रही हैं। उपकरण जल्दी गर्म हो रहे हैं और लागत बढ़ रही है, जिससे संचालन और मुश्किल हो गया है।
- इलेक्ट्रिक उपकरणों पर निर्भरता बढ़ी
- आउटलेट्स को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा
- उत्पादन लागत में इजाफा
सप्लाई प्रभावित होने की वजह:
विशेषज्ञों के अनुसार, कमर्शियल LPG सप्लाई में यह रुकावट वैश्विक ऊर्जा हालात से जुड़ी है। वेस्ट एशिया में जारी तनाव और गैस आवंटन नीति में बदलाव का असर सप्लाई चेन पर पड़ा है, जिससे बाजार में कमी देखी जा रही है।
छोटे कारोबारियों पर सबसे ज्यादा असर:
इस संकट का सबसे अधिक असर छोटे विक्रेताओं और ठेला चलाने वालों पर पड़ा है, जिनकी रोज की आय पर सीधा असर हुआ है।
- कई ठेले और छोटी दुकानें बंद
- आमदनी घटने से खर्च चलाना मुश्किल
- कुछ लोग महंगे दाम पर ब्लैक मार्केट से सिलेंडर खरीदने को मजबूर
त्योहारों से पहले बढ़ी चिंता:
नवरात्रि जैसे बड़े त्योहार के दौरान ग्राहकों की संख्या में संभावित गिरावट ने कारोबारियों की चिंता और बढ़ा दी है। कई रेस्टोरेंट अब केवल उन्हीं दिनों खुल पा रहे हैं, जब उन्हें गैस सिलेंडर उपलब्ध हो पा रहा है।
व्यापारिक संगठनों का कहना है कि स्थिति में आंशिक सुधार जरूर हुआ है, लेकिन संकट अभी पूरी तरह टला नहीं है। अगर जल्द समाधान नहीं हुआ, तो दिल्ली का फूड सेक्टर लंबे समय तक आर्थिक दबाव झेल सकता है।
