– रंजीत प्रसाद सिन्हा : संवाददाता
नवपद की आराधना से भक्तिमय हुआ मंदिर परिसर, 25 जुलाई को पूर्णाहुति एवं महाआरती के साथ होगा समापन
पटना, 22 जुलाई। कदमकुआँ स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित छह दिवसीय सिद्धचक्र विधान में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। भगवान जिनेन्द्र के अभिषेक, शांतिधारा, नित्य पूजन एवं सिद्धचक्र विधान के साथ मंदिर परिसर भक्ति, मंत्रोच्चार और स्तुतियों से गुंजायमान हो उठा है। श्रद्धालु आत्मशुद्धि, विश्वशांति और समस्त जीवों के कल्याण की मंगलकामना के साथ विधान में सहभागिता कर रहे हैं।
मंदिर परिसर में वाराणसी से पधारे मुख्य विधानाचार्य पंडित डॉ. कमलेश जैन शास्त्री के सान्निध्य में नवपद—अरिहंत, सिद्ध, आचार्य, उपाध्याय, साधु, सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान, सम्यक चरित्र और सम्यक तप—की विधिपूर्वक आराधना कराई जा रही है। प्रतिदिन प्रातःकाल धार्मिक अनुष्ठान श्रद्धा एवं विधि-विधान के साथ संपन्न हो रहे हैं।
धर्मसभा को संबोधित करते हुए 105 ऐलक गौसर सागर जी महाराज ने कहा कि मंदिर में प्रवेश करते समय श्रद्धालुओं के मन में भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा, समर्पण और भक्ति का भाव होना चाहिए। उन्होंने कहा कि मंदिर केवल दर्शन का स्थान नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आत्मचिंतन का केंद्र है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रसन्न, शांत और जागृत मन से भगवान की आराधना करनी चाहिए।
मुख्य विधानाचार्य पंडित डॉ. कमलेश जैन शास्त्री ने अपने प्रवचन में कहा कि सिद्धचक्र विधान आत्मा के शुद्धिकरण और मोक्षमार्ग की साधना का श्रेष्ठ माध्यम है। उन्होंने कहा कि नवपद की आराधना से सम्यक दर्शन, सम्यक ज्ञान और सम्यक चरित्र का विकास होता है तथा जीवन में संयम, सदाचार और आध्यात्मिक चेतना का संचार होता है। उन्होंने श्रद्धालुओं से निष्कपट भाव, विनम्रता और सच्ची भक्ति के साथ भगवान की आराधना करने का आह्वान किया।
पाटलिपुत्र दिगम्बर जैन समिति के महामंत्री ज्ञानचंद पाटनी ने बताया कि विधान में मीठापुर, मुरादपुर, पटना सिटी, गुलजारबाग सहित राजधानी के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा कोलकाता, विराटपुर तथा अन्य राज्यों से आए श्रद्धालु बड़ी संख्या में भाग ले रहे हैं। मंदिर की आकर्षक सजावट, सुसज्जित वेदी और अनुशासित धार्मिक वातावरण श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
आयोजन समिति के अनुसार छह दिवसीय सिद्धचक्र विधान का समापन 25 जुलाई को पूर्णाहुति, हवन, महाआरती एवं अन्य धार्मिक अनुष्ठानों के साथ होगा। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

