कठपुतली आधारित राष्ट्रीय कार्यशाला संपन्न

Live ख़बर

– एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट

राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप आयोजित 15 दिवसीय कार्यशाला के सिद्धि समारोह में 13 राज्यों के 107 शिक्षकों को प्रदान किए गए प्रमाण-पत्र

नई दिल्ली, 24 जुलाई: संस्कृति मंत्रालय के सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप आयोजित “शिक्षा में कठपुतली की भूमिका” विषयक 15 दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का सिद्धि समारोह नई दिल्ली स्थित सीसीआरटी मुख्यालय में गरिमापूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यशाला में देश के 13 राज्यों से आए 107 शिक्षक प्रतिभागियों ने हिस्सा लेकर पारंपरिक कला के माध्यम से शिक्षा को अधिक प्रभावी और रचनात्मक बनाने के विभिन्न आयामों पर प्रशिक्षण प्राप्त किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रगीत “वंदे मातरम्” के साथ हुआ। इसके बाद प्रतिभागी शिक्षकों ने स्वागत नृत्य, राम भजन तथा असम के पारंपरिक बिहू नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति देकर भारतीय सांस्कृतिक विविधता की झलक प्रस्तुत की।

समारोह के मुख्य अतिथि राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा के महानिदेशक डॉ. संजीव किशोर गौतम रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता सीसीआरटी के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर ने की। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में भारतीय कला एवं संस्कृति के समावेश की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि कठपुतली जैसी पारंपरिक कला विधाएं विद्यार्थियों में सृजनात्मकता, अभिव्यक्ति कौशल, संवाद क्षमता और सांस्कृतिक मूल्यों के विकास का प्रभावी माध्यम बन सकती हैं।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के उद्देश्यों के अनुरूप शिक्षण प्रक्रिया में कला-आधारित नवाचारों को अपनाने पर जोर देते हुए कहा कि ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रम शिक्षकों को आधुनिक एवं रचनात्मक शिक्षण पद्धतियों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

समारोह के दौरान सभी प्रतिभागी शिक्षकों को प्रशिक्षण पूर्ण करने पर प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। आयोजन में शिक्षा और संस्कृति के समन्वय के माध्यम से विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में इस पहल को महत्वपूर्ण बताया गया।