पुनर्वास विवाद में फंसी कारो स्पेशल फेज-दो परियोजना

Live ख़बर

– Santosh K Srivastav : Editor in Chief & Publisher

बड़वाबेड़ा गांव का विस्थापन दो वर्षों से लंबित, 40 लाख टन कोयला भंडार तक पहुंच बाधित; मुआवजा और रोजगार को लेकर ग्रामीणों व सीसीएल के दावों में मतभेद

बोकारो थर्मल, 01 जुलाई। सीसीएल के बीएंडके (बोकारो-करगली) क्षेत्र अंतर्गत कारो स्पेशल फेज-दो मेगा ओपनकास्ट कोयला परियोजना में बड़वाबेड़ा गांव के पुनर्वास का मामला पिछले दो वर्षों से लंबित है। पुनर्वास प्रक्रिया में लगातार हो रहे विरोध के कारण परियोजना की प्रगति प्रभावित हो रही है। कंपनी का कहना है कि गांव के नीचे लगभग 40 लाख टन उच्च गुणवत्ता का कोयला भंडार मौजूद है, जिसके दोहन के लिए गांव का पुनर्वास आवश्यक है।

सीसीएल प्रबंधन के अनुसार, पुनर्वास नहीं होने की स्थिति में परियोजना के विस्तार में बाधा आ रही है, जिससे कोयला उत्पादन प्रभावित होने के साथ कंपनी और कोल इंडिया को आर्थिक नुकसान की आशंका है। वहीं खनन और ब्लास्टिंग गतिविधियों के कारण ग्रामीणों की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं जताई गई हैं।

प्रबंधन ने बड़वाबेड़ा गांव के पुनर्वास के लिए चरणबद्ध योजना तैयार की है। पहले चरण में दरगाह मोहल्ला सहित लगभग 80 से 250 परिवारों तथा दूसरे चरण में शेष परिवारों को स्थानांतरित करने की योजना है। प्रस्तावित पुनर्वास स्थल कारो स्पेशल फेज-दो के निकट विकसित किया गया है, जहां प्रत्येक परिवार को पांच डिसमिल भूमि, निर्धारित मुआवजा, रोजगार के अवसर तथा सड़क, बिजली और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना बताई गई है। कंपनी के अनुसार पुनर्वास स्थल की घेराबंदी का कार्य भी पूरा किया जा चुका है।

Follow this link to JOIN our WhatsApp Community

हाल ही में परियोजना पदाधिकारी सुमेधानंदन के नेतृत्व में प्रशासन, सीसीएल, सीआईएसएफ, सुरक्षा कर्मियों और पुलिस बल की टीम जेसीबी मशीनों के साथ स्थल पर पहुंची थी। इस दौरान गोविंदपुर, राजा बाजार, नई बस्ती, बाजारटांड़ और नूरी नगर के विस्थापित, विस्थापित संघर्ष समिति के बैनर तले विरोध प्रदर्शन के लिए एकत्र हो गए। प्रदर्शन के दौरान तनावपूर्ण स्थिति उत्पन्न हुई, जिसके बाद प्रशासनिक टीम को कार्रवाई स्थगित कर लौटना पड़ा।

विस्थापितों का कहना है कि अधिग्रहित भूमि के बदले उन्हें नियमानुसार रोजगार और उचित मुआवजा नहीं मिला है। उनका कहना है कि यदि रोजगार उपलब्ध नहीं कराया जा सकता, तो अधिग्रहित भूमि वापस की जाए। अपनी मांगों के समर्थन में ग्रामीणों ने पूर्व में विवादित भूमि पर सामूहिक जुताई भी की थी। मामले के समाधान के लिए प्रशासन, सीसीएल प्रबंधन और विस्थापितों के बीच कई दौर की त्रिपक्षीय वार्ता भी हुई, लेकिन अब तक सर्वमान्य समाधान नहीं निकल सका है।

दूसरी ओर, सीसीएल प्रबंधन का दावा है कि संबंधित भूमि लगभग 40 से 45 वर्ष पहले विधिवत अधिग्रहित की जा चुकी है तथा वर्ष 1980 के समझौते के अनुसार पात्र लोगों को मुआवजा और नियमानुसार रोजगार उपलब्ध कराया गया था। प्रबंधन का कहना है कि वर्तमान में की जा रही 21 अतिरिक्त नौकरियों की मांग का कोई वैधानिक आधार नहीं है। कंपनी के अनुसार पुनर्वास स्थल के विकास और आधारभूत सुविधाओं पर लगभग 17 करोड़ रुपये व्यय किए जा चुके हैं।

प्रबंधन ने सरकारी कार्य में बाधा डालने के आरोप में कुछ लोगों के विरुद्ध बोकारो थर्मल थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई है। वहीं विस्थापितों ने भी सीसीएल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर थाना में आवेदन दिया है। दोनों पक्षों के बीच विवाद जारी रहने से कारो स्पेशल फेज-दो परियोजना का कार्य फिलहाल प्रभावित है और समाधान की दिशा में सभी की निगाहें प्रशासनिक पहल एवं आपसी सहमति पर टिकी हैं।