बोकारो में स्थानांतरण को लेकर राज्यपाल से शिकायत

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Santosh Kr. Srivastav : Editor in Chief & Publisher

जिला स्थापना समिति की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, नियम विरुद्ध स्थानांतरण और कर्मियों की दोबारा पुरानी जगह पदस्थापना का आरोप

बोकारो। बोकारो जिले में विभिन्न संवर्गों के कर्मियों के स्थानांतरण एवं पदस्थापन को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। डॉ. राज कुमार ने 20 नवंबर 2025 को महामहिम राज्यपाल, झारखंड को शिकायत पत्र भेजकर जिला स्थापना समिति की कार्यप्रणाली, बार-बार होने वाले स्थानांतरण तथा कुछ कर्मियों को अल्प अवधि के बाद पुनः पूर्व पदस्थापन वाले कार्यालय में भेजे जाने की जांच कराने की मांग की है।

शिकायत की प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक, कार्मिक प्रशासनिक एवं राजभाषा सुधार विभाग, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो, प्रमंडलीय आयुक्त हजारीबाग तथा उपायुक्त बोकारो को भी भेजे जाने की बात आवेदन में कही गई है।

एक वर्ष में कई बार स्थापना समिति की बैठक का दावा

शिकायतकर्ता ने आवेदन में दावा किया है कि जुलाई 2024 से नवंबर 2025 के बीच जिला स्थापना समिति की कई बैठकें आयोजित कर बड़ी संख्या में कर्मियों के स्थानांतरण किए गए। आवेदन में 8 जुलाई 2024, 31 दिसंबर 2024, 13 जून 2025, 1 सितंबर 2025 तथा 17 नवंबर 2025 की बैठकों का उल्लेख किया गया है।

शिकायत के अनुसार, 8 जुलाई 2024 की बैठक में कार्यालय अधीक्षक, प्रधान लिपिक, उच्चवर्गीय लिपिक, निम्नवर्गीय लिपिक एवं लेखा लिपिक समेत बड़ी संख्या में कर्मियों का स्थानांतरण किया गया। 31 दिसंबर 2024 की बैठक में भी विभिन्न श्रेणियों के कर्मियों के स्थानांतरण के साथ उसी दिन संशोधन आदेश जारी किए जाने का उल्लेख है। वहीं 17 नवंबर 2025 की बैठक में 67 कर्मियों के स्थानांतरण का दावा किया गया है।

अलग-अलग संवर्गों के स्थानांतरण पर उठाया सवाल

शिकायतकर्ता का आरोप है कि एक ही स्थानांतरण आदेश में लिपिक, प्रखंड कार्यक्रम पदाधिकारी, पंचायत सचिव, महिला पर्यवेक्षिका, चौकीदार तथा अनुबंध/बाह्य स्रोत कर्मियों का स्थानांतरण किया गया।

आवेदन में कहा गया है कि अलग-अलग संवर्गों के कर्मियों के स्थानांतरण के लिए संबंधित विभागीय अथवा सक्षम समितियों की भूमिका निर्धारित है। ऐसे में सभी संवर्गों का स्थानांतरण जिला स्थापना समिति के माध्यम से किए जाने की प्रक्रिया की जांच आवश्यक है।

पुराने कार्यालय में पुनः पदस्थापना को लेकर सवाल

शिकायत में कई कर्मियों के स्थानांतरण और फिर अल्प अवधि के भीतर उनके पूर्व कार्यालय में वापस पदस्थापन का विवरण दिया गया है।

आवेदन में रेणु कुमारी को जिला अभिलेखागार से अंचल कार्यालय चास और फिर वापस जिला अभिलेखागार, विजय कुमार को जिला स्थापना शाखा से गोमिया और फिर वापस स्थापना शाखा, सुनील चंद्र पाल को भूमि सुधार उपसमाहर्ता कार्यालय चास से बेरमो अनुमंडल और फिर वापस चास, हेमेन्द्र कुमार को जिला आपूर्ति कार्यालय से जरीडीह और फिर वापस जिला आपूर्ति कार्यालय तथा प्रमोद सिंह को सामान्य शाखा से प्रखंड कार्यालय चास भेजे जाने के बाद पुनः सामान्य शाखा में पदस्थापित किए जाने का उल्लेख है।

इसी प्रकार रामानंदन प्रसाद, अब्दुल मजीद अंसारी, राजेश पाण्डेय, आनंद भारती, अंजू रानी और बनारस महतो समेत अन्य कर्मियों के स्थानांतरण एवं पुनः पूर्व कार्यालय में पदस्थापन का भी विवरण शिकायत में दिया गया है।

कुछ कर्मियों के पूर्व आरोपों का भी उल्लेख

शिकायतकर्ता ने कुछ कर्मियों के पूर्व में सामने आए आरोपों अथवा शिकायतों का उल्लेख करते हुए उनके वर्तमान पदस्थापन पर सवाल उठाया है। आवेदन में राजेश पाण्डेय समेत कुछ कर्मियों के नाम दिए गए हैं और दावा किया गया है कि पूर्व में प्रशासनिक कारणों से किए गए स्थानांतरण के बाद उन्हें पुनः महत्वपूर्ण कार्यालयों में पदस्थापित किया गया।

शिकायत में यह भी कहा गया है कि कुछ कर्मियों को एक वर्ष के भीतर ही उनके पूर्व पदस्थापन वाले कार्यालय में वापस भेजा गया, जबकि सामान्यतः लंबे समय तक एक ही स्थान पर कार्यरत कर्मियों के स्थानांतरण की व्यवस्था के तहत प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।

सेवानिवृत्ति के करीब कर्मियों के स्थानांतरण पर भी आपत्ति

आवेदन में उमेश कुमार और जितेन्द्र कुमार के स्थानांतरण का भी उल्लेख है। शिकायतकर्ता के अनुसार, उमेश कुमार की सेवानिवृत्ति दिसंबर 2025 में तथा जितेन्द्र कुमार की सेवानिवृत्ति वर्ष 2027 में होनी थी। ऐसे में सेवानिवृत्ति के करीब कर्मियों के स्थानांतरण के औचित्य की भी जांच की मांग की गई है।

संविदा कर्मियों के स्थानांतरण पर भी सवाल

शिकायत में बाह्य स्रोत एवं संविदा कर्मियों के स्थानांतरण का भी उल्लेख किया गया है। क्रमांक 61 से 65 तक के कर्मियों के स्थानांतरण को शिकायतकर्ता ने नियम विरुद्ध बताया है।

इसके अलावा महिला पर्यवेक्षिका नितु सिंह के संबंध में शिकायत में कहा गया है कि उनका स्थानांतरण पहले ही 16 अक्टूबर 2025 के आदेश से बाल विकास परियोजना कार्यालय, चास ग्रामीण में किया गया था और उन्होंने योगदान भी दे दिया था। इसके बाद पुनः उनके स्थानांतरण का उल्लेख शिकायत में किया गया है।

उपायुक्त कार्यालय से जुड़े कर्मी को लेकर भी शिकायत

शिकायतकर्ता ने उपायुक्त कार्यालय में स्टेनो के पद पर लंबे समय से कार्यरत अजय कुमार नामक अनुबंध/संविदा/ठेका कर्मी की कार्य व्यवस्था पर भी सवाल उठाए हैं। आवेदन में दावा किया गया है कि वे करीब 17 वर्षों से उक्त व्यवस्था में कार्यरत हैं।

शिकायतकर्ता ने इस लंबे समय से चली आ रही प्रतिनियुक्ति/कार्य व्यवस्था की भी जांच कराने तथा नियमों के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है।

अवैध वसूली के गंभीर आरोप

शिकायत पत्र में स्थानांतरण के नाम पर व्यापक स्तर पर अवैध वसूली किए जाने के गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि कुछ अधिकारियों एवं कर्मियों की मिलीभगत से कथित रूप से आर्थिक लेन-देन के आधार पर स्थानांतरण किए गए।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस शिकायत पत्र के आधार पर नहीं हुई है। संबंधित अधिकारियों एवं जिन कर्मियों के नाम शिकायत में दिए गए हैं, उनका पक्ष इस शिकायत के साथ उपलब्ध नहीं है। इसलिए आरोपों की सत्यता जांच का विषय है।

राज्यपाल से निष्पक्ष जांच की मांग

डॉ. राज कुमार ने राज्यपाल से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, नियम विरुद्ध पाए जाने वाले स्थानांतरणों पर रोक लगाने तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

शिकायत के साथ जिला स्थापना समिति की विभिन्न बैठकों से संबंधित आदेशों तथा समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों की प्रतियां संलग्न किए जाने का उल्लेख है।

गौरतलब है कि शिकायतकर्ता ने बाद में यह दावा भी किया है कि उनकी शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि प्रमंडलीय आयुक्त, हजारीबाग की जांच रिपोर्ट में हुई है। हालांकि उपलब्ध दस्तावेजों में उक्त जांच रिपोर्ट की स्पष्ट प्रति नहीं होने के कारण इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि इस रिपोर्ट में नहीं की जा रही है। मामले में जांच रिपोर्ट और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।