– एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट
विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन के प्रावधानों से पंचायत प्रतिनिधियों को कराया गया अवगत
भागलपुर, 8 अगस्त 2026। ग्रामीण विकास विभाग, बिहार सरकार के निर्देश पर भागलपुर जिला प्रशासन की ओर से विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम-2025 के तहत त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं के जनप्रतिनिधियों का एक दिवसीय ‘पंच सम्मेलन’ शनिवार को भागलपुर के टाउन हॉल में आयोजित किया गया। सम्मेलन का उद्देश्य पंचायत प्रतिनिधियों को अधिनियम के प्रावधानों के प्रति जागरूक एवं प्रशिक्षित करना तथा ग्रामीण क्षेत्रों में इसके प्रभावी क्रियान्वयन में उनकी भूमिका को स्पष्ट करना रहा।
कार्यक्रम का उद्घाटन दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। सम्मेलन में भागलपुर के जिलाधिकारी, जिला परिषद अध्यक्ष, उप विकास आयुक्त, जिला परिषद उपाध्यक्ष, सभी प्रखंड प्रमुख, जिला परिषद सदस्य, मुखिया, पंचायत समिति सदस्य सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित रहे।
मनरेगा के स्थान पर नई व्यवस्था लागू होने की जानकारी
सम्मेलन में बताया गया कि केंद्र सरकार द्वारा संचालित मनरेगा योजना के स्थान पर 1 जुलाई 2026 से विकसित भारत गारंटी रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम-2025 लागू किया गया है। राज्य और जिले में नई व्यवस्था के तहत कार्य किया जा रहा है।
ग्रामीण भारत के सुदृढ़ विकास में त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को देखते हुए जनप्रतिनिधियों को अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में ग्रामीण समुदाय और श्रमिकों को नई व्यवस्था के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

रोजगार गारंटी 100 से बढ़कर 125 दिन
पंच सम्मेलन में अधिनियम के तहत ग्रामीण विकास को नई गति देने वाले विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से जानकारी दी गई। इनमें रोजगार गारंटी को 100 दिनों से बढ़ाकर 125 दिन किया जाना प्रमुख है। समय पर कार्य उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में बेरोजगारी भत्ता देने का भी प्रावधान बताया गया।
नई व्यवस्था में केंद्र और राज्य के बीच 60:40 वित्तीय साझेदारी तथा पूर्वोत्तर एवं हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 की साझेदारी का प्रावधान बताया गया। ग्राम पंचायतों को ए, बी और सी श्रेणियों में वर्गीकृत कर आवश्यकतानुसार विकास योजना तैयार करने की व्यवस्था भी रखी गई है।
इसके साथ ही प्रत्येक ग्राम पंचायत के लिए विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP) तैयार करने तथा चार प्रमुख विषयगत क्षेत्रों में 318 प्रकार के विकास कार्यों को अनुमेय बनाए जाने की जानकारी दी गई।
सामाजिक अंकेक्षण और तकनीक पर जोर
सम्मेलन में प्रत्येक छह माह में अनिवार्य सामाजिक अंकेक्षण (Social Audit) और साप्ताहिक सार्वजनिक प्रकटीकरण की व्यवस्था पर भी चर्चा हुई। पारदर्शिता और निगरानी के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण, जियोस्पेशियल तकनीक तथा रियल-टाइम डैशबोर्ड आधारित निगरानी व्यवस्था का प्रावधान बताया गया।
योजना निर्माण, ऑडिट और जोखिम न्यूनीकरण में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग को भी नई व्यवस्था का हिस्सा बताया गया। इसके अलावा न्यूनतम मजदूरी 300 रुपये प्रतिदिन तथा मजदूरी दरों में औसतन 10 प्रतिशत वृद्धि का प्रावधान भी सम्मेलन में प्रमुखता से रखा गया।
ग्राम पंचायतों की भूमिका होगी और महत्वपूर्ण
नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतों की भूमिका को पहले की तुलना में और अधिक महत्वपूर्ण बताया गया। ग्राम सभा की सक्रिय सहभागिता, विकसित ग्राम पंचायत योजना (VGPP), आधुनिक तकनीक, सामाजिक अंकेक्षण, पारदर्शी कार्य प्रणाली तथा विभिन्न विभागों के समन्वित प्रयासों के माध्यम से पंचायतों को अपने क्षेत्र के समग्र विकास की योजना तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है।
सम्मेलन में बताया गया कि स्थानीय आवश्यकताओं के अनुरूप विकास योजनाएं तैयार होने से ग्रामीण क्षेत्रों की वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी। साथ ही योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में भी प्रभावी कदम उठाया जा सकेगा।
नई व्यवस्था का उद्देश्य केवल विकास योजनाओं का क्रियान्वयन करना नहीं, बल्कि गांवों को आत्मनिर्भर, स्वावलंबी, स्वच्छ, समृद्ध और विकसित बनाने की दिशा में पंचायतों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना है। पंच सम्मेलन के माध्यम से जनप्रतिनिधियों को इसी जिम्मेदारी के लिए तैयार करने पर जोर दिया गया।

