– संतोष श्रीवास्तव, मुख्य संपादक सह प्रकाशक
निगरानी न्यायालय ने भ्रष्टाचार मामले में तीन-तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 25-25 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई
पटना, 18 अगस्त 2026। निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, बिहार की कार्रवाई में एक महत्वपूर्ण सफलता मिली है। पटना स्थित विशेष निगरानी न्यायालय ने भ्रष्टाचार के एक मामले में समस्तीपुर जिले के दलसिंहसराय के अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार विमल को दोषी करार देते हुए सजा सुनाई है। न्यायालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 तथा धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत दोषसिद्धि की है।
मामला निगरानी थाना कांड संख्या 13/2010 एवं विशेष वाद संख्या 10/2010 से संबंधित है। मामले के परिवादी वैद्यनाथ पंडित प्रभाकर, तत्कालीन प्रभारी प्रधानाध्यापक, राजकीय उत्क्रमित मध्य विद्यालय, सरारी, प्रखंड मोहनपुर, थाना पटोरी, जिला समस्तीपुर थे।
आरोप के अनुसार, विद्यालय के निरीक्षण के दौरान तत्कालीन अनुमंडल शिक्षा पदाधिकारी विनोद कुमार विमल ने कैश बुक, साइट बुक आदि कागजात जब्त किए थे। आरोप है कि इन दस्तावेजों को लौटाने और कोई कार्रवाई नहीं करने के एवज में परिवादी से 50 हजार रुपये रिश्वत की मांग की गई थी। मामले में 10 फरवरी 2010 को 25 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए आरोपी को गिरफ्तार किया गया था।
मामले के तत्कालीन अनुसंधानकर्ता मृत्युंजय कुमार चौधरी, पुलिस उपाधीक्षक, निगरानी अन्वेषण ब्यूरो, पटना ने समय पर आरोप-पत्र दाखिल किया। अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 11 गवाहों की गवाही कराई गई। बिहार सरकार की ओर से विशेष लोक अभियोजक निगरानी विजय भानु ने प्रभावी पैरवी की, जिसके बाद न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार दिया।
न्यायालय ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। वहीं धारा 13(2) सहपठित धारा 13(1)(डी) के तहत भी तीन वर्ष के सश्रम कारावास और 25 हजार रुपये अर्थदंड की सजा दी गई है। अर्थदंड की राशि जमा नहीं करने पर चार माह का साधारण कारावास भुगतना होगा। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
वर्ष 2026 में भ्रष्टाचार के 16 मामलों में सजा
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो के अनुसार, वर्ष 2026 में अब तक भ्रष्टाचार से जुड़े कुल 16 मामलों में न्यायालय द्वारा सजा सुनाई जा चुकी है। वर्तमान मामला इन मामलों में 16वां बताया गया है।
निगरानी ब्यूरो के रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2026 में जिन मामलों में दोषसिद्धि हुई है, उनमें रिश्वत की रकम से जुड़े पुराने मामले भी शामिल हैं। इनमें सीताराम चौधरी, जयराम सिंह, नरेश प्रसाद, सुदामा राय, राम नरेश प्रसाद, कृष्णदेव पासवान, लाल बाबू प्रसाद, ओम प्रकाश, धरणीधर राय, अशोक पासवान, भोला पासवान, रामाशंकर सिंह, प्रदीप कुमार, उपेंद्र शर्मा, अरविंद कुमार सिन्हा और वर्तमान मामले में विनोद कुमार विमल शामिल हैं।
निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कहा है कि भ्रष्टाचार के विरुद्ध अभियोजन की कार्रवाई लगातार जारी है। वर्तमान मामले में विशेष निगरानी न्यायालय, पटना के न्यायाधीश अतुल कुमार सिंह ने दोषसिद्धि की कार्रवाई की है।

