देश में सब ठीक है – बस थोड़ा-सा “समायोजन” बाकी है

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अभिनव श्रीवास्तव

हमारा देश बड़ा ही आशावादी देश है। यहाँ हर समस्या का समाधान मौजूद है – बस समाधान मिलने से पहले थोड़ा धैर्य रखना पड़ता है और उससे भी ज़्यादा “समायोजन” करना पड़ता है।

सड़क टूटी हो तो शिकायत क्यों? आखिर गड्ढों से भरी सड़कें हमें जीवन का बड़ा पाठ सिखाती हैं – संतुलन और धैर्य का। जो लोग रोज़ मोटरसाइकिल से इन सड़कों पर चलते हैं, वे अनजाने में ही योग और जिम्नास्टिक का अभ्यास कर लेते हैं। सरकार फिटनेस पर इतना ध्यान दे रही है, फिर भी लोग आलोचना करते हैं – यह तो सरासर नाइंसाफी है।

बिजली कभी-कभी चली जाती है, तो कुछ लोग नाराज़ हो जाते हैं। पर वे यह नहीं समझते कि यह दरअसल “डिजिटल डिटॉक्स” योजना का हिस्सा है। जब बिजली नहीं रहती तो मोबाइल, टीवी और इंटरनेट से स्वतः दूरी बन जाती है। परिवार के लोग आपस में बातचीत करते हैं, बच्चे दादी-नानी की कहानियाँ सुनते हैं। इतनी सुंदर सामाजिक पहल के बावजूद लोग शिकायत कर रहे हैं!

सरकारी दफ्तरों में फाइलें धीरे चलती हैं—इस पर भी लोगों को आपत्ति है। लेकिन यह भी प्रशासन का गहरा दर्शन है। अगर हर काम तुरंत होने लगे, तो लोगों के जीवन से इंतज़ार और धैर्य जैसी महान भारतीय परंपराएँ ही खत्म हो जाएँगी। इसलिए फाइलें धीरे-धीरे चलती हैं, ताकि नागरिकों में सहनशीलता बनी रहे।

महंगाई बढ़ जाए तो भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। इससे लोगों में सादगी का भाव पैदा होता है। कम चीज़ों में काम चलाने की कला विकसित होती है। आखिर हमारे ऋषि-मुनि भी तो न्यूनतम संसाधनों में जीवन जीने की शिक्षा देते आए हैं।

राजनीति में बयानबाज़ी और आरोप-प्रत्यारोप बढ़ जाएँ, तो भी घबराने की क्या बात है? इसे लोकतंत्र का सांस्कृतिक उत्सव समझना चाहिए। जितनी ज़्यादा बहस, उतना ज़्यादा लोकतंत्र – कम से कम टीवी चैनलों पर तो यही बताया जाता है।

असल में समस्या देश में नहीं है, समस्या हमारी आदतों में है। हम हर बात पर सवाल पूछने लगते हैं, हर स्थिति में तुरंत सुधार चाहते हैं। जबकि व्यवस्था हमसे सिर्फ इतना कहती है –
“थोड़ा-सा समायोजन कर लीजिए।”

और सच कहिए तो हम इसमें माहिर भी हैं।
हम ट्रैफिक में समायोजन कर लेते हैं, महंगाई में समायोजन कर लेते हैं, व्यवस्था की खामियों में भी समायोजन कर लेते हैं।

यानी कुल मिलाकर निष्कर्ष यही है –
देश में सब ठीक है।

बस हमें थोड़ा-सा और…
समायोजन करना बाकी है।