
– आचार्य संतोष
दीपावली के दूसरे दिन को भारत में “भाई दूज” और “चित्रगुप्त पूजा” के रूप में मनाया जाता है। यह दिन स्नेह, कर्तव्य और कर्म का संगम प्रस्तुत करता है — एक ओर भाई-बहन के प्रेम का पर्व, वहीं दूसरी ओर ज्ञान, न्याय और धर्म के अधिष्ठाता भगवान चित्रगुप्त की आराधना का शुभ अवसर है। भारतीय संस्कृति में इसे “यम द्वितीया” के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसका संबंध यमराज और उनकी बहन यमुना से जुड़ा है।
भारतीय संस्कृति में प्रत्येक पर्व केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक संदेश का वाहक भी होता है। दीपावली के पांच दिवसीय महापर्व का यह विशेष दिन न केवल भाई-बहन के पवित्र स्नेह और आशीर्वाद का प्रतीक है, बल्कि कर्म, न्याय और ज्ञान के अधिष्ठाता भगवान चित्रगुप्त की पूजा का अवसर भी प्रदान करता है।
भाई दूज के धार्मिक और पौराणिक महत्व के अनुसार, जब यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने अयोध्या आए, तो यमुना ने प्रेमपूर्वक उनका स्वागत किया, तिलक किया और उन्हें भोजन कराया। प्रसन्न होकर यमराज ने वरदान दिया कि जो बहन इस दिन अपने भाई का तिलक करेगी और स्नेहपूर्वक भोजन कराएगी, उस भाई की आयु लंबी होगी और वह मृत्यु के भय से मुक्त रहेगा। तभी से यह दिन “यम द्वितीया” या “भाई दूज” के रूप में मनाया जाने लगा।
स्कंद पुराण में उल्लेख है:
“यम द्वितीया तु या नाम, तस्यां यं ब्राता तिलकं लभेत्।
तस्य न भवति मृत्युभयम्॥”
अर्थात — इस द्वितीया तिथि पर जो भाई अपनी बहन से तिलक ग्रहण करता है, वह अकाल मृत्यु से मुक्त होता है। इस प्रकार, यह पर्व केवल उत्सव का अवसर नहीं है, बल्कि स्नेह, सुरक्षा और शुभकामना का प्रतीक भी है, जो भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत बनाता है और समाज में प्रेम तथा धर्म की भावना को प्रबल करता है।
शुभ मुहूर्त
- द्वितीया तिथि का आरंभ 22 अक्टूबर, 2025 को अपराह्न 08:18 बजे से. और समापन 23 अक्टूबर, 2025 को अपराह्न 10:47 बजे तक।
- उदया तिथि के अनुसार यम द्वितीया का पर्व 23 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
- अपराह्न 12:59 बजे से 03:50 बजे तक राहु काल तथा अशुभ काल रहेगा। अतः इस समय का त्याग करें।
- अभिजीत मुहूर्त : 11:10 बजे से 11:56 बजे तक।
भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि जीवन-दर्शन है। भाई दूज स्नेह का प्रतीक है तो चित्रगुप्त पूजा कर्म और न्याय की चेतना का। भगवान चित्रगुप्त की कथा यह सिखाती है कि ज्ञान और धर्म का संतुलन ही सच्ची समृद्धि और मोक्ष का मार्ग है।
– आचार्य संतोष
(ज्योतिष विशारद एवं वास्तु आचार्य)
(वेदांत साधक एवं भारतीय संस्कृति के प्रचारक)
वास्तु शुद्धि और जन्म कुंडली जागरण के लिए
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