डीपीएस बोकारो प्राचार्य बने प्रमाणित मध्यस्थ

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Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher

बोकारो | 23 फरवरी 2026

शिक्षा जगत में तीन दशक से अधिक समय से सक्रिय Delhi Public School Bokaro के प्राचार्य डॉ. अवनींद्र सिंह गंगवार ने एक और उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने Supreme Court of India की Mediation and Conciliation Project Committee द्वारा आयोजित मध्यस्थता की अवधारणा एवं तकनीक पर आधारित 40 घंटे के विशेष प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूर्ण किया है।

18 दिसंबर 2025 से 21 फरवरी 2026 तक हाइब्रिड मोड में आयोजित इस गहन प्रशिक्षण के उपरांत विद्यालय परिवार ने उन्हें बधाई देते हुए इसे संस्थान और पूरे झारखंड के शिक्षा क्षेत्र के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया।

अब शिक्षाविद के साथ शांतिदूत की भूमिका

इस प्रशिक्षण के बाद डॉ. गंगवार एक प्रमाणित मध्यस्थ (Certified Mediator) के रूप में भी मान्यता प्राप्त कर चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट के प्रमाणन के साथ वे अब विभिन्न न्यायालयों—जिला न्यायालय, उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय—के मध्यस्थता केंद्रों में पैनलबद्ध हो गए हैं।

इसका अर्थ है कि न्यायालय आपसी सहमति से सुलझाए जा सकने वाले मामलों को उनके पास भेज सकते हैं।

मध्यस्थता क्या है?

सरल शब्दों में, मीडिएशन यानी मध्यस्थता वह प्रक्रिया है जिसमें दो पक्षों के बीच विवाद को अदालत की लंबी प्रक्रिया से बचाते हुए संवाद और सहमति के माध्यम से सुलझाया जाता है।

इस प्रशिक्षण की प्रमुख विशेषताएँ:

  • अंतरराष्ट्रीय न्यायिक मानकों के अनुरूप पाठ्यक्रम
  • संवाद आधारित समाधान तकनीक
  • विवाद प्रबंधन की व्यावहारिक कार्यशाला
  • अनुभवी प्रशिक्षकों इला रावत और राजीव ठकराल का मार्गदर्शन

एमसीपीसी देशभर में ऐसे विशेषज्ञ तैयार करती है, जो कानूनी जटिलताओं के बजाय मानवीय दृष्टिकोण से समाधान खोजने में दक्ष हों।

शिक्षा और न्याय का समन्वय

डॉ. गंगवार ने इस उपलब्धि को केवल व्यक्तिगत सम्मान नहीं, बल्कि सामाजिक दायित्व बताया। उनका कहना है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अकादमिक ज्ञान देना नहीं, बल्कि समाज में शांति, संवाद और सामंजस्य की भावना विकसित करना है।

उनके अनुसार, अधिकांश विवादों का स्थायी समाधान अदालत के निर्णय से अधिक प्रभावी रूप से आपसी संवाद में निहित होता है। नई भूमिका में वे सहयोग, विश्वास और सकारात्मक संवाद को बढ़ावा देने के लिए पूर्ण निष्ठा से कार्य करेंगे।

झारखंड के लिए गौरव का क्षण

विद्यालय के शिक्षकों और कर्मचारियों ने इसे राज्य के शिक्षा जगत के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। एक शिक्षाविद का न्यायिक मध्यस्थ के रूप में सशक्त भूमिका निभाना शिक्षा और न्याय के बीच एक नई सेतु निर्माण की दिशा में सार्थक कदम माना जा रहा है।

डॉ. गंगवार की यह उपलब्धि न केवल संस्थान की प्रतिष्ठा बढ़ाती है, बल्कि समाज में विवाद समाधान की संस्कृति को भी मजबूत करने का संदेश देती है।

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