- आचार्य संतोष
(वेदांत साधक एवं भारतीय संस्कृति के प्रचारक)
ज्योतिष विशारद एवं वास्तु आचार्य
संपर्क संख्या : +91 9934324365
वट सावित्री व्रत हिन्दू धर्म में एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्रत है, यह व्रत ज्येष्ठ अमावस्या को किया जाता है। विवाहित महिलाएँ अपने पति की दीर्घायु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य के लिए रखती हैं। यह व्रत सावित्री और सत्यवान की पौराणिक कथा से जुड़ा है, जो नारी शक्ति, समर्पण और धर्म की अद्भुत मिसाल है। इस व्रत की मुख्य कथा सावित्री और सत्यवान की है, जिसमें सावित्री ने अपने तप, बुद्धि और दृढ़ संकल्प से यमराज से अपने पति का प्राण वापस लिया।
वट (बरगद) वृक्ष को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक माना जाता है-
- जड़ = ब्रह्मा
- तना = विष्णु
- शाखाएँ = शिव
इसलिए वट वृक्ष की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।
वट वृक्ष महिमा
मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे।
अग्रतः शिवरूपाय वटवृक्षाय ते नमः॥
भावार्थ: वट वृक्ष की जड़ में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और अग्र भाग में शिव का निवास है।
सावित्री स्तुति (स्कंद पुराण संदर्भ)
सावित्री त्वं जगन्माता ब्रह्मपत्नी नमोऽस्तु ते।
पतिव्रता महाभागे नमस्ते लोकपूजिते॥
भावार्थ: हे सावित्री! आप जगत की माता, ब्रह्मा की पत्नी और महान पतिव्रता हैं-आपको प्रणाम।

🪔 पूजन विधि
1. सुबह स्नान कर संकल्प लें
- व्रत का संकल्प लें: “पति की आयु एवं सुख के लिए”
2. पूजन सामग्री तैयार करें
- रोली, अक्षत, फल, फूल
- कच्चा सूत (धागा)
- जल, दूध
- मिठाई, पूजन थाली
3. वट वृक्ष की पूजा करें
- जल, दूध अर्पित करें
- रोली-अक्षत चढ़ाएं
- सूत लपेटते हुए 7 या 11 बार परिक्रमा करें
4. कथा सुनें या पढ़ें
- सावित्री-सत्यवान की कथा का पाठ करें
5. आरती और प्रार्थना
- पति की दीर्घायु की कामना करें
🪔 पूजन मंत्र (मुख्य मंत्र)
1. वट वृक्ष पूजन मंत्र
मूलतो ब्रह्मरूपाय मध्यतो विष्णुरूपिणे।
अग्रतः शिवरूपाय वटवृक्षाय नमो नमः॥
👉 जप संख्या: 7, 11 या 21 बार
2. सावित्री प्रार्थना मंत्र
सावित्री त्वं जगन्माता ब्रह्मपत्नी नमोऽस्तु ते।
पतिव्रता महाभागे नमस्ते लोकपूजिते॥
3. यमराज स्मरण मंत्र
यमाय धर्मराजाय मृत्यवे चान्तकाय च।
वैवस्वताय कालाय सर्वभूतक्षयाय च॥
👉 यह मंत्र सत्यवान की रक्षा और आयु वृद्धि हेतु जपा जाता है।
4. परिक्रमा करते समय मंत्र
वट वृक्ष महाराज सर्वदेवस्वरूपक।
पति आयु प्रदं देहि नमस्ते वटवृक्ष॥

📖 वट सावित्री व्रत कथा
प्राचीन समय में अश्वपति नामक राजा की पुत्री सावित्री अत्यंत रूपवती और तेजस्विनी थी। विवाह योग्य होने पर उसने स्वयं सत्यवान को अपना पति चुना। ऋषियों ने बताया कि सत्यवान अल्पायु है और एक वर्ष के भीतर उसकी मृत्यु हो जाएगी, फिर भी सावित्री ने उसी से विवाह किया। विवाह के बाद सावित्री ने कठोर व्रत और तप करना शुरू किया। जिस दिन सत्यवान की मृत्यु का समय आया, वह अपने पति के साथ वन में गई। लकड़ी काटते समय सत्यवान अचानक अचेत होकर गिर पड़े और उनके प्राण निकल गए। तभी यमराज उनके प्राण हरने आए। सावित्री ने यमराज का पीछा किया और अपने ज्ञान, धर्म और तर्क से उन्हें प्रसन्न किया।
यमराज ने उसे कई वरदान दिए-
- ससुर का राज्य और नेत्र ज्योति
- पिता के लिए पुत्र प्राप्ति
अंत में सावित्री ने चतुराई से “संतान प्राप्ति” का वर माँगा, जिससे यमराज को सत्यवान का जीवन लौटाना पड़ा। इस प्रकार सावित्री ने अपने पतिव्रत धर्म से अपने पति को पुनः जीवित कर लिया।
⏰ शुभ मुहूर्त (16 मई 2026)
- ⏰ अमावस्या तिथि: 05:13 AM – 01:33 AM – 17 मई 2026
- 🟢 प्रातः शुभ मुहूर्त: 06:44 AM – 08:24 AM
- 🟡 अभिजीत मुहूर्त: 11:19 AM – 12:12 PM
👉 इन दोनों समय में पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाएगा।
✅ क्या करें
- व्रत श्रद्धा और नियम से रखें
- वट वृक्ष की विधिपूर्वक पूजा करें
- कथा अवश्य सुनें
- ब्राह्मण या जरूरतमंद को दान दें
- सुहाग सामग्री (चूड़ी, बिंदी आदि) का उपयोग करें
❌ क्या न करें
- व्रत के दिन क्रोध, झूठ और अपशब्द से बचें
- बिना स्नान के पूजा न करें
- वट वृक्ष को नुकसान न पहुँचाएं
- व्रत तोड़ने में लापरवाही न करें
- नकारात्मक विचार न रखें
अगर पास में वट वृक्ष न हो, तो घर में वट वृक्ष का चित्र या गमले में पौधा रखकर भी श्रद्धा से पूजा की जा सकती है।
