बाहुड़ा यात्रा में उमड़ा आस्था का सैलाब

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Santosh K Srivastav : Editor in Chief & Publisher

मौसीबाड़ी से लौटे भगवान जगन्नाथ, दो दिन तक मंदिर के बाहर रथ पर देंगे भक्तों को दर्शन

बोकारो, 24 जुलाई : बोकारो इस्पात नगर में भगवान जगन्नाथ की प्रसिद्ध बाहुड़ा यात्रा (वापसी रथयात्रा) शुक्रवार को श्रद्धा, भक्ति और उल्लास के वातावरण में संपन्न हुई। मौसीबाड़ी से भगवान जगन्नाथ, बहन सुभद्रा और भ्राता बलभद्र की वापसी यात्रा में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। पूरे शहर में “जय जगन्नाथ”, “हरे कृष्ण”, “हरि बोल” और शंखध्वनि से वातावरण भक्तिमय बना रहा।

वैदिक मंत्रोच्चार एवं विधिवत पूजा-अर्चना के बाद भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र की प्रतिमाओं को जगन्नाथ मंदिर प्रांगण से बाहर लाकर सुसज्जित रथ पर विराजमान कराया गया। यात्रा के शुभारंभ से पूर्व सनातन परंपरा के अनुसार बोकारो इस्पात संयंत्र के अधिशासी निदेशक (सामग्री प्रबंधन) ने ‘छेरा-पन्हारा’ की पवित्र रस्म निभाते हुए रथ की विधिवत सफाई की।

इस अलौकिक क्षण के साक्षी बनने के लिए बोकारो महिला समिति की सदस्याएं, वरिष्ठ अधिकारी, गणमान्य नागरिक तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। श्रद्धालुओं ने पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ भगवान के रथ की रस्सियां खींचकर पुण्य अर्जित किया।

बाहुड़ा यात्रा जनवृत्त-1 स्थित ऐतिहासिक राम मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर पत्थरकट्टा चौक, गांधी चौक (सिटी सेंटर) तथा बोकारो जनरल अस्पताल (बीजीएच) मार्ग से गुजरते हुए पुनः जगन्नाथ मंदिर परिसर पहुंची। यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि और कल्याण की कामना की।

दो दिन मंदिर के बाहर विराजेंगे भगवान

परंपरा के अनुसार रथ के मंदिर पहुंचने के बाद भगवान जगन्नाथ, सुभद्रा और बलभद्र दो दिनों तक रथ पर मंदिर के बाहर ही भक्तों को दर्शन देंगे। इसके बाद विधि-विधान के साथ उनका मंदिर में प्रवेश कराया जाएगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान जगन्नाथ बिना बताए मौसीबाड़ी चले गए थे, जिससे देवी लक्ष्मी नाराज हो गईं। लौटने पर उन्होंने दो दिनों तक मंदिर का द्वार नहीं खोला। इसी मान्यता के अनुसार भगवान दो दिन तक मंदिर के बाहर विराजमान रहते हैं।

वर्ष 2001 से निभाई जा रही परंपरा

बोकारो इस्पात संयंत्र द्वारा आयोजित यह धार्मिक महोत्सव वर्षों से शहर की सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। वर्ष 2001 से आयोजित की जा रही श्री जगन्नाथ रथयात्रा नगरवासियों के बीच सामाजिक समरसता, सांस्कृतिक एकता और सामुदायिक सहभागिता का प्रतीक बन चुकी है। इस वर्ष 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ रथयात्रा के माध्यम से मौसीबाड़ी गए थे और शुक्रवार को बाहुड़ा यात्रा के साथ पुनः अपने धाम लौटे।