डीपीएस बोकारो में सजा ज्ञान का महाकुंभ

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– Santosh Kr. Srivastav : Editor in Chief & Publisher

दो-दिवसीय पुस्तक मेले में करीब चार हजार किताबों का संग्रह, प्राचार्य ने विद्यार्थियों से किताबों को साथी बनाने का किया आह्वान

बोकारो, 07 अगस्त। डिजिटल स्क्रीन और सोशल मीडिया के बढ़ते प्रभाव के बीच विद्यार्थियों में पठन-पाठन की आदत विकसित करने और किताबों के प्रति रुचि बढ़ाने के उद्देश्य से दिल्ली पब्लिक स्कूल (डीपीएस), बोकारो में शुक्रवार को दो-दिवसीय पुस्तक मेले का शुभारंभ हुआ। प्रसिद्ध प्रकाशन संस्थान स्कॉलास्टिक के सहयोग से आयोजित यह पुस्तक मेला विद्यालय की सीनियर और प्राइमरी दोनों इकाइयों में एक साथ लगाया गया है।

विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने फीता काटकर पुस्तक मेले का औपचारिक उद्घाटन किया। उन्होंने विद्यार्थियों से किताबों के साथ नियमित रूप से जुड़ने और पढ़ने की आदत को जीवन का हिस्सा बनाने का आह्वान किया।

पुस्तक मेले में दोनों इकाइयों को मिलाकर लगभग चार हजार ज्ञानवर्धक, मनोरंजक और विचारोत्तेजक पुस्तकें प्रदर्शनी एवं बिक्री के लिए उपलब्ध कराई गई हैं। मेले में ज्ञान-विज्ञान, हॉबीज, नॉन-फिक्शन, कविता, कहानी, उपन्यास तथा बच्चों के लिए खेल-खेल में सीखने से संबंधित पुस्तकें आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।

इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रसिद्ध लेखकों और चिंतकों की रचनाओं के साथ अंग्रेजी व्याकरण, शब्दकोश, मुहावरे, सामान्य ज्ञान, पहेलियां, वैदिक गणित, क्विज, अंतरिक्ष विज्ञान और ग्राफिक नॉवेल्स जैसी पुस्तकें भी मेले में उपलब्ध हैं। मुंशी प्रेमचंद की कालजयी रचनाओं से लेकर महात्मा गांधी के नमक सत्याग्रह जैसे ऐतिहासिक आंदोलनों पर आधारित पुस्तकों को भी पाठकों की अच्छी प्रतिक्रिया मिल रही है।

मोबाइल की जगह किताबों से जोड़ें रिश्ता

प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने विद्यार्थियों को मोबाइल फोन और सोशल मीडिया के अत्यधिक इस्तेमाल से बचने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि मोबाइल स्क्रीन और सोशल मीडिया क्षणिक मनोरंजन प्रदान कर सकते हैं, लेकिन गहरी सोच, संवेदनशीलता और चरित्र निर्माण में किताबों की भूमिका महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि किताबें ज्ञान का ऐसा अथाह सागर हैं, जो कभी समाप्त नहीं होता। एक अच्छी किताब मनुष्य की सच्ची और निस्वार्थ मित्र होती है, जो कठिन परिस्थितियों में भी सही दिशा दिखाती है।

प्राचार्य ने कहा कि पुस्तकें केवल परीक्षा की तैयारी का माध्यम नहीं हैं, बल्कि जीवन को समझने, कल्पनाशीलता विकसित करने और विवेकशील व्यक्तित्व के निर्माण का प्रभावी साधन हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से प्रतिदिन कुछ समय डिजिटल दुनिया से दूर रहकर अच्छी किताब पढ़ने का संकल्प लेने की अपील की।

दो दिवसीय पुस्तक मेले में विद्यार्थियों के साथ शिक्षकों और अभिभावकों के लिए भी विभिन्न विषयों की पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं। आयोजन का उद्देश्य विद्यालय में अध्ययन एवं पठन संस्कृति को मजबूत करना तथा विद्यार्थियों को पुस्तकों के माध्यम से ज्ञान और विचारों की व्यापक दुनिया से जोड़ना है।