विपक्षी नेताओं को सरकारी तंत्र के माध्यम से प्रताड़ित किए जाने की शिकायत गंभीर : डॉ. राकेश दत्त मिश्र

Live ख़बर

– संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट

“सरकार की आलोचना करना लोकतांत्रिक अधिकार है, अपराध नहीं”

पटना, 03 सितंबर 2026। भारतीय जन क्रांति दल (डेमोक्रेटिक) के राष्ट्रीय महासचिव डॉ. राकेश दत्त मिश्र ने आरोप लगाया है कि वर्तमान राजनीतिक वातावरण में विपक्षी दलों के नेताओं एवं पदाधिकारियों की आवाज को दबाने के लिए सरकारी तंत्र के कथित दुरुपयोग की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार से सवाल पूछना, उसकी नीतियों की आलोचना करना और जनता की समस्याओं को उठाना विपक्ष का संवैधानिक एवं लोकतांत्रिक दायित्व है।

डॉ. मिश्र ने कहा कि यदि किसी विपक्षी नेता के विरुद्ध आयकर विभाग, पुलिस, प्रशासन अथवा अन्य सरकारी संस्थाओं की कार्रवाई कानून के बजाय राजनीतिक कारणों से प्रभावित होती है, तो यह लोकतंत्र और संवैधानिक संस्थाओं की निष्पक्षता के लिए गंभीर चिंता का विषय है।

PAN Jurisdiction में बदलाव ने खड़े किए गंभीर सवाल

डॉ. राकेश दत्त मिश्र ने अपने व्यक्तिगत अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने Income Tax e-Filing Portal पर अपने PAN की Jurisdiction Details देखी तो उसमें “CENT CIR 1(4), AHMEDABAD” प्रदर्शित हो रहा था।

उन्होंने कहा कि “मैं जन्म से पटना में रह रहा हूं और मेरा गुजरात से कोई संबंध नहीं रहा है। इसके बावजूद मेरे PAN की Jurisdiction Ahmedabad, Gujarat दिखाई देना स्वाभाविक रूप से मेरे लिए आश्चर्य और चिंता का विषय है।”

उन्होंने सवाल उठाया कि यदि संबंधित करदाता द्वारा Jurisdiction बदलने का कोई आवेदन नहीं दिया गया है, तो यह परिवर्तन कब, किस आधार पर और किस अधिकारी/प्रक्रिया के माध्यम से हुआ, इसकी जानकारी नागरिक को मिलनी चाहिए।

उन्होंने आयकर विभाग से मांग की कि इस मामले में स्पष्ट किया जाए-

  1. PAN Jurisdiction को पटना से Ahmedabad कब बदला गया?
  2. इसके पीछे प्रशासनिक अथवा तकनीकी कारण क्या था?
  3. क्या इसके लिए कोई आवेदन अथवा migration request प्राप्त हुई थी?
  4. संबंधित परिवर्तन किस अधिकारी के आदेश अथवा किस विभागीय प्रक्रिया के तहत किया गया?
  5. यदि यह तकनीकी त्रुटि है तो इसे तत्काल ठीक कर नागरिक को इसकी सूचना दी जाए।

“डिजिटल इंडिया में नागरिकों के डेटा की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए”

डॉ. मिश्र ने कहा कि आज नागरिकों की महत्वपूर्ण सूचनाएं डिजिटल सरकारी प्रणालियों में उपलब्ध हैं। ऐसे में किसी महत्वपूर्ण रिकॉर्ड में बिना स्पष्ट जानकारी के परिवर्तन होने की स्थिति में सरकार को पारदर्शिता के साथ जवाब देना चाहिए।

उन्होंने कहा कि “यह केवल मेरे PAN Jurisdiction का सवाल नहीं है। यह देश के प्रत्येक नागरिक के डिजिटल रिकॉर्ड की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और सुरक्षा का प्रश्न है।”

विपक्ष की आवाज दबाना लोकतंत्र के लिए खतरनाक

भारतीय जन क्रांति दल (डेमोक्रेटिक) के राष्ट्रीय महासचिव ने कहा कि सरकार की आलोचना करने वालों को सरकारी संस्थाओं का भय दिखाकर चुप कराने का कोई भी प्रयास लोकतंत्र के लिए उचित नहीं हो सकता।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून के तहत किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध कार्रवाई का विरोध नहीं है, लेकिन कार्रवाई में समानता, पारदर्शिता और निष्पक्षता आवश्यक है।

डॉ. मिश्र ने कहा-

“सरकार की आलोचना करना अपराध नहीं है। विपक्ष का काम ही है कि वह सरकार से सवाल पूछे और जनता की आवाज बने। यदि सवाल पूछने वालों को ही सरकारी तंत्र का भय दिखाया जाएगा, तो फिर लोकतंत्र में असहमति का स्थान कहां बचेगा?”

उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार से मांग की कि विपक्षी राजनीतिक पदाधिकारियों के विरुद्ध होने वाली शिकायतों एवं कार्रवाई की निष्पक्ष समीक्षा की जाए तथा सरकारी संस्थाओं की स्वायत्तता, निष्पक्षता और विश्वसनीयता सुनिश्चित की जाए।

“सरकारें बदलती हैं, संवैधानिक संस्थाएं स्थायी रहती हैं”

डॉ. मिश्र ने कहा कि राजनीतिक सत्ता स्थायी नहीं होती, लेकिन संवैधानिक एवं प्रशासनिक संस्थाओं की विश्वसनीयता देश की स्थायी पूंजी है। इसलिए किसी भी सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकारी संस्थाओं की निष्पक्षता पर राजनीतिक पक्षपात का प्रश्न न उठे।

उन्होंने कहा कि वे कानून के शासन और वैधानिक कार्रवाई के पूर्ण समर्थक हैं, लेकिन किसी भी नागरिक या राजनीतिक कार्यकर्ता को बिना उचित कारण सरकारी तंत्र के माध्यम से परेशान किए जाने की शिकायत को गंभीरता से लिया जाना चाहिए।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *