– Santosh K Srivastav : Editor in Chief & Publisher
सीसीएल के बचरा स्थित अत्याधुनिक जल शोधन संयंत्र का केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री ने किया वर्चुअल लोकार्पण, महिला स्वयं सहायता समूह संभालेंगे संचालन
रांची, 22 जुलाई। सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) के पिपरवार क्षेत्र स्थित बचरा में स्थापित अत्याधुनिक ‘कोल नीर’ प्लांट का बुधवार को केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी ने नई दिल्ली से वर्चुअल माध्यम से उद्घाटन किया। इस अवसर पर केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह, कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे, कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त तथा अपर सचिव रूपिंदर बरार सहित मंत्रालय एवं कोल इंडिया लिमिटेड के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
नई दिल्ली में आयोजित समारोह में कोल इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन बी. साई राम, सीसीएल के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक निलेंदु कुमार सिंह तथा कोल इंडिया की विभिन्न अनुषंगी कंपनियों के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लिया। वहीं पिपरवार क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में सीसीएल के निदेशक (वित्त) पवन कुमार मिश्रा, निदेशक (मानव संसाधन) हर्ष नाथ मिश्र, निदेशक (तकनीकी/संचालन) चंद्र शेखर तिवारी, निदेशक (योजना एवं परियोजना) अनूप हंजूरा, महाप्रबंधक सुजीत कुमार, विभिन्न क्षेत्रों के महाप्रबंधक, अधिकारी, कर्मचारी, श्रमिक संगठनों के प्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने कहा कि ‘कोल नीर’ परियोजना नवाचार, ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा तथा प्रधानमंत्री के ‘हर घर जल’ संकल्प का सशक्त उदाहरण है। उन्होंने कहा कि खदानों से निकलने वाले जल का वैज्ञानिक उपयोग कर उसे जनकल्याण, विकास और आजीविका का माध्यम बनाया जा रहा है। उन्होंने माइन क्लोजर गतिविधियों को पर्यावरण संरक्षण एवं स्थानीय समुदाय की भागीदारी से जोड़ते हुए कहा कि पुनर्वासित खनन क्षेत्रों का उपयोग इको पार्क एवं अन्य सामुदायिक परियोजनाओं के विकास में किया जा रहा है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे बढ़ने के लिए नवाचार के साथ प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण भी आवश्यक है। उन्होंने सतत विकास के लिए उपलब्ध संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर बल दिया।
कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा कि ‘कोल नीर’ पहल के माध्यम से आम लोगों तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य साकार हो रहा है। उन्होंने कहा कि यह पहल केवल सरकारी योजना नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव और आत्मनिर्भरता का माध्यम भी है।
कोयला मंत्रालय के सचिव विक्रम देव दत्त ने कहा कि यह परियोजना माइन वॉटर के सतत उपयोग को बढ़ावा देने के साथ जल संरक्षण, पर्यावरणीय संतुलन और स्थानीय समुदायों के दीर्घकालिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने ‘आरोह (AAROH – The Rising)’ माइन क्लोजर पर आधारित वार्षिक रिपोर्ट का लोकार्पण किया तथा सीसीएल द्वारा तैयार माइन क्लोजर मॉडल का भी उद्घाटन किया।
सीसीएल के अनुसार बचरा स्थित ‘कोल नीर’ प्लांट की जल शोधन क्षमता 25 किलोलीटर प्रतिदिन है। आधुनिक तकनीक से सुसज्जित यह संयंत्र 500 मिलीलीटर एवं 1 लीटर की 40 बोतल प्रति मिनट भरने में सक्षम है। इसके अलावा 20 लीटर के जार भरने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है।
इस परियोजना की विशेषता यह है कि इसका संचालन पूरी तरह महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा किया जाएगा। इसके लिए सीसीएल ने महिला सदस्यों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया है। कंपनी का मानना है कि यह पहल स्थानीय महिलाओं को रोजगार एवं आत्मनिर्भरता प्रदान करने के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों में शुद्ध पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

