भागवत श्रवण से जीवन होता है सार्थक : गोविंदजी शास्त्री

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Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher

बोकारो | 26 फरवरी 2026

नगर के सेक्टर-2 स्थित श्यामा माई मंदिर में आयोजित होली महोत्सव सह श्रीमद्भागवत कथा वृष्टि रस कार्यक्रम के तीसरे दिन भक्तिमय वातावरण चरम पर रहा। मैथिली कला मंच काली पूजा ट्रस्ट के तत्वावधान में आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में कथावाचक गोविंदजी शास्त्री ने राजा परीक्षित और शुकदेव संवाद का विस्तार से वर्णन करते हुए श्रीमद्भागवत की महिमा पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण ऐसा दिव्य साधन है, जो निरर्थक प्रतीत होने वाले जीवन को भी सार्थक बना देता है।

शुकदेव–परीक्षित संवाद का मार्मिक प्रसंग

कथा के दौरान गोविंदजी शास्त्री ने बताया कि एक बार राजा परीक्षित वन भ्रमण के दौरान प्यास से व्याकुल होकर समीक ऋषि के आश्रम पहुंचे। ऋषि समाधि में लीन थे और कोई उत्तर नहीं मिला। इसे अपमान समझकर परीक्षित ने क्रोधवश मृत सर्प को ऋषि के गले में डाल दिया।

यह घटना जब ऋषि के पुत्र को ज्ञात हुई तो उन्होंने शाप दिया कि सातवें दिन तक्षक नामक सर्प परीक्षित को दंश देकर भस्म कर देगा। बाद में समीक ऋषि ने दिव्य दृष्टि से स्थिति को समझा और स्वयं राजा को इसकी सूचना दी।

त्याग, तप और भागवत का अमृत

शास्त्रीजी ने बताया कि मृत्यु का श्राप सुनकर भी परीक्षित विचलित नहीं हुए। उन्होंने राज्य अपने पुत्र जन्मेजय को सौंप दिया और गंगा तट पर जाकर साधु-संतों के मध्य आत्मकल्याण का मार्ग खोजा। वहीं व्यास नंदन शुकदेव प्रकट हुए और श्रीमद्भागवत का दिव्य ज्ञान प्रदान किया।

उन्होंने कहा:

  • भागवत ज्ञान जीवन के अंतिम क्षणों में भी मोक्ष का मार्ग प्रशस्त करता है
  • सांसारिक मोह से ऊपर उठकर आत्मबोध ही सच्चा सार्थक जीवन है
  • क्षणिक आकर्षणों से दूर रहकर दिव्य रस की प्राप्ति ही मानव जीवन का उद्देश्य है

शुकदेव के जन्म और उनके वैराग्य का उल्लेख करते हुए शास्त्रीजी ने बताया कि वे संसार में भागवत ज्ञान देने के लिए ही अवतरित हुए थे।

भक्तिमय माहौल, उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

मंदिर परिसर स्थित अमरेंद्र मिश्र सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कथा के साथ झांकी, भजन-कीर्तन और धार्मिक प्रसंगों ने वातावरण को पूरी तरह भक्तिरस में सराबोर कर दिया।

कार्यक्रम में ट्रस्ट के अध्यक्ष कृष्ण चन्द्र झा, महामंत्री सुनील मोहन ठाकुर, यज्ञाचार्य पं. राहुल शर्मा और अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

होली महोत्सव में आध्यात्मिक रंग

होली महोत्सव के अवसर पर आयोजित इस भागवत कथा ने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया। कथा का सार यही रहा कि श्रीमद्भागवत केवल ग्रंथ नहीं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाला अमृत स्रोत है, जो व्यक्ति को मोह-माया से मुक्त कर सच्चे अर्थों में सार्थकता की ओर ले जाता है।