– एस०एन०चतुर्वेदी की रिपोर्ट
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में ग्रंथों का लोकार्पण, शोध पत्रिका का विमोचन और लघु फिल्म ‘अष्टनायिका’ का हुआ प्रदर्शन
नई दिल्ली, 31 जुलाई। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के कलाकोश संविभाग ने गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर प्रतिष्ठा दिवस समारोह-2026 गरिमामय वातावरण में आयोजित किया। समारोह में गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय ज्ञान-विज्ञान और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया गया।
समारोह की अध्यक्षता इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र न्यास के अध्यक्ष राम बहादुर राय ने की। केंद्र के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी की प्रेरणादायी उपस्थिति ने आयोजन को विशेष गरिमा प्रदान की। कार्यक्रम में भारती महाविद्यालय (दिल्ली विश्वविद्यालय) की डॉ. सरिता पाठक ‘यजुर्वेदी’ मुख्य अतिथि तथा दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. ओमनाथ बिमली सारस्वत विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के दौरान कलाकोश संविभाग के विभागाध्यक्ष एवं केंद्र के संकायाध्यक्ष प्रो. सुधीर लाल ने वार्षिक प्रतिवेदन प्रस्तुत करते हुए वर्षभर की शैक्षणिक, शोध एवं प्रकाशन गतिविधियों का विस्तृत विवरण साझा किया।
Follow this link to JOIN our WhatsApp Community
इस अवसर पर भारतीय परंपरा, वैदिक साहित्य और सांस्कृतिक अध्ययन से जुड़े कई महत्वपूर्ण ग्रंथों का लोकार्पण किया गया। इनमें “शुक्लयजुर्वेदमाध्यन्दिन – मालापाठः” (दो भाग), “वेदोद्धारक स्वामी दयानन्द” तथा “Religio-Cultural Survey of Fifty-one Shaktipithas” (दो भाग) प्रमुख हैं। इन प्रकाशनों को भारतीय ज्ञान परंपरा के अध्ययन एवं शोध की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि माना गया।
समारोह में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की शोध पत्रिका “कलाकल्प (Kalākalpa)” के गुरु पूर्णिमा विशेषांक का भी लोकार्पण किया गया। इसके साथ ही भारतीय नाट्यशास्त्र एवं काव्यशास्त्र पर आधारित लघु फिल्म “अष्टनायिका” का प्रदर्शन किया गया, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा।
फिल्म के निर्देशक एवं पटकथा लेखक संस्कार सुधीर देसाई भी समारोह में उपस्थित रहे। उन्होंने फिल्म की अवधारणा और भारतीय नाट्य परंपरा से उसके संबंध पर प्रकाश डाला। उपस्थित विद्वानों, शोधार्थियों और कला प्रेमियों ने उनके रचनात्मक प्रयासों की प्रशंसा करते हुए भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में ऐसे प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।
समारोह में कला, साहित्य, शिक्षा और शोध जगत से जुड़े अनेक विद्वानों एवं गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति रही। आयोजन भारतीय संस्कृति, गुरु-शिष्य परंपरा और ज्ञान परंपरा के संरक्षण के प्रति इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र की सतत प्रतिबद्धता का सशक्त उदाहरण बनकर उभरा।

