अहिंसक रेशम उत्पादन में ऐतिहासिक सफलता: कोल इंडिया के CSR सहयोग से ‘जीवोदया’ परियोजना ने रचा नया मानक

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Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher

मुंबई, 01 फ़रवरी 2026

कोल इंडिया के कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) सहयोग से संचालित आईआईटी बॉम्बे की पायलट परियोजना ‘जीवोदया’ ने रेशम उत्पादन के क्षेत्र में एक क्रांतिकारी उपलब्धि हासिल की है। तीन वर्षों के सतत अनुसंधान एवं विकास के बाद यह परियोजना अहिंसक, नैतिक और पर्यावरण-संवेदनशील रेशम निर्माण तकनीक विकसित करने में सफल रही है।

यह परियोजना आईआईटी बॉम्बे के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रौद्योगिकी विकल्प केंद्र (C-TARA) द्वारा संचालित की गई, जिसका उद्देश्य विज्ञान को मानवीय मूल्यों और ग्रामीण आजीविका से जोड़ना है।

जहां रेशम बने, वहां जीवन भी बचे

परंपरागत रेशम उत्पादन में कोकून उबालने की प्रक्रिया के कारण लाखों रेशम कीड़ों की मृत्यु होती है। ‘जीवोदया’ परियोजना ने इस सदियों पुरानी पद्धति को चुनौती देते हुए ऐसी तकनीक विकसित की है, जिसमें रेशम के कीड़ों की हत्या किए बिना रेशम प्राप्त किया जा सकता है

इस अभिनव तकनीक में:

  • रेशम के कीड़ों को कोकून बनाने के बजाय
  • समतल सतह पर रेशमी धागा बुनने के लिए प्रशिक्षित किया गया
  • धागा निर्माण के बाद कीड़े प्राकृतिक रूप से पतंगे में परिवर्तित होकर
  • अपना जीवन चक्र पूर्ण कर पाते हैं

इसी मानवीय और करुणा आधारित दृष्टिकोण के कारण इस रेशम को ‘जीवोदया सिल्क’ नाम दिया गया है।

भारतीय दर्शन और आधुनिक विज्ञान का संगम

यह उपलब्धि केवल वैज्ञानिक नवाचार नहीं, बल्कि भारतीय सांस्कृतिक दर्शन की जीवंत अभिव्यक्ति भी है —

“मा कश्चिद् दुःखभाग् भवेत्”
अर्थात कोई भी प्राणी दुःखी न हो।

‘जीवोदया’ परियोजना विज्ञान, नैतिकता और करुणा को एक सूत्र में पिरोते हुए सतत विकास की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण प्रस्तुत करती है।

ग्रामीण आजीविका को मिलेगा नया आधार

इस तकनीक का प्रभाव केवल पर्यावरण या नैतिकता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह:

  • रेशम उत्पादन से जुड़े किसानों के लिए
  • आय के नए और स्थायी स्रोत
  • ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार सृजन
  • और सतत आजीविका के अवसर

भी प्रदान करेगी।

CSR के माध्यम से कोल इंडिया की निर्णायक भूमिका

कोल इंडिया ने इस परियोजना को अवधारणा से लेकर सफलता तक पहुँचाने में निरंतर CSR सहयोग प्रदान किया। यह पहल दर्शाती है कि सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियाँ सामाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए नवाचार और मानवता को साथ लेकर चल सकती हैं

भविष्य के लिए नई राह

‘जीवोदया’ पायलट परियोजना की सफलता के साथ यह तकनीक:

  • राष्ट्रीय स्तर पर विस्तार
  • नैतिक फैशन उद्योग में उपयोग
  • और वैश्विक स्तर पर अहिंसक रेशम के विकल्प

के रूप में उभरने की पूरी क्षमता रखती है।

यह पहल न केवल रेशम उद्योग की दिशा बदलने वाली है, बल्कि यह संदेश भी देती है कि विकास तभी सार्थक है, जब वह जीवन और करुणा के साथ आगे बढ़े

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