– Santosh Kr. Srivastav : Editor in Chief & Publisher
परीक्षा रद्द करने के सरकारी फैसले के बाद नियुक्त अभ्यर्थी आंदोलन और न्यायालय की तैयारी में; नियुक्तियों की वैधानिक स्थिति पर सरकार के सामने बड़ी चुनौती
रांची, 18 अगस्त। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा (JSSC-CGL) का विवाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन द्वारा परीक्षा रद्द करने की घोषणा के बाद भी थमता नजर नहीं आ रहा है। करीब नौ वर्षों से विवादों में रही इस परीक्षा को लेकर अब एक नया मोर्चा खुलने की संभावना है। परीक्षा के आधार पर विभिन्न पदों पर नियुक्त हो चुके 1,932 अभ्यर्थी सरकार के फैसले के खिलाफ आंदोलन की तैयारी में हैं। जरूरत पड़ने पर वे न्यायालय का दरवाजा भी खटखटा सकते हैं।
सरकार के सामने चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि मामला केवल परीक्षा रद्द करने तक सीमित नहीं है। परीक्षा के परिणाम और चयन के आधार पर नियुक्तियां हो चुकी हैं तथा चयनित अभ्यर्थी विभिन्न विभागों और जिलों में कार्यरत हैं। ऐसे में परीक्षा रद्द करने के बाद सरकार को इन नियुक्तियों की वैधानिक स्थिति पर भी स्पष्ट निर्णय लेना होगा।
नियुक्त अभ्यर्थी आसानी से नहीं छोड़ेंगे नौकरी
सरकार के फैसले से प्रभावित होने वाले नियुक्त अभ्यर्थी अपनी नौकरी बचाने के लिए आंदोलन का रास्ता अपना सकते हैं। छात्र आंदोलन की तरह ही धरना, प्रदर्शन और अनशन से लेकर अन्य लोकतांत्रिक माध्यमों का सहारा लिए जाने की संभावना है।
इसके साथ ही नियुक्त अभ्यर्थियों की ओर से न्यायालय जाने की तैयारी भी की जा रही है। फिलहाल वे सरकार के औपचारिक आदेश का इंतजार कर रहे हैं। आदेश जारी होने के बाद ही उनके आंदोलन और कानूनी रणनीति की तस्वीर और स्पष्ट होगी।
सरकार भी किसी जल्दबाजी में कदम उठाने के बजाय इस मामले में विधिक राय लेने की प्रक्रिया अपना सकती है, ताकि नियुक्तियों पर लिया गया फैसला बाद में कानूनी चुनौती के सामने टिक सके।
कोर्ट और CID जांच के परिणाम की होगी अहम भूमिका
यदि नियुक्त अभ्यर्थी JSSC-CGL को रद्द करने के फैसले के खिलाफ न्यायालय जाते हैं तो पूरे मामले में अदालत की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यह मामला पहले भी उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंच चुका है। इसलिए सुनवाई के दौरान पूर्व में राज्य सरकार और JSSC की ओर से अदालत के समक्ष रखे गए तथ्यों और दलीलों को भी देखा जा सकता है।
इसके अलावा CGL से जुड़ी कथित अनियमितताओं को लेकर चल रही CID जांच के निष्कर्ष भी महत्वपूर्ण होंगे। जांच में सामने आने वाले तथ्य सरकार के फैसले और नियुक्त अभ्यर्थियों की कानूनी दलीलों-दोनों को प्रभावित कर सकते हैं।
छात्रों के दबाव और जांच के बीच बदला सरकार का रुख
JSSC-CGL को रद्द करने का सरकार का रुख शुरू से स्पष्ट नहीं रहा है। प्रारंभिक चरण में मंत्रियों की समिति की ओर से यह तर्क सामने आया था कि परीक्षा के आधार पर हुई नियुक्तियों को उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। ऐसे में सरकार के लिए सीधे परीक्षा रद्द करना आसान नहीं माना जा रहा था।
इसके बाद आंदोलनरत छात्रों का दबाव बढ़ता गया। सरकार की ओर से मामले की जांच के लिए न्यायिक आयोग की संभावना पर भी चर्चा हुई।
इसी बीच CID की जांच में JSSC-CGL से जुड़ी कथित गड़बड़ियों की जांच आगे बढ़ी और नए तथ्य सामने आने लगे। इसके बाद सरकार ने परीक्षा को रद्द करने का फैसला घोषित किया।
अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि परीक्षा को रद्द करने के बाद उससे जुड़ी नियुक्तियों के संबंध में ऐसा फैसला कैसे लिया जाए, जो छात्रों की मांग, नियुक्त अभ्यर्थियों के हित और कानूनी प्रक्रिया-तीनों के बीच संतुलन बना सके।
नौ वर्षों में दो बार रद्द हो चुकी है परीक्षा
JSSC-CGL का विवाद नया नहीं है। करीब नौ वर्षों के दौरान परीक्षा कई बार विवादों में रही और अलग-अलग परिस्थितियों में इसे दो बार रद्द किया जा चुका है।
कब क्या हुआ?
2017 : पहली बार परीक्षा और रद्दीकरण
करीब दो हजार पदों के लिए JSSC-CGL परीक्षा पहली बार वर्ष 2017 में आयोजित हुई थी। पेपर लीक के आरोपों के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई।
6 जून 2023 : दोबारा विज्ञापन
लंबे अंतराल के बाद 6 जून 2023 को संयुक्त स्नातक स्तरीय परीक्षा के लिए दोबारा विज्ञापन जारी किया गया।
28 जनवरी 2024 : फिर विवाद
28 जनवरी 2024 को परीक्षा आयोजित हुई। इस बार भी पेपर लीक की शिकायतों और अनियमितताओं के आरोप सामने आए, जिसके बाद परीक्षा रद्द कर दी गई। चार फरवरी 2024 को होने वाली परीक्षा भी स्थगित कर दी गई।
21-22 सितंबर 2024 : दोबारा परीक्षा
इसके बाद 21 और 22 सितंबर 2024 को परीक्षा फिर आयोजित की गई। पेपर लीक की आशंका को देखते हुए परीक्षा के दौरान राज्य के विभिन्न हिस्सों में इंटरनेट सेवा बंद की गई थी। इसके बावजूद परीक्षा की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठे और मामला अदालत तक पहुंचा।
8 दिसंबर 2025 : परिणाम जारी
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद आयोग ने 8 दिसंबर 2025 को परीक्षा का परिणाम जारी किया।
10 दिसंबर 2025 : नियुक्ति पत्र
परिणाम जारी होने के दो दिन बाद 10 दिसंबर 2025 को सफल 1,932 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र दिए गए।
अब 17 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री की ओर से परीक्षा, परिणाम और चयन प्रक्रिया को रद्द करने की घोषणा के बाद विवाद एक बार फिर नए चरण में पहुंच गया है।
परीक्षा रद्द होने के बाद अब असली सवाल नियुक्तियों का
JSSC-CGL विवाद में अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि परीक्षा रद्द होगी या नहीं। सरकार ने रद्द करने की घोषणा कर दी है। असली प्रश्न यह है कि परीक्षा के आधार पर नियुक्त हो चुके 1,932 कर्मचारियों का क्या होगा?
यदि नियुक्तियां समाप्त की जाती हैं तो सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि प्रक्रिया कानूनी रूप से मजबूत हो। दूसरी ओर, यदि नियुक्तियां बरकरार रहती हैं तो छात्रों की ओर से यह सवाल उठ सकता है कि जब परीक्षा, परिणाम और चयन प्रक्रिया ही रद्द कर दी गई तो उसी चयन के आधार पर हुई नियुक्तियों को वैध कैसे माना गया।
यही विरोधाभास आने वाले दिनों में विवाद का नया केंद्र बन सकता है।
आंदोलन बनाम नियुक्ति-अब आमने-सामने होंगे दो पक्ष
एक तरफ वे अभ्यर्थी हैं जो परीक्षा प्रक्रिया को रद्द कर नए सिरे से निष्पक्ष परीक्षा की मांग कर रहे हैं। दूसरी तरफ वे 1,932 चयनित अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने इसी परीक्षा के परिणाम के आधार पर नियुक्ति पाई है और अब उनकी नौकरी पर संकट खड़ा हो गया है।
इसलिए आने वाले दिनों में आंदोलन की तस्वीर दो दिशाओं में दिखाई दे सकती है-एक ओर परीक्षा दोबारा कराने की मांग करने वाले अभ्यर्थी और दूसरी ओर नियुक्ति बचाने के लिए संघर्ष करने वाले कर्मचारी।
सरकार के लिए चुनौती यही है कि दोनों पक्षों के हितों के बीच कानूनी और प्रशासनिक संतुलन कैसे स्थापित किया जाए।
सरकार के सामने आसान रास्ता नहीं
JSSC-CGL की पूरी समयरेखा बताती है कि यह केवल एक परीक्षा का विवाद नहीं रह गया है। यह झारखंड की प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था, आयोग की कार्यप्रणाली, परीक्षा संचालन, निगरानी तंत्र और सरकारी भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है।
सरकार ने परीक्षा रद्द करने का फैसला जरूर लिया है, लेकिन अब उसे यह भी स्पष्ट करना होगा कि-
- 1,932 नियुक्त अभ्यर्थियों की सेवा स्थिति क्या होगी?
- नियुक्तियों की समीक्षा कब और कैसे होगी?
- क्या नई परीक्षा कराई जाएगी?
- पुराने अभ्यर्थियों को आयु सीमा में राहत मिलेगी?
- क्या आवेदन शुल्क दोबारा नहीं लिया जाएगा?
- नई परीक्षा की जिम्मेदारी किस व्यवस्था को दी जाएगी?
- और पूरी प्रक्रिया कब तक पूरी होगी?
जब तक इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं मिलता, JSSC-CGL का विवाद थमने के बजाय और लंबा खिंच सकता है।

