– संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट
व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा, व्यापारियों से लिए जाने वाले शुल्क की व्यवस्था में बदलाव; छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों को शून्य MDR का लाभ
नई दिल्ली, 15 सितंबर 2026। यूपीआई भुगतान व्यवस्था को लेकर सरकार ने डिजिटल लेनदेन पर शुल्क से संबंधित नए प्रावधान की घोषणा की है। नए प्रावधान के अनुसार व्यक्ति से व्यक्ति (P2P) होने वाले यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। वहीं, व्यक्ति से कारोबारी (P2M) भुगतान में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर कारोबारी से 0.4 प्रतिशत की दर से मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लिया जाएगा। यह शुल्क ग्राहक से सीधे नहीं वसूला जाएगा।
सरकार की ओर से मंगलवार को जारी जानकारी के बाद भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने भी यूपीआई संचालन से जुड़े विस्तृत प्रावधान साझा किए हैं।
₹2,000 तक के भुगतान पर शुल्क नहीं
नई व्यवस्था के अनुसार ₹2,000 तक के यूपीआई भुगतान करने वाले छोटे कारोबारियों को शून्य MDR व्यवस्था का लाभ मिलता रहेगा। इसका उद्देश्य छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और असंगठित क्षेत्र के कारोबारियों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़े रखना है।
सरकार के अनुसार करीब 96 प्रतिशत कारोबारी लेनदेन ₹2,000 से कम के होते हैं या ऐसे छोटे कारोबारी लेनदेन हैं, जो शून्य MDR व्यवस्था के दायरे में आते हैं।
₹2,000 से अधिक के कारोबारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR
अब ₹2,000 से अधिक के व्यक्ति से कारोबारी भुगतान पर 0.4 प्रतिशत की दर से शुल्क लागू होगा। यह शुल्क भुगतान व्यवस्था से जुड़े विभिन्न भागीदारों के बीच बांटा जाएगा, जिसमें बैंक और यूपीआई ऐप उपलब्ध कराने वाले संस्थान शामिल हैं।
उदाहरण के तौर पर ₹3,000 के लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत की दर से ₹12 तथा ₹50,000 के लेनदेन पर ₹200 शुल्क निर्धारित है। ₹7.50 लाख और उससे अधिक के लेनदेन पर अधिकतम ₹300 शुल्क का प्रावधान बताया गया है।
| लेनदेन राशि | दर | शुल्क |
|---|---|---|
| ₹2,000 | 0% | ₹0 |
| ₹3,000 | 0.40% | ₹12 |
| ₹50,000 | 0.40% | ₹200 |
| ₹7,50,000 और अधिक | — | ₹300 तक |
व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान पर कोई शुल्क नहीं
व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P यूपीआई भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा। इस तरह किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति को यूपीआई के माध्यम से पैसा भेजने पर इस प्रावधान के तहत कोई शुल्क नहीं देना होगा।
वर्तमान में व्यक्ति से व्यक्ति भुगतान यूपीआई के कुल लेनदेन का करीब 70 प्रतिशत बताया गया है। नई व्यवस्था मुख्य रूप से व्यक्ति से कारोबारी भुगतान से संबंधित है।
मासिक सीमा नहीं होगी
व्यक्तिगत यूपीआई उपयोगकर्ताओं के लिए भुगतान की संख्या, राशि या उपयोग के आधार पर कोई मासिक सीमा नहीं होगी। हालांकि, बैंकों की ओर से निर्धारित दैनिक भुगतान सीमा सुरक्षा संबंधी कारणों से लागू रहेगी। बैंकों द्वारा सामान्य रूप से ₹1 लाख से ₹5 लाख तक की दैनिक भुगतान सीमा निर्धारित की जाती है।
कुछ क्षेत्रों में प्रति लेनदेन अधिकतम ₹5 शुल्क
रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के लेनदेन पर प्रति लेनदेन अधिकतम ₹5 शुल्क लगेगा।
शेयर और म्यूचुअल फंड से जुड़े लेनदेन पर 0.02 प्रतिशत शुल्क का प्रावधान किया गया है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन होगी।
यूपीआई ऐप कंपनियां अन्य शुल्क नहीं वसूल सकेंगी
प्रावधान के अनुसार यूपीआई ऐप उपलब्ध कराने वाली कंपनियां प्लेटफॉर्म या अन्य मदों में ग्राहकों से अलग से शुल्क नहीं वसूल सकेंगी। वहीं, बैंक कारोबारियों पर लगने वाले MDR का भार ग्राहकों से नहीं वसूलेंगे।
छोटे दुकानदारों को जोड़ने पर जोर
नई व्यवस्था का एक प्रमुख उद्देश्य छोटे दुकानदारों, रेहड़ी-पटरी वालों और असंगठित क्षेत्र के कारोबारियों को डिजिटल भुगतान व्यवस्था से जोड़ना बताया गया है। ₹2,000 तक के भुगतान पर शून्य MDR का लाभ जारी रहने से ऐसे कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान स्वीकार करना शुल्क-मुक्त व्यवस्था के दायरे में बना रहेगा।
