– एस०एन० चतुर्वेदी की रिपोर्ट
स्वतंत्रता आंदोलन और श्रमिक अधिकारों के लिए उनके योगदान को किया गया याद
बाढ़, 11 अगस्त : पटना जिला के बाढ़ अनुमंडल में गंगा नदी के तट पर स्थित प्रसिद्ध उमानाथ मंदिर परिसर में मंगलवार को भारत के चौथे राष्ट्रपति एवं स्वतंत्रता सेनानी वराहगिरि वेंकट गिरि (वी. वी. गिरि) की जयंती श्रद्धापूर्वक मनाई गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने उनके तैलचित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी और उनके व्यक्तित्व एवं कृतित्व को याद किया।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने कहा कि वी. वी. गिरि ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ श्रमिकों के अधिकारों और सम्मान के लिए भी उल्लेखनीय कार्य किया। विभिन्न संवैधानिक पदों पर रहते हुए उन्होंने देश की सेवा की। वे वर्ष 1969 से 1974 तक भारत के राष्ट्रपति रहे। वर्ष 1975 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
वक्ताओं ने कहा कि वी. वी. गिरि का सार्वजनिक जीवन श्रमिक हितों, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पण का उदाहरण है। उनके विचार और कार्य आज भी समाज के लिए प्रेरणादायी हैं।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने वी. वी. गिरि के आदर्शों से प्रेरणा लेते हुए राष्ट्रहित और समाजसेवा के लिए निरंतर कार्य करने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता उमानाथ मंदिर के महंत उपेंद्रगिरि उर्फ कारू बाबा ने की, जबकि संयोजन युवा समाजसेवी एवं भाजपा नेता संजय गिरि ने किया। कार्यक्रम के आयोजक उमेश गिरि ने आगंतुक अतिथियों का स्वागत किया।
जयंती समारोह के दौरान उमानाथ मंदिर के महंत विश्वनाथ भारती, दीपक गिरि, सेवानिवृत्त बैंक अधिकारी सुरेश चौधरी, अरुण कुमार गुप्ता, मुकेश यादव, अरुण महतो, रवि कुमार, अजीत कुमार, राजू कुमार, दीवाली महतो सहित अनेक लोगों एवं समाजसेवी महिलाओं ने वी. वी. गिरि के तैलचित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें नमन किया।
समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उपस्थित रहे और सभी ने देश के पूर्व राष्ट्रपति के योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी।

