बोकारो में जोहार दर्पण का द्वितीय वार्षिकोत्सव: ‘कथा सरोवर’ का विमोचन, शांति भारत को मातृभाषा गौरव सम्मान

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–संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट

डीएवी सेक्टर-6 में भव्य कवि सम्मेलन का आयोजन, प्रेम, संवेदना और सामाजिक सरोकारों से सजी सुरमयी साहित्यिक शाम

बोकारो, 27 सितम्बर 2026 : जोहार दर्पण साहित्यिक मंच, बोकारो इस्पात नगर का द्वितीय वार्षिकोत्सव सह भव्य कवि सम्मेलन रविवार को डीएवी पब्लिक स्कूल, सेक्टर-6 के सभागार में साहित्यिक गरिमा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। इस गरिमामयी समारोह में बीएसएल अधिकारी दीप कुमार सक्सेना बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ मुख्य अतिथि डी के सक्सेना, विशिष्ट अतिथि नीलिमा मिश्रा, विद्यालय प्रभारी बी के झा, साहित्यकार महेंद्र नाथ गोस्वामी ‘सुधाकर’, असित कुंडु, डॉ. राशि सिन्हा, योगेश, डॉ. ममता बनर्जी, प्रमिला गुप्ता, मनोज बर्नवाल, सविता धर और अन्य रचनाकारों द्वारा मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पार्चन व दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। मंच के संस्थापक पंकज कुमार दास ने अतिथियों और आगंतुकों का स्वागत किया। विद्यालय की छात्रा तृषा व जया ने सरस्वती वंदना तथा आश्वी, सताक्षी व सक्षम ने सस्वर गीता पाठ प्रस्तुत किया।

समारोह का मुख्य आकर्षण वरिष्ठ साहित्यकार महेंद्र नाथ गोस्वामी ‘सुधाकर’ की सद्यःप्रकाशित पुस्तक ‘कथा सरोवर’ का लोकार्पण रहा। मंच पर उपस्थित विद्वानों ने पुस्तक की साहित्यिक उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए लेखक को बधाई दी। इसके साथ ही क्षेत्रीय भाषा और साहित्य में अप्रतिम योगदान के लिए झारखंड के विख्यात साहित्यकार शांति भारत की कृति ‘नीनछीछकी’ को प्रतिष्ठित ‘जोहार दर्पण मातृभाषा गौरव सम्मान’ से अलंकृत किया गया। सम्मान ग्रहण करते हुए शांति भारत ने मातृभाषा के संवर्धन के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए मंच के प्रति आभार जताया।

समारोह के दूसरे सत्र में आयोजित कवि सम्मेलन की अध्यक्षता असित कुंडु ने की, जबकि मंच संचालन चतरा से पधारीं डॉ. संध्या रानी एवं जैनामोड़ के श्रवण दत्ता ने संयुक्त रूप से किया। इस साहित्यिक गोष्ठी में झारखंड एवं पश्चिम बंगाल से आए कवियों ने प्रेम, प्रकृति, मानवीय संवेदना, मातृभाषा और समसामयिक विषयों पर केंद्रित एक से बढ़कर एक रचनाएं प्रस्तुत कीं। बोकारो के अरुण पाठक ने अपनी रचना ‘हिंदी है हम सबकी भाषा, हिंदी है जन जन की भाषा…’ और करुणा कलिका ने ‘गर मन न हो तो वो मन नहीं चाहिए…’ का सस्वर पाठ कर श्रोताओं की भरपूर दाद बटोरी। अन्य रचनाकारों ने भी अपनी सशक्त कृतियों से सभागार को मंत्रमुग्ध कर दिया। समापन पर सभी अतिथियों को पारंपरिक पाग एवं डोपटा भेंट कर सम्मानित किया गया।

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