Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher
बोकारो | 21 जनवरी 2026
वैज्ञानिक सोच और नवाचार की दिशा में दिल्ली पब्लिक स्कूल, बोकारो के विद्यार्थियों ने ऐसा कार्य कर दिखाया है, जिसने न केवल विद्यालय बल्कि पूरे झारखंड को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दी है। विद्यालय के यंग इनोवेटर्स द्वारा विकसित दो महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट – मल्टीटास्किंग रोबोट (नोवासेपियन) और एआई आधारित भवन-सुरक्षा प्रणाली (इंफ्रैक्टो) – अब औपचारिक रूप से स्टार्टअप बनने की ओर अग्रसर हैं। यह उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि झारखंड में पहली बार किसी स्कूल स्तर के इनोवेटिव प्रोजेक्ट को एनआईटी जमशेदपुर के सहयोग से स्टार्टअप के रूप में विकसित किया जाएगा।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की निधि पहल के अंतर्गत संचालित आईटीबीआई (समावेशी प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर) कार्यक्रम के तहत इन दोनों परियोजनाओं को तकनीकी, मेंटरशिप और वित्तीय सहयोग मिलेगा। इसके अंतर्गत प्रत्येक प्रोजेक्ट को तीन से सात लाख रुपये से अधिक की सहायता प्रदान की जाएगी, जिससे प्रोटोटाइप विकास, परीक्षण और पेटेंट प्रक्रिया को गति मिलेगी।
एनआईटी जमशेदपुर के सेंटर फॉर इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन काउंसिल (CIIC) द्वारा इस संबंध में विद्यालय एवं चयनित विद्यार्थियों को आधिकारिक पत्र भी भेजा गया है। जल्द ही डीपीएस बोकारो और एनआईटी जमशेदपुर के बीच एक एमओयू पर हस्ताक्षर किए जाएंगे, जिससे इनोवेशन को व्यवसायिक स्वरूप देने की प्रक्रिया शुरू होगी।
चयन और उपलब्धि की मुख्य बातें
- एनआईटी जमशेदपुर में आयोजित इंडस्ट्री–एकेडमिया कॉन्क्लेव में पूरे झारखंड से केवल पांच प्रोजेक्ट चुने गए
- इनमें से दो प्रोजेक्ट अकेले डीपीएस बोकारो के रहे
- चयनित विद्यार्थियों में 11वीं कक्षा के प्रियम हरनंदका, शौर्य प्रताप, अनिकेत सिंह तथा 8वीं कक्षा के सरित चक्रवर्ती शामिल
- पहली बार बोकारो और झारखंड के किसी स्कूल प्रोजेक्ट को आईटीबीआई के तहत वित्तपोषण
इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर विद्यालय परिसर में हर्ष का माहौल रहा। विद्यालय के प्राचार्य डॉ. ए. एस. गंगवार ने विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह सफलता छात्रों की लगन, शिक्षकों के मार्गदर्शन और विद्यालय की नवाचार-संस्कृति का प्रतिफल है। यह उपलब्धि जिले के लिए गर्व का विषय है।
इंफ्रैक्टो: भवन-सुरक्षा का नया मानक
इंफ्रैक्टो एक अत्याधुनिक एआई आधारित सिस्टम है, जिसे भवनों और पुल-पुलियों में मौजूद सूक्ष्म व छिपी दरारों की पहचान के लिए विकसित किया गया है। यह प्रणाली भविष्य में भवन-सुरक्षा का एक मानक बनने की क्षमता रखती है।
इंफ्रैक्टो की प्रमुख विशेषताएं:
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और लिडार तकनीक पर आधारित
- रोवर और ड्रोन दोनों माध्यमों से सर्वेक्षण की क्षमता
- माइक्रोकंट्रोलर, अल्ट्रासोनिक सेंसर, कैमरा, वाईफाई मॉड्यूल और 3डी प्रिंटेड ढांचा
- पायथन प्रोग्रामिंग के माध्यम से कंप्यूटर से मॉनिटरिंग
- त्रि-आयामी इमेज के जरिए दरारों की सटीक पहचान
रोवर स्वतः भवन के चारों ओर घूमते हुए लेजर और सेंसर के माध्यम से संरचना का विश्लेषण करता है। जहां लेजर बीम दीवार से परावर्तित नहीं होती, वहां दरार की पहचान कर एआई सिस्टम तस्वीरों में उसे दर्ज कर लेता है। ऊंची इमारतों के लिए यही प्रणाली ड्रोन के माध्यम से संचालित की जाती है।
नोवासेपियन: घर के काम आसान करने वाला मल्टीटास्किंग रोबोट
दूसरा चयनित प्रोजेक्ट नोवासेपियन, एक मल्टीटास्किंग ह्यूमनॉइड रोबोट है, जिसे आठवीं कक्षा के छात्र सरित चक्रवर्ती ने विकसित किया है। यह रोबोट घरेलू कार्यों में सहायता के उद्देश्य से तैयार किया गया है।
नोवासेपियन की खासियतें:
- आवाज और मोबाइल ऐप से नियंत्रित
- सफाई, कपड़े धोने, सामान ढोने, सब्जी काटने, बागवानी जैसे कई कार्यों में सक्षम
- माइक्रोकंट्रोलर, एक दर्जन से अधिक सेंसर और दो दर्जन से ज्यादा मोटर
- 360 डिग्री घूमने वाला कैमरा और लिथियम आयन बैटरी
- पायथन भाषा में कोडिंग और 3डी प्रिंटेड संरचना
यह रोबोट एक ही समय में कई कार्य करने की क्षमता रखता है, जिससे घरेलू जीवन को आसान और तकनीक-सक्षम बनाया जा सकता है।
डीपीएस बोकारो के इन यंग इनोवेटर्स की यह सफलता यह दर्शाती है कि सही मार्गदर्शन, संसाधन और अवसर मिलने पर स्कूली छात्र भी देश के तकनीकी भविष्य को दिशा दे सकते हैं। आने वाले समय में ये दोनों प्रोजेक्ट न केवल स्टार्टअप का रूप लेंगे, बल्कि समाज के लिए उपयोगी समाधान भी प्रदान करेंगे।
