परीक्षा का दबाव न बनने दें, अभिभावक निभाएं सकारात्मक भूमिका : महेश त्रिपाठी

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Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher

बोकारो | 21 जनवरी 2026

बोर्ड परीक्षाओं के नजदीक आते ही कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थियों में बढ़ते मानसिक तनाव को देखते हुए चिन्मय विद्यालय, बोकारो में अभिभावकों के साथ एक विशेष अंतःक्रिया सत्र का आयोजन किया गया। इस सत्र का उद्देश्य बच्चों पर अंतिम समय में सिलेबस पूरा करने के दबाव को कम करना और उनके मानसिक व भावनात्मक स्वास्थ्य को लेकर अभिभावकों को सजग करना रहा।

विद्यालय के सचिव महेश त्रिपाठी ने अभिभावकों को संबोधित करते हुए कहा कि पढ़ाई की नियमित मॉनिटरिंग आवश्यक है, लेकिन इसे किसी भी स्थिति में बच्चों के लिए बोझ नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शांत मन और बेहतर शारीरिक स्वास्थ्य के साथ किया गया अध्ययन ही अच्छे परिणाम देता है। अभिभावकों को चाहिए कि वे घर में ऐसा माहौल बनाएं, जहां बच्चे बिना भय और तनाव के पूरे सिलेबस का रिवीजन कर सकें।

अभिभावकों के लिए दिए गए प्रमुख सुझाव

  • बच्चों की दिनचर्या पर नजर रखें, लेकिन अनावश्यक दबाव न बनाएं
  • पढ़ाई के साथ पर्याप्त नींद और विश्राम सुनिश्चित करें
  • परीक्षा को जीवन का अंतिम लक्ष्य न बनाएं, बल्कि सीखने की प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करें
  • सकारात्मक बातचीत और प्रोत्साहन से आत्मविश्वास बढ़ाएं

सत्र के दौरान विद्यालय के प्राचार्य सूरज शर्मा ने विद्यार्थियों की परीक्षा तैयारी को लेकर व्यावहारिक और ठोस सुझाव दिए। उन्होंने कहा कि अब समय पूरी गंभीरता से पढ़ाई में जुटने का है। प्राचार्य ने सलाह दी कि विद्यार्थी प्रतिदिन सुबह चार बजे उठकर कम से कम एक अध्याय का गहन रिवीजन करें, जिससे छोटे उत्तर वाले प्रश्नों पर पकड़ मजबूत होगी।

परीक्षा तैयारी को लेकर प्राचार्य के टिप्स

  • रोजाना एक अध्याय का गहन पुनरावर्तन
  • प्रत्येक विषय के कम से कम 10 सैंपल पेपर अनिवार्य रूप से हल करें
  • समय प्रबंधन और उत्तर लेखन की शैली पर विशेष ध्यान दें
  • कमजोर विषयों को प्राथमिकता देकर दोहराएं

उन्होंने बताया कि सैंपल पेपर हल करने से न केवल परीक्षा पैटर्न की समझ विकसित होती है, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ता है। साथ ही विद्यार्थियों को समय के भीतर प्रश्न हल करने की आदत पड़ती है।

उप प्राचार्य नरेंद्र कुमार की उपस्थिति और सुप्रिया चौधरी के संचालन में आयोजित इस सत्र के दौरान अभिभावकों ने अपनी शंकाएं भी रखीं। प्राचार्य ने सभी प्रश्नों का विस्तार से समाधान करते हुए अभिभावकों को आश्वस्त किया कि सही मार्गदर्शन और सकारात्मक सहयोग से बच्चे निश्चिंत होकर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं।