केंद्रीय बजट में HEC फिर उपेक्षित, कर्मियों में फूटा गुस्सा

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Rajesh Mohan Sahay : Senior Correspondent

रांची, 1 फरवरी 2026

केंद्र सरकार द्वारा पेश किए गए आम बजट ने एक बार फिर देश की ऐतिहासिक सार्वजनिक क्षेत्र की इकाई हैवी इंजीनियरिंग कॉरपोरेशन (HEC) को निराश किया है। बजट दस्तावेज़ों और भाषण में एचईसी का नाम तक न होने से संस्थान में कार्यरत मजदूरों, अधिकारियों और कर्मचारियों के बीच गहरा आक्रोश और असंतोष व्याप्त है।

एचईसी मजदूर संघ (बीएमएस) के महामंत्री रमाशंकर प्रसाद ने कहा कि यह केवल उपेक्षा नहीं, बल्कि एचईसी को धीरे-धीरे समाप्त करने की साजिश का संकेत है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतिगत उदासीनता के कारण देश की यह प्रतिष्ठित औद्योगिक इकाई आज अस्तित्व के संकट से जूझ रही है।

बजट में नाम नहीं, मदद भी नहीं

कर्मियों का कहना है कि:

  • पहले एचईसी को नियमित बजटीय सहायता मिलती थी
  • उसी सहारे उत्पादन और संचालन किसी तरह चलता था
  • बीते कुछ वर्षों से यह सहायता पूरी तरह बंद कर दी गई

इस बजट से उम्मीद थी कि पुनरुद्धार को लेकर कोई ठोस घोषणा होगी, लेकिन सरकार की ओर से पूर्ण चुप्पी ने कर्मचारियों की निराशा और बढ़ा दी है।

बैंक गारंटी बंद, वर्क ऑर्डर ठप

स्थिति तब और गंभीर हो गई जब:

  • सरकारी बैंक गारंटी सुविधा समाप्त कर दी गई
  • बड़े प्रोजेक्ट और वर्क ऑर्डर मिलना लगभग असंभव हो गया
  • सार्वजनिक और निजी कंपनियाँ एचईसी से दूरी बनाने लगीं

बैंक गारंटी के अभाव और नकारात्मक माहौल का सीधा असर उत्पादन, राजस्व और रोजगार पर पड़ा है।

29 माह का वेतन बकाया, परिवार संकट में

कर्मियों की स्थिति बेहद चिंताजनक हो चुकी है:

  • कर्मचारियों का 29 महीने का वेतन लंबित
  • हजारों परिवार आर्थिक और मानसिक संकट में
  • बच्चों की पढ़ाई, इलाज और रोजमर्रा की जरूरतें प्रभावित

कर्मियों का कहना है कि यह केवल औद्योगिक संकट नहीं, बल्कि मानवीय संकट भी बन चुका है।

बजट से थी उम्मीद, मिला सिर्फ सन्नाटा

इस बार के बजट से कर्मचारियों को:

  • पुनरुद्धार रोडमैप
  • बकाया वेतन भुगतान
  • बैंक गारंटी बहाली

जैसी घोषणाओं की उम्मीद थी, लेकिन बजट भाषण में एचईसी का जिक्र तक न होना कर्मियों के लिए बड़ा झटका साबित हुआ।

आंदोलन की चेतावनी

बजट के बाद एचईसी परिसर में रोष का माहौल है। मजदूर संघ ने चेतावनी दी है कि यदि केंद्र सरकार ने जल्द हस्तक्षेप नहीं किया तो:

  • एचईसी बंदी के कगार पर पहुंच सकती है
  • श्रमिक आंदोलन तेज किया जाएगा

कर्मियों की प्रमुख मांगें

  • तत्काल बजटीय सहायता
  • बैंक गारंटी सुविधा बहाल की जाए
  • 29 माह का बकाया वेतन शीघ्र भुगतान
  • एचईसी के पुनरुद्धार के लिए स्पष्ट नीति और रोडमैप

कर्मियों का कहना है कि यदि सरकार समय रहते निर्णय नहीं लेती, तो देश की यह ऐतिहासिक औद्योगिक धरोहर इतिहास के पन्नों में सिमटकर रह जाएगी।

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