Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher
तालगड़िया (बोकारो) | 7 मार्च 2026
251 महिलाओं के कलश यात्रा से गूंजा क्षेत्र, दामोदर तट से लाया गया पवित्र जल
तिलाटांड़ गांव में शनिवार को आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां तीन दिवसीय नौ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में निकली भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ।
गायत्री मंत्रों के उच्चारण और गाजे-बाजे की धुनों से पूरा इलाका भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
कई गांवों से होते हुए दामोदर घाट तक पहुंची कलश यात्रा
भव्य कलश यात्रा तिलाटांड़ से शुरू होकर अमलाबाद, केंदुलिया, रोहनियांटाड़ और अमलाबाद कोलियरी होते हुए दामोदर नदी के पावन काली घाट तक पहुंची।
वहां वेदाचार्यों ने वैदिक रीति-रिवाज से पूजन और संकल्प अनुष्ठान संपन्न कराया। इसके बाद 251 महिलाओं और कन्याओं ने कलश में पवित्र जल संग्रह किया।
कलश यात्रा पुनः यज्ञ मंडप पहुंची, जहां विधिवत कलश स्थापना के साथ नौ कुण्डीय गायत्री महायज्ञ की शुरुआत की गई।
संध्या आरती और प्रवचन से भाव-विभोर हुए श्रद्धालु
संध्या समय महाआरती, भजन-संगीत और विद्वानों के प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया।
गायत्री परिवार (तिलाटांड़) के सदस्यों ने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति का मूल आधार गायत्री और यज्ञ हैं। शास्त्रों के अनुसार, मां गायत्री सद्विचार की प्रतीक हैं, जबकि यज्ञ सत्कर्म का प्रतीक माना जाता है।
उन्होंने कहा कि जब विचार और कर्म दोनों पवित्र होते हैं, तभी प्राणी मात्र का कल्याण और विश्व शांति संभव हो पाती है।
9 मार्च को होगी पूर्णाहुति
तीन दिनों तक चलने वाले इस आध्यात्मिक आयोजन का समापन 9 मार्च को पूर्णाहुति के साथ होगा। तब तक प्रतिदिन यज्ञ, तर्पण, भजन और प्रवचन के कार्यक्रमों के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से अवगत कराया जाएगा।
इस आयोजन को सफल बनाने में स्थानीय ग्रामीणों और गायत्री परिवार के सदस्यों की सक्रिय भूमिका रही।
