Anjaan Jee : Editor in Chief & Publisher
पटना | 11 मार्च 2026
बिहार में हर साल हजारों बच्चों के लापता होने का मामला गंभीर चिंता का विषय बनता जा रहा है। राज्य पुलिस के अनुसार हर वर्ष करीब 15 हजार बच्चों के गायब होने के मामले दर्ज किए जा रहे हैं, जिनमें से बड़ी संख्या मानव तस्करी से भी जुड़ी हो सकती है। इस मुद्दे पर सख्ती दिखाते हुए बिहार पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है।
इस संबंध में जानकारी देते हुए बिहार के पुलिस महानिदेशक Vinay Kumar ने कहा कि मानव तस्करी के खिलाफ राज्य पुलिस के साथ कई सामाजिक संगठन भी मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि कई मामलों में बच्चियों को ऑर्केस्ट्रा ग्रुप में शामिल कर उनका शोषण किया जाता है, जिसे लेकर पुलिस विशेष सतर्कता बरत रही है।
नेपाल से भी लाई जा रही हैं लड़कियां
डीजीपी के अनुसार मानव तस्करी का नेटवर्क केवल राज्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय गिरोह भी सक्रिय हैं।
मुख्य तथ्य:
- नेपाल से लड़कियों को भारत लाए जाने के मामले सामने आए हैं।
- शिक्षा की कमी और गरीबी का फायदा उठाकर गिरोह सक्रिय हैं।
- संगठित गैंग इन गतिविधियों के जरिए आर्थिक लाभ कमा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि कई मामलों में इन गिरोहों का नेटवर्क काफी संगठित तरीके से काम करता है।
साइबर स्लेवरी गैंग भी सक्रिय
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मानव तस्करी के साथ-साथ साइबर स्लेवरी गैंग भी सक्रिय हैं।
इस तरह के मामलों में:
- लोगों को विदेश में अच्छी नौकरी का झांसा दिया जाता है।
- पासपोर्ट बनवाकर दूसरे देशों में भेजा जाता है।
- वहां उन्हें जबरन काम कराने या अवैध गतिविधियों में धकेलने की शिकायतें मिलती हैं।
पुलिस ऐसे नेटवर्क की पहचान कर कार्रवाई कर रही है।
सैकड़ों लोगों को कराया गया मुक्त
डीजीपी Vinay Kumar ने बताया कि पुलिस और प्रशासन के संयुक्त प्रयास से अब तक सैकड़ों लोगों को मानव तस्करी के जाल से मुक्त कराया गया है।
मुख्य पहल:
- विभिन्न राज्यों से बच्चों को वापस लाने का अभियान
- बाल मजदूरी और तस्करी से जुड़े मामलों की जांच
- एनजीओ के साथ समन्वय कर बचाव अभियान
उन्होंने कहा कि सरकार इस समस्या को लेकर गंभीर है और लगातार निगरानी रखी जा रही है।
5 से 6 हजार बच्चे अब भी लापता
डीजीपी ने बताया कि राज्य में हर साल बच्चों के लापता होने को लेकर लगभग 15 हजार एफआईआर दर्ज की जाती हैं।
स्थिति इस प्रकार है:
- बड़ी संख्या में बच्चों को खोजकर वापस लाया जाता है।
- लेकिन करीब 5 से 6 हजार बच्चों का अब तक पता नहीं चल पाता।
मानव तस्करी पर रोक लगाने के लिए बिहार पुलिस ने विशेष पहल भी की है।
मानव तस्करी रोकने के लिए विशेष पद
डीजीपी ने बताया कि मानव तस्करी के मामलों पर प्रभावी कार्रवाई के लिए राज्य में डीएसपी स्तर का विशेष पद बनाया गया है।
महत्वपूर्ण बिंदु:
- यह पहल करने वाला बिहार देश का पहला राज्य बताया जा रहा है।
- भविष्य में इस तंत्र को और मजबूत करने की योजना है।
पुलिस का कहना है कि मानव तस्करी और बच्चों के लापता होने की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए कानून प्रवर्तन एजेंसियां, सामाजिक संगठन और प्रशासन मिलकर काम कर रहे हैं।
