– Santosh K Srivastav : Editor in Chief & Publisher
एनआईपीएम रांची चैप्टर ने आयोजित किया ज्ञानवर्धक सत्र, कार्यस्थल पर एआई के उत्तरदायित्वपूर्ण उपयोग पर दिया गया जोर
रांची, 23 जुलाई। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ पर्सनल मैनेजमेंट (एनआईपीएम) रांची चैप्टर के तत्वावधान में सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (सीसीएल) मुख्यालय स्थित नवीन भवन के प्रकाश हॉल में “इंटीग्रेटिंग ए.आई. विद एच.आई.” विषय पर एक ज्ञानवर्धक सत्र का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) और मानवीय बुद्धिमत्ता (Human Intelligence) के समन्वय तथा आधुनिक कार्यस्थलों में उनके प्रभावी उपयोग पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में सीसीएल के निदेशक (मानव संसाधन) हर्ष नाथ मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। सत्र के शुभारंभ पर एनआईपीएम पूर्वी क्षेत्र के उपाध्यक्ष संजय कुमार ठाकुर ने मुख्य वक्ता एवं अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया।
मुख्य वक्ता डॉ. जी.पी. राव ने अपने व्याख्यान में कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवीय बुद्धिमत्ता को प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक के रूप में देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि दोनों के संतुलित समन्वय से “ऑगमेंटेड इंटेलिजेंस” अर्थात संवर्धित बुद्धिमत्ता विकसित होती है, जो निर्णय क्षमता, नवाचार और कार्यकुशलता को नई दिशा देती है। उन्होंने मानव संसाधन प्रबंधन में एआई के संभावित उपयोग, नैतिक पहलुओं तथा जिम्मेदार और प्रभावी उपयोग के लिए कई व्यावहारिक सुझाव भी साझा किए।
मुख्य अतिथि हर्ष नाथ मिश्रा ने अपने संबोधन में कहा कि डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता और मानवीय संवेदनशीलता का संतुलित समावेश संगठनों की कार्यक्षमता, निर्णय क्षमता और उत्पादकता को उल्लेखनीय रूप से बढ़ा सकता है। उन्होंने इस तरह के समसामयिक विषय पर सत्र आयोजित करने के लिए एनआईपीएम रांची चैप्टर की सराहना करते हुए भविष्य में भी ऐसे ज्ञानवर्धक कार्यक्रमों के नियमित आयोजन पर बल दिया।
कार्यक्रम में एनआईपीएम के सदस्यों, विभिन्न औद्योगिक एवं सार्वजनिक उपक्रमों के वरिष्ठ अधिकारियों तथा बड़ी संख्या में प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने सत्र की विषयवस्तु, मुख्य वक्ता की प्रस्तुति और आयोजन की उपयोगिता की सराहना करते हुए इसे वर्तमान समय की आवश्यकता के अनुरूप अत्यंत उपयोगी और ज्ञानवर्धक बताया।
कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागियों ने इसे प्रभावी ज्ञान-साझाकरण का मंच बताते हुए भविष्य में भी इस प्रकार के संवादात्मक एवं समसामयिक विषयों पर सत्र आयोजित किए जाने की अपेक्षा व्यक्त की।

