बाल श्रम से मुक्त बच्चों के लिए विशेष आवासीय प्रशिक्षण केंद्र का उद्घाटन

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– रंजीत प्रसाद सिन्हा की रिपोर्ट

शिक्षा, कौशल और समान अवसर देकर बच्चों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता : अरुण शंकर प्रसाद

पटना, 11 अगस्त 2026 : बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों को शिक्षा, कौशल और बेहतर भविष्य का अवसर उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रयास जुवेनाइल एड सेंटर की ओर से पटना के हनुमान नगर में विशेष आवासीय प्रशिक्षण केंद्र (Special Residential Training Centre) की स्थापना की गई है। केंद्र का उद्घाटन मंगलवार को श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग के मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने किया।

उद्घाटन समारोह में बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद कुमार सिंह, विभाग के अपर मुख्य सचिव के. सेंथिल कुमार, विशेष सचिव सुनील कुमार यादव, उपेन्द्र प्रसाद, श्रमायुक्त बिहार राजेश भारती, प्रयास के प्रमुख अमोद कंठ, अपर श्रमायुक्त विजय कुमार सहित विभाग के वरीय अधिकारी एवं अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि यह केंद्र बाल श्रम से मुक्त बच्चों को शिक्षा, कौशल और बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने बताया कि इसे केवल पटना तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि निर्धारित सात स्थानों तक इसका विस्तार किया जाएगा। प्रथम चरण में पटना, गया और सीतामढ़ी सहित अन्य निर्धारित स्थानों पर ऐसे केंद्र स्थापित किए जाएंगे।

केवल बाल श्रम से मुक्ति नहीं, भविष्य निर्माण भी लक्ष्य

मंत्री ने कहा कि सामाजिक जागरूकता की कमी और आर्थिक कमजोरी के कारण कई बच्चे बाल श्रम की ओर धकेल दिए जाते हैं। श्रम विभाग और बाल श्रम उन्मूलन से जुड़े प्रयासों के माध्यम से ऐसे बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराकर उनके परिवारों तक पहुंचाया गया है और उन्हें आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध कराई गई हैं। हालांकि, सरकार का उद्देश्य केवल बच्चों को बाल श्रम से बाहर निकालना नहीं, बल्कि उनके भविष्य को मजबूत बनाना है।

उन्होंने कहा कि दीर्घकालिक लक्ष्य यह है कि बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चे भी समाज के अन्य बच्चों की तरह योग्य, आत्मनिर्भर और जिम्मेदार नागरिक बनें। इसके लिए उन्हें शिक्षा, कौशल और समान अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है। विभाग श्रमिकों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने के साथ-साथ बाल श्रम मुक्त समाज के निर्माण की दिशा में भी कार्य कर रहा है।

प्रत्येक प्रखंड की कम से कम तीन पंचायतों को बाल श्रम मुक्त बनाने का लक्ष्य

मंत्री ने बताया कि प्रत्येक प्रखंड में कम से कम तीन पंचायतों को बाल श्रम मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया है। कई जिलों से इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि केवल किसी पंचायत को बाल श्रम मुक्त घोषित करना पर्याप्त नहीं होगा। इसके लिए स्थानीय लोगों और संबंधित अधिकारियों से प्रमाण-पत्र लेने के साथ उचित सत्यापन एवं प्रमाणन की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी, ताकि भविष्य में बाल श्रम को लेकर कोई सवाल न उठे।

पुनर्वास और शिक्षा सबसे बड़ी चुनौती

अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि बाल श्रम से मुक्त कराए गए बच्चों के सामने सबसे बड़ी चुनौती उनके पुनर्वास और शिक्षा की होती है। लंबे समय तक पढ़ाई से दूर रहने के कारण उनकी उम्र और सामान्य विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों की उम्र में अंतर हो सकता है। ऐसे में उन्हें सीधे सामान्य स्कूल में पढ़ाना कई बार व्यावहारिक रूप से कठिन होता है। इसी आवश्यकता को देखते हुए विशेष प्रशिक्षण एवं शिक्षा केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 18 वर्ष की आयु तक इन बच्चों की शिक्षा, विकास और भविष्य निर्माण की जिम्मेदारी सुनिश्चित करना जरूरी है। बच्चों को शिक्षा के साथ खेल, कला, प्रतिभा और उनकी रुचि के अन्य क्षेत्रों में आगे बढ़ने का अवसर भी दिया जाना चाहिए।

मंत्री ने बच्चों से अनुशासन में रहने, अच्छी आदतें अपनाने तथा शिक्षा एवं प्रशिक्षण पर पूरा ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि इन बच्चों को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वे समाज से अलग हैं। उन्हें भी वही सम्मान, सुविधाएं और अवसर मिलने चाहिए, जो समाज के अन्य बच्चों को प्राप्त होते हैं।

सामूहिक प्रयास से आएगा सकारात्मक बदलाव

मंत्री ने कहा कि बाल श्रम उन्मूलन और बच्चों के पुनर्वास का कार्य चुनौतीपूर्ण जरूर है, लेकिन सामूहिक प्रयास से बच्चों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। उन्होंने इस क्षेत्र में लंबे समय से कार्य कर रहे अमोद कंठ के प्रयासों की सराहना की और कहा कि अनुभवी एवं समर्पित लोगों का मार्गदर्शन बच्चों के लिए महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के मार्गदर्शन में शुरू की गई यह पहल समृद्ध बिहार की संकल्पना को मजबूती देगी। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में भी यह पहल सहायक होगी।

अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि सही शिक्षा, मार्गदर्शन और संस्कार मिलने पर ये बच्चे भी जीवन में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं। किसी राज्य का वास्तविक विकास केवल सड़क, भवन और आर्थिक संसाधनों से नहीं होता, बल्कि तब होता है जब बच्चों को शिक्षा, संस्कार, अवसर और सम्मान देकर योग्य एवं जिम्मेदार नागरिक बनाया जाता है।

उन्होंने विभागीय अधिकारियों और इस पहल से जुड़े सभी लोगों के प्रयासों की सराहना की। कार्यक्रम का समापन श्रमायुक्त बिहार राजेश भारती के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।