आध्यात्मिक सत्संग समिति की आम सभा में बच्चों को संस्कार व संस्कृति से जोड़ने पर जोर

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– रंजीत प्रसाद सिन्हा की रिपोर्ट

वार्षिक गतिविधियों की समीक्षा, आध्यात्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रमों के विस्तार पर चर्चा

पटना, 11 अगस्त : आध्यात्मिक सत्संग समिति की वार्षिक आम सभा समिति के सभागार में आयोजित की गई। लगभग 800 सदस्यों वाली समिति की सभा में बड़ी संख्या में सदस्यों ने भाग लिया। बैठक में वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान आयोजित आध्यात्मिक एवं सामाजिक गतिविधियों की समीक्षा के साथ आगामी वर्ष की योजनाओं पर भी विस्तार से चर्चा हुई।

समिति के अध्यक्ष रमेश चन्द्र गुप्ता ने सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में समिति की ओर से श्रद्धा एवं समर्पण के साथ विभिन्न आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। उन्होंने सदस्यों से इन कार्यक्रमों की निष्पक्ष समीक्षा करने तथा भविष्य की गतिविधियों को और प्रभावी बनाने के लिए रचनात्मक सुझाव देने का आग्रह किया।

महामंत्री संदीप सर्राफ ने वार्षिक गतिविधियों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने अधिक मास के अवसर पर 25 से 31 मई तक दादीजी मंदिर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा को विशेष रूप से उल्लेखनीय बताया। शास्त्रोपासक आचार्य चन्द्र भूषण मिश्र के श्रीमुख से आयोजित कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।

उन्होंने स्कूली बच्चों के लिए आयोजित गीता ज्ञान मंथन प्रतियोगिता की भी जानकारी दी और बताया कि ऐसी गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में आध्यात्मिक ज्ञान एवं जीवन-मूल्यों के प्रति रुचि विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है।

कोषाध्यक्ष सुजीत सिंघानिया ने समिति का वार्षिक आय-व्यय का विस्तृत ब्यौरा सभा के समक्ष प्रस्तुत किया। वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए राधे श्याम अग्रवाल को अंकेक्षक नियुक्त किया गया।

बच्चों और युवाओं को संस्कार से जोड़ने पर विशेष जोर

सभा में बच्चों एवं युवाओं को आध्यात्म, संस्कार, सनातन संस्कृति और जीवन-मूल्यों से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया। सदस्यों ने कहा कि वर्तमान समय में युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों से परिचित कराना आवश्यक है।

इस दिशा में आध्यात्मिक कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और ज्ञानवर्धक गतिविधियों के आयोजन पर विचार किया गया। वक्ताओं ने कहा कि आध्यात्म केवल धार्मिक आस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन को सही दिशा देने वाला माध्यम भी है।

सभा में मस्तक पर चंदन लगाने की महत्ता और अपने नाम की शक्ति जैसे विषयों पर भी चर्चा की गई। सदस्यों ने कहा कि बच्चों और युवाओं को भारतीय संस्कृति की वैज्ञानिक एवं जीवनोपयोगी परंपराओं से परिचित कराने के लिए नियमित कार्यक्रम आयोजित किए जाने चाहिए।

सभा के समापन अवसर पर पूर्व अध्यक्ष कमल नोपानी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। उन्होंने सभी सदस्यों एवं सहयोगियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए समिति की भावी गतिविधियों में निरंतर सहयोग की अपेक्षा की।