बिहार में इको-टूरिज्म को मिलेगा नया आयाम

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– Santosh Kr. Srivastav : Editor in Chief & Publisher

प्राकृतिक स्थलों को विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने पर जोर, स्थानीय रोजगार और पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी प्राथमिकता

पटना, 16 अगस्त। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने लोक सेवक आवास स्थित ‘संकल्प’ सभागार में बिहार में इको-टूरिज्म के समग्र विकास को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक में राज्य के प्राकृतिक एवं वन क्षेत्रों, जलाशयों, पहाड़ी क्षेत्रों तथा अन्य पर्यटन स्थलों को चरणबद्ध तरीके से विकसित कर पर्यटकों के लिए आकर्षक सुविधाएं उपलब्ध कराने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

प्राकृतिक स्थलों के विकास पर जोर

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से इको-टूरिज्म के विकास को लेकर तैयार की जा रही योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य के प्राकृतिक और वन क्षेत्रों, जलाशयों, पहाड़ी क्षेत्रों तथा अन्य पर्यटन स्थलों को विकसित कर पर्यटकों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।

विभिन्न प्राकृतिक स्थलों एवं जलाशयों पर वेलनेस सेंटर, हॉट स्प्रिंग, सफारी, एडवेंचर स्पोर्ट्स, योग ग्राम, पिकनिक स्पॉट, स्वीमिंग पूल, हेलीपैड, कल्चरल प्रोग्राम और कल्चरल कैंप जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

एडवेंचर टूरिज्म को भी मिलेगा बढ़ावा

पर्यटकों के लिए ट्रैकिंग रूट, बेसिक माउंटेनियरिंग और रॉक क्लाइंबिंग जैसी साहसिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देने की योजना है। इसके साथ ही पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के माध्यम से इको-टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म और वाटर स्पोर्ट्स से जुड़ी परियोजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया गया।

पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार सृजन

समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में इको-टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं। राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का संरक्षण करते हुए उनका पर्यटन की दृष्टि से बेहतर उपयोग किया जाना चाहिए। इको-टूरिज्म के विकास से पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

उन्होंने निर्देश दिया कि इको-टूरिज्म की योजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, स्थानीय समुदाय की भागीदारी, रोजगार सृजन और पर्यटकों की सुविधाओं को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।

विभागों के बीच बेहतर समन्वय का निर्देश

मुख्यमंत्री ने वन, सिंचाई, पर्यटन सहित संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बिहार के प्राकृतिक स्थलों को आकर्षक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की जाए।

उन्होंने पर्यटन स्थलों की व्यापक ब्रांडिंग करते हुए देश-विदेश के पर्यटकों को बिहार की प्राकृतिक और साहसिक पर्यटन संभावनाओं से परिचित कराने पर भी जोर दिया। जिन प्राकृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का अपेक्षित विकास अभी नहीं हो पाया है, उनकी क्षमता का आकलन कर चरणबद्ध तरीके से विकास करने का निर्देश दिया गया।

वरिष्ठ अधिकारी रहे मौजूद

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय विशेषताओं और उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों के अनुरूप योजनाएं तैयार कर इको-टूरिज्म को बिहार की पर्यटन अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बनाया जा सकता है।

बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह तथा बिहार राज्य पर्यटन विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक नंदकिशोर सहित अन्य वरीय अधिकारी उपस्थित थे।

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