– संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट
जलेस की गोष्ठी में दो पुस्तकों का हुआ लोकार्पण, ‘दलित चेतना की कहानियां’ पर गंभीर परिचर्चा
बोकारो, 1 सितंबर 2026: जनवादी लेखक संघ (जलेस) बोकारो के तत्वावधान में पुस्तक लोकार्पण सह परिचर्चा कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जलेस झारखंड के संरक्षक गोपाल प्रसाद की अध्यक्षता और सचिव कुमार सत्येंद्र के संचालन में आयोजित समारोह में प्रह्लाद चंद्र दास की पुस्तक ‘दलित चेतना की कहानियां’ और वरिष्ठ कवि ललन तिवारी की पुस्तक ‘खोए की खोज’ का विधिवत लोकार्पण हुआ।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि दक्षिण बिहार केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रो. डॉ. कर्मानंद आर्य ने ‘दलित चेतना की कहानियां’ पर परिचर्चा की शुरुआत करते हुए कहा कि ये रचनाएं प्रतिशोध के बजाय सामाजिक परिवर्तन और बदलाव का संदेश देती हैं। उन्होंने ‘लटकी हुई शर्त’, ‘नचनी काकी’ और ‘बैगन बारी’ जैसी कहानियों के शिल्प व भाषा की सराहना की। डॉ. बलभद्र ने कोयलांचल की पृष्ठभूमि पर आधारित इन कहानियों की कसी हुई शैली को सराहा, जबकि डॉ. अच्युतानंद मिश्र ने जाति व्यवस्था के ऐतिहासिक संदर्भों पर प्रकाश डाला। पुस्तक चयनकर्ता डॉ. अली इमाम खां, कथाकार कमलेश, कावेरी और डॉ. सुजाता कुमारी ने भी विचार रखे।
अध्यक्षीय संबोधन में गोपाल प्रसाद ने ‘लटकी हुई शर्त’ को कालजयी रचना बताया। जलेस बोकारो के सचिव शांति भारत के धन्यवाद ज्ञापन के साथ कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस दौरान विशिष्ट अतिथि डॉ. अली इमाम खां, डॉ. बलभद्र, कवि विपिन बिहारी, अजय यतीश, दयानंद प्रसाद बटोही, श्यामसुंदर केवट रवि, प्रदीप कुमार दीपक और अभिषेक भारती उपस्थित रहे।
