– संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट
राज्यपाल ने शोध में तथ्यों की विश्वसनीयता, निष्पक्षता और बौद्धिक ईमानदारी पर दिया जोर; एआई के उपयोग में सावधानी बरतने और बिहार के स्थानीय मुद्दों पर शोध का किया आह्वान
पटना, 12 सितंबर 2026: राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने कहा कि देश में जानकारी और आंकड़ों की कमी नहीं है, लेकिन आवश्यकता ऐसे शोध की है, जो सही तथ्यों पर आधारित हो, स्पष्ट रूप से समझ में आए और समाज तथा सरकार के लिए उपयोगी हो। अच्छा शोध सही सवाल से शुरू होता है और तथ्यों एवं प्रमाणों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचता है।
राज्यपाल चंद्रगुप्त प्रबंध संस्थान, पटना में बिहार लोक भवन एवं उच्च शिक्षा विभाग, बिहार सरकार द्वारा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICSSR), शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से आयोजित ‘सामाजिक विज्ञान शोध पद्धति एवं लेखन कौशल’ विषयक छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। कार्यशाला के नॉलेज पार्टनर इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट, नई दिल्ली हैं।
आंकड़ों के पीछे छिपे कारणों को समझना जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि शोध के दौरान केवल यह जानना पर्याप्त नहीं है कि क्या हुआ, बल्कि यह समझना भी जरूरी है कि ऐसा क्यों हुआ। किसी सरकारी योजना का प्रभाव एक जिले में बेहतर और दूसरे में कमजोर क्यों रहता है, बच्चे स्कूल छोड़ क्यों देते हैं, युवा रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में क्यों जाते हैं अथवा ग्रामीण क्षेत्रों की लड़कियों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने में किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है—ऐसे सवालों के जवाब अच्छे सामाजिक विज्ञान शोध से मिल सकते हैं।
उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में नामांकन, शिक्षकों की संख्या, परीक्षाओं और परिणामों से संबंधित अनेक आंकड़े उपलब्ध हैं, लेकिन ये आंकड़े पूरी तस्वीर नहीं बताते। शोध का उद्देश्य आंकड़ों के पीछे छिपे कारणों को समझना होना चाहिए।

शोध में ईमानदारी और निष्पक्षता जरूरी
राज्यपाल ने कहा कि शोध जिज्ञासा से शुरू होता है, लेकिन ईमानदारी के साथ आगे बढ़ता है। शोधकर्ता को पहले से तय निष्कर्ष को सही साबित करने के लिए तथ्यों को नहीं तलाशना चाहिए, बल्कि तथ्यों और सबूतों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना चाहिए। यदि शोध के दौरान प्राप्त तथ्य उसकी शुरुआती सोच को गलत साबित करते हैं, तो उसे इसे स्वीकार करने के लिए तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने शोध में तथ्यों की विश्वसनीयता, निष्पक्षता और बौद्धिक ईमानदारी को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।
एआई के उपयोग में सावधानी बरतने की सलाह
सोशल मीडिया और इंटरनेट के दौर में जानकारी तेजी से फैलने का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि शोधकर्ताओं की जिम्मेदारी बढ़ गई है। उन्हें जानकारी जुटाने के साथ उसकी विश्वसनीयता की भी जांच करनी चाहिए।
एआई के बढ़ते उपयोग पर उन्होंने कहा कि यह जानकारी खोजने, सार तैयार करने, अनुवाद करने और बड़ी मात्रा में सामग्री के विश्लेषण में उपयोगी हो सकता है, लेकिन शोधकर्ता को इस पर पूरी तरह निर्भर नहीं होना चाहिए। एआई शोध को तेज कर सकता है, लेकिन बौद्धिक ईमानदारी की जिम्मेदारी तकनीक को नहीं सौंपी जा सकती।
उन्होंने कहा कि अच्छे शोध के साथ उसे सरल और प्रभावी ढंग से लिखना भी आवश्यक है। सरल भाषा कमजोर सोच का प्रतीक नहीं है। स्पष्ट लेखन स्पष्ट सोच को दर्शाता है। शोधकर्ताओं को यह ध्यान रखना चाहिए कि वे क्या कहना चाहते हैं, उनके पास क्या प्रमाण हैं और उनके शोध का समाज के लिए क्या महत्व है।
बिहार के स्थानीय मुद्दों पर शोध का आह्वान
राज्यपाल ने बिहार को सामाजिक विज्ञान शोध के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र बताते हुए महिलाओं की भागीदारी, शिक्षा, पलायन, रोजगार, शहरीकरण, तकनीक और युवाओं की आकांक्षाओं जैसे स्थानीय एवं जमीनी विषयों पर शोध करने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा कि सामाजिक विज्ञान शोध का उद्देश्य केवल शोध-पत्र प्रकाशित करना नहीं, बल्कि समाज को बेहतर समझना और भविष्य के लिए बेहतर निर्णय लेने में योगदान देना होना चाहिए।
राज्यपाल ने कार्यशाला के आयोजन के लिए सभी संबंधित संस्थाओं एवं प्रतिभागियों को बधाई देते हुए इसकी सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में कई गणमान्य लोग हुए शामिल
कार्यक्रम को राज्यपाल के अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह, यूनिवर्सिटी ऑफ बेसल, स्विट्जरलैंड के प्रो. मैनफ्रेड मैक्स बर्गमैन, भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद के सदस्य सचिव प्रो. धनंजय सिंह, उच्च शिक्षा निदेशक प्रो. एन. के. अग्रवाल, इंस्टीट्यूट ऑफ ह्यूमन डेवलपमेंट के निदेशक प्रो. अलख एन. शर्मा तथा चंद्रगुप्त इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, पटना के निदेशक प्रो. राणा सिंह ने भी संबोधित किया।
