बहुवर्षीय योजना बन हवा में लटका बोकारो हवाई अड्डा : अशोक चौधरी

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संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट

जदयू नेता ने प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों को घेरा, सामूहिक जनांदोलन का आह्वान

बोकारो, 12 सितंबर 2026। बोकारो की विकास योजनाओं और जन-सरोकारों से जुड़े गंभीर मुद्दों को लेकर जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व बियाडा चेयरमैन अशोक चौधरी ने शनिवार को प्रेस वार्ता कर तीखा हमला बोला। उन्होंने बोकारो हवाई अड्डे के परिचालन में हो रही अत्यधिक देरी पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि बोकारो हवाई अड्डा पूरी तरह हवा में लटक गया है।

अशोक चौधरी ने कहा कि विडंबना यह है कि इस बहुवर्षीय लटकी परियोजना पर बोकारो के उपायुक्त अजय नाथ झा को छोड़कर किसी का भी ध्यान नहीं रह गया है। न तो बोकारो इस्पात संयंत्र प्रबंधन को इसकी कोई फिक्र है और न ही क्षेत्र के स्थानीय जनप्रतिनिधियों को कोई सरोकार। उन्होंने कहा कि यह महत्वाकांक्षी परियोजना महज एक बहुवर्षीय कागजी योजना बनकर रह गई है।

उन्होंने अनोखे और व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि बोकारो एयरपोर्ट के रनवे पर फिलहाल 13/31 अंकित है। कहीं ऐसा न हो कि उड़ान शुरू होने का इंतजार करते-करते पृथ्वी के चुंबकीय ध्रुव बदलने के कारण वैज्ञानिकों को रनवे का नंबर ही बदलना पड़ जाए।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2018-19 में ‘उड़ान’ योजना के तहत पहले चरण का काम शुरू हुआ था, लेकिन आज तक लोग केवल इंतजार कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर पड़ोसी पुरुलिया जिले में द्वितीय विश्व युद्ध के दौर के ‘छर्रा एयरफील्ड’ को तेजी से चालू किया जा रहा है।

विस्थापितों को नहीं मिला हक, बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर चिंता

जदयू नेता ने विस्थापितों के मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि जेनरेशन-एक्स और बेबी बूमर्स से लेकर आज तक समस्याएं जस की तस बनी हुई हैं। विस्थापित गांवों को अब तक पंचायत का दर्जा नहीं मिलना और बुनियादी सुविधाओं का अभाव बेहद शर्मनाक है।

उन्होंने बीएसएल की नीतियों पर निशाना साधते हुए कहा कि कंपनी अपनी गैर-कोर गतिविधियों से बाहर निकलने के नाम पर स्कूल बंद कर रही है। बोकारो जनरल अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है और बीजीएच को मेडिकल कॉलेज बनाने की योजना भी ठंडे बस्ते में डाल दी गई है।

अशोक चौधरी ने कहा कि अब केवल पैचवर्क के बजाय बीएसएल, केंद्र और राज्य सरकार को मिलकर स्थायी नीति बनानी होगी, ताकि बोकारो से जुड़े इन गंभीर मुद्दों का दीर्घकालिक समाधान निकाला जा सके।

मजदूर अतिक्रमणकारी नहीं, ‘अनौपचारिक सेवा प्रदाता’

शहर में चल रहे अतिक्रमण अभियान पर उन्होंने स्पष्ट कहा कि चौराहों पर काम करने वाले दिहाड़ी मजदूर, ऑटो चालक, फुटपाथ विक्रेता और ठेका श्रमिक बोकारो की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। उन्होंने कहा कि इन्हें उजाड़ने की प्रशासनिक दृष्टि के बजाय पुनर्वास की मानवीय नीति अपनाई जानी चाहिए।

उन्होंने मांग की कि प्रबंधन की अप्रयुक्त जमीनों पर राज्य सरकार बायोमेट्रिक सर्वे कराए और जरूरतमंद लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना, बिजली एवं पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

सामूहिक जनांदोलन का आह्वान

अशोक चौधरी ने बोकारो की विकास योजनाओं, विस्थापितों के अधिकार, स्वास्थ्य व्यवस्था और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर सामूहिक प्रयास की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रशासन, प्रबंधन, सरकार और जनप्रतिनिधियों को मिलकर ठोस एवं स्थायी नीति बनानी होगी।

प्रेस वार्ता में जदयू के पूर्व जिलाध्यक्ष प्रवीण कुमार, बाल्मीकि सिंह, पानू महतो, जनार्दन चौधरी, कन्हैया जाधव, के.पी. सिंह, महेंद्र गोप, चंद्रदीप शर्मा, अनुज कुमार, अभय कुमार, गोविन्द ठाकुर, कन्हाई महतो, अमावती देवी और मिथिलेश कुमार सहित कई वरिष्ठ नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित थे।

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