गोमिया में ONGC के CBM प्लांट पर रैयतों का कब्जा

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संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट

नौकरी की मांग को लेकर मुख्य गेट जाम, नाइट शिफ्ट के कर्मचारी अंदर फंसे; प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा पाइपलाइन की सप्लाई पर भी संकट की आशंका

रांची/बोकारो/गोमिया, 10 सितंबर 2026: बोकारो जिला अंतर्गत गोमिया स्थित ONGC के खुद्गड्डा CBM (कोल बेड मीथेन) गैस कलेक्टिंग स्टेशन (GCS) पर गुरुवार सुबह से स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है। नौकरी की मांग को लेकर स्थानीय रैयतों ने पूर्व निर्धारित सूचना के आधार पर सुबह 5 बजे से ही प्लांट के मुख्य गेट को पूरी तरह जाम कर दिया है।

नाइट शिफ्ट के कर्मचारी अंदर फंसे, संयंत्र बंद होने का खतरा

मुख्य गेट जाम होने के कारण प्लांट के भीतर सुरक्षा और संचालन में तैनात कर्मियों (Crew) की शिफ्ट नहीं बदली जा सकी है। बुधवार रात से ड्यूटी पर तैनात कर्मी बिना भोजन और पानी के अंदर ही फंसे हुए हैं।

अति-संवेदनशील और प्रेशराइज्ड गैस संयंत्र होने के कारण थके-मांदे कर्मियों से काम कराए जाने को लेकर सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यदि गतिरोध लंबे समय तक जारी रहता है तो संयंत्र के संचालन पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा पाइपलाइन की सप्लाई पर संकट

यह CBM प्लांट देश की महत्वपूर्ण ‘प्रधानमंत्री ऊर्जा गंगा पाइपलाइन’ (Jagdishpur-Haldia & Dhamra Pipeline) से सीधे जुड़ा हुआ है। यहां से उत्पादित गैस को सीधे राष्ट्रीय पाइपलाइन ग्रिड में डाला जाता है।

अगर यह गतिरोध जल्द समाप्त नहीं हुआ तो गैस का उत्पादन और फीडिंग पूरी तरह ठप होने की आशंका है। इससे न केवल स्थानीय उद्योग और GAIL की सप्लाई प्रभावित हो सकती है, बल्कि ऊर्जा गंगा पाइपलाइन से जुड़े कई राज्यों के उद्योगों, CNG स्टेशनों और घरेलू PNG आपूर्ति पर भी असर पड़ सकता है। इससे बड़े ऊर्जा संकट की स्थिति उत्पन्न होने की आशंका जताई जा रही है।

प्रशासनिक अमला मौके पर मुस्तैद

घटना की गंभीरता को देखते हुए गोमिया थाना प्रभारी (OC), तेनुघाट थाना प्रभारी, गोमिया अंचल निरीक्षक (CI), प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट सहित 20 से 30 पुलिस बल और होमगार्ड के जवान मौके पर तैनात हैं।

प्रशासन और पुलिस अधिकारी आंदोलनकारियों से वार्ता कर मुख्य गेट खाली कराने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, स्थानीय रैयत अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।

प्रतिबंधित क्षेत्र में जाम को लेकर प्रशासन की कार्रवाई

झारखंड सरकार के गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा इस परिसर को ‘झारखंड राज्य संरक्षित स्थान अधिनियम, 1979’ के तहत ‘प्रतिबंधित क्षेत्र’ (Prohibited Area) घोषित किया गया है।

प्रतिबंधित क्षेत्र में मुख्य गेट जाम किए जाने के बाद प्रशासनिक अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। अधिकारियों की ओर से आंदोलनकारियों से बातचीत के माध्यम से गतिरोध समाप्त कराने का प्रयास किया जा रहा है।

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