– संतोष श्रीवास्तव की रिपोर्ट
जहाजटांड़ की सार्वजनिक सड़क काटने और खनन सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का आरोप; सड़क बहाली, DGMS निरीक्षण और समयबद्ध जांच की मांग
धनबाद, 10 सितंबर 2026: धनबाद के जहाजटांड़ बस्ती में सार्वजनिक सड़क काटने और कथित तौर पर खनन सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का मामला अब झारखंड हाईकोर्ट पहुंच गया है। जहाजटांड़ निवासी खेमलाल महतो ने संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत जनहित याचिका (PIL) दायर कर आरोप लगाया है कि BCCL और उसकी आउटसोर्सिंग एजेंसी ने बस्ती को जोड़ने वाली एकमात्र सार्वजनिक सड़क काट दी, जिससे करीब 10 हजार ग्रामीण प्रभावित हुए हैं।
याचिका में सड़क बहाल करने, सुरक्षित वैकल्पिक पक्की सड़क बनाने, DGMS से तत्काल निरीक्षण कराने और पूरी घटना की समयबद्ध जांच कराने की मांग की गई है।
2015 में 1.65 करोड़ रुपये की लागत से बनी थी सड़क
याचिका के अनुसार, भौरा से जहाजटांड़ तक 3.5 किलोमीटर लंबी सड़क ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा वर्ष 2015 में राज्य सरकार की योजना के तहत 1.65 करोड़ रुपये की लागत से बनवाई गई थी।
याचिकाकर्ता का दावा है कि यह सड़क सार्वजनिक धन से बनाई गई है। ऐसे में इसे बिना कानूनी प्रक्रिया के काटना नागरिकों के अधिकारों का उल्लंघन है।
2019 से चार बार वैकल्पिक सड़क बनाने के वादे
याचिका में कहा गया है कि यह पहली घटना नहीं है। वर्ष 2019, 2020, 2021 और 2023 में BCCL ने अलग-अलग बैठकों और लिखित पत्रों के माध्यम से वैकल्पिक पक्की सड़क बनाने तथा मूल सड़क को बहाल करने का आश्वासन दिया था।
याचिका के अनुसार, इन बैठकों में विधायक, अनुमंडल पदाधिकारी और BCCL के CMD स्तर के अधिकारियों की मौजूदगी में भी सड़क समस्या के समाधान के वादे किए गए, लेकिन इसके बावजूद कोई स्थायी समाधान नहीं निकला।
रात में 100 से अधिक लोगों से सड़क काटने का आरोप
याचिका में आरोप लगाया गया है कि 21 अगस्त 2026 की रात करीब 11:30 बजे BCCL और उसकी आउटसोर्सिंग एजेंसी ने 100 से अधिक लोगों को लगाकर बिना सरकारी आदेश और ग्रामीणों को सूचना दिए सड़क काट दी।
इसके बाद ग्रामीणों ने विरोध प्रदर्शन किया। कोयला ढुलाई कई दिनों तक बाधित रही और स्थिति को देखते हुए मौके पर पुलिस तथा CISF की तैनाती करनी पड़ी।
याचिका में यह भी कहा गया है कि धनबाद के मेयर ने घटनास्थल का निरीक्षण किया था और सड़क बहाल होने तक परियोजना का काम रोकने की बात कही थी।
खनन सुरक्षा नियमों के उल्लंघन का भी दावा
याचिका में DGMS पर भी कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया है। इसमें दावा किया गया है कि वैकल्पिक सड़क के किनारे 30 मीटर से अधिक ऊंचा ओवरबर्डन डंप लगभग 90 डिग्री ढलान पर खड़ा है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, कोल माइंस रेगुलेशन-2017 के नियम 108 के तहत अधिकतम ढलान 37.5 डिग्री तथा आवश्यक बेंचिंग अनिवार्य है। साथ ही नियम 101 और 106 के तहत सड़क निर्माण एवं ओपनकास्ट खनन से संबंधित मानकों का भी उल्लंघन होने का दावा किया गया है।
हाईकोर्ट से मांगी गई कई राहत
जनहित याचिका में हाईकोर्ट से सड़क तत्काल बहाल कराने या सुरक्षित पक्की वैकल्पिक सड़क उपलब्ध कराने की मांग की गई है। इसके अलावा DGMS से निरीक्षण कराकर उल्लंघन पाए जाने पर गैर-अनुपालक खनन कार्य को रोकने की मांग भी की गई है।
याचिका में सड़क काटने की घटना की जांच कराने तथा DGMS, जिला खनन पदाधिकारी और ग्रामीण कार्य विभाग के अधिकारियों वाली स्वतंत्र समिति गठित करने की भी मांग की गई है।
इसके साथ ही BCCL को समय-समय पर अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने और भविष्य में बिना प्रशासनिक अनुमति सार्वजनिक सड़क नहीं काटने का स्थायी निर्देश देने की प्रार्थना भी हाईकोर्ट से की गई है।
मामले में लगाए गए आरोपों की वास्तविकता और खनन सुरक्षा नियमों के कथित उल्लंघन की स्थिति जांच एवं न्यायिक प्रक्रिया के आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
