-लाइव ख़बर नेशन || संतोष श्रीवास्तव
अस्पतालों के औचक निरीक्षण से लेकर 105 नए आईसीयू बेड तक, अनावश्यक रेफरल रोकने पर विभाग का जोर
पटना, 06 अक्टूबर: बिहार में स्वास्थ्य विभाग की कमान संभालने के बाद स्वास्थ्य मंत्री निशांत लगातार स्वास्थ्य व्यवस्था को सुदृढ़ करने में जुटे हैं। अस्पतालों के औचक निरीक्षण, मरीजों से सीधा संवाद, अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें और जिला स्तर पर आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार की दिशा में विभाग तेजी से आगे बढ़ रहा है। स्वास्थ्य मंत्री की प्राथमिक रणनीति मरीजों को छोटी-छोटी जांच और इलाज के लिए बड़े अस्पतालों के चक्कर काटने से बचाना और जिला स्तर पर ही गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं सुलभ कराना है। इसी सक्रियता को देखते हुए हाल ही में बिहार लोक भवन में आयोजित ‘टीबी मुक्त बिहार’ संगोष्ठी के दौरान राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने टीबी उन्मूलन अभियानों और मोबाइल एक्स-रे स्क्रीनिंग की सफलता के लिए स्वास्थ्य मंत्री निशांत और स्वास्थ्य सचिव कुमार रवि के प्रयासों की विशेष रूप से प्रशंसा की।
स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धियों के अनुसार, जिला अस्पतालों में 105 नए आईसीयू बेड और 70 वेंटिलेटर युक्त गहन चिकित्सा इकाइयां शुरू होने से अब राज्य में कुल 190 आईसीयू बेड और 120 वेंटिलेटर पूरी तरह सक्रिय हैं। 55 में से 25 अनुमंडलीय अस्पतालों में डायलिसिस सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। राजधानी पटना में पीएमसीएच के भीतर सेंट्रलाइज्ड रेडियोलॉजी सिस्टम की शुरुआत की गई है, जिससे एक ही परिसर में अल्ट्रासाउंड, एक्स-रे, सीटी स्कैन और एमआरआई जांच की सुविधा मिल रही है। एलएनजेपी अस्पताल में 400 बेड का नया सुपर स्पेशियलिटी भवन तैयार हुआ है, जबकि आईजीआईएमएस में मॉड्यूलर आई ओटी, अत्याधुनिक सीसीएम आईसीयू, डायलिसिस यूनिट और सीसीटीवी कमांड सेंटर का संचालन शुरू किया गया है। मुजफ्फरपुर के होमी भाभा कैंसर अस्पताल में आधुनिक आईसीयू कॉम्प्लेक्स और एसकेएमसीएच में 30 बेड की स्पेशल क्रिटिकल केयर यूनिट शुरू होने से उत्तर बिहार के गंभीर मरीजों को बड़ी राहत मिली है।
मानव संसाधन को मजबूत करने के उद्देश्य से 200 विशेषज्ञ चिकित्सकों, 142 चिकित्सा शिक्षकों और 2,219 तकनीकी कर्मियों (ओटी असिस्टेंट, ईसीजी टेक्निशियन, ड्रेसर व एक्स-रे टेक्निशियन) की पदस्थापना की गई है। इसके परिणामस्वरूप सर्जरी, ईसीजी और ड्रेसिंग सेवाओं में उल्लेखनीय सुधार देखा गया है। जिला अस्पतालों के आईपीडी दाखिलों में भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जहां सितंबर 2026 में 49,450 मरीज भर्ती हुए। मधेपुरा, पटना और वैशाली जिलों में सर्जरी के आंकड़ों में तेजी आई है और अनावश्यक रेफरल में प्रभावी कमी देखी गई है। मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में समस्तीपुर और छपरा के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में 50-50 एमबीबीएस सीटों को स्वीकृति मिली है, जबकि 16 मेडिकल कॉलेजों को पीपीपी मॉडल पर विकसित करने की मंजूरी दी गई है। सरकारी अस्पतालों में 504 प्रकार की दवाएं मुफ्त उपलब्ध कराने के साथ बिहार लगातार 23वें महीने देशभर में अव्वल रहा है। मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष में वार्षिक आय सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर 4 लाख रुपये कर दी गई है। टीबी और एनीमिया मुक्ति अभियान को जनआंदोलन का रूप देकर घर-घर स्क्रीनिंग की जा रही है, जिससे बिहार की स्वास्थ्य अधोसंरचना को एक नई और मजबूत दिशा मिल रही है।
