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तत्कालीन सभापति के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों पर चर्चा, भोजपुर के अभ्यर्थी पर उम्र छिपाने का आरोप; उच्चस्तरीय जांच की मांग
पटना, 09 अक्टूबर 2026 : बिहार विधान परिषद सचिवालय में विज्ञापन संख्या 01/2025 के तहत कार्यालय परिचारी (ऑफिस अटेंडेंट) सहित विभिन्न पदों पर संपन्न हुई बहाली प्रक्रिया गंभीर विवादों के घेरे में आ गई है। परीक्षा के आयोजन से लेकर अंतिम नियुक्ति तक दिखाई गई असामान्य जल्दबाजी को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि नियमों की अनदेखी करते हुए कथित तौर पर कई ऐसे अभ्यर्थियों को चयनित किया गया, जिनके शैक्षणिक दस्तावेज और उम्र संबंधी विवरण संदेहास्पद हैं। हालांकि, यह पूरा मामला जांच का विषय है और इस संबंध में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांचोपरांत ही संभव है।
इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन सभापति अवधेश नारायण सिंह का कार्यकाल भी चर्चा के केंद्र में आ गया है। सूत्रों और शिकायतों के मुताबिक, चयन प्रक्रिया के विभिन्न स्तरों पर अनुचित हस्तक्षेप की आशंका जताई जा रही है।
हाल ही में भोजपुर जिले से संबंधित एक मामला भी सामने आया है, जहां कोईलवर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चैनपुरा निवासी धर्मेंद्र कुमार सिंह (पिता- राजकुमार सिंह) के चयन पर सवाल खड़े किए गए हैं। सूत्र द्वारा दावा किया गया है कि अभ्यर्थी की वास्तविक उम्र करीब 49 वर्ष है और उसने वर्ष 1993 में तारा मणि भगवान साह उच्च विद्यालय (टीएमबीएस), कोईलवर से 10वीं की परीक्षा उत्तीर्ण की थी। आरोप है कि अधिकतम उम्र सीमा पार कर जाने के बाद कथित तौर पर आयु घटाकर नए दस्तावेज तैयार कराए गए और उसी के आधार पर ऑफिस अटेंडेंट के पद पर चयन हासिल किया गया।
इस मामले के सामने आने के बाद अन्य पदों पर हुई नियुक्तियों में भी इसी प्रकार की धांधली की आशंका व्यक्त की जा रही है। शिकायतकर्ताओं और अभ्यर्थियों ने राज्य सरकार एवं सक्षम जांच एजेंसियों से गुहार लगाई है कि विज्ञापन संख्या 01/2025 के तहत चयनित सभी उम्मीदवारों के मूल शैक्षणिक प्रमाणपत्रों, पूर्व के विद्यालय अभिलेखों और जन्मतिथि संबंधी दस्तावेजों की निष्पक्ष व उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और योग्य अभ्यर्थियों का भरोसा बहाल रह सके।
