बोकारो स्टील प्लांट पर महासंकट: विस्थापित आंदोलन से सभी 12 गेट जाम, उत्पादन ठप और 80 करोड़ का नुकसान

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–लाइव ख़बर नेशन || संतोष श्रीवास्तव

भीतर बंधक बने 4 हजार कर्मी, एंबुलेंस से भेजा जा रहा खाना भी रोका गया; वार्ता विफल होने पर धरने पर बैठे मंत्री राधाकृष्ण किशोर

बोकारो, 17 अक्टूबर 2026: नियोजन और अधिकारों की मांग को लेकर बोकारो इस्पात नगर में चल रहा विस्थापित अप्रेंटिस संघ का आंदोलन शनिवार को आठवें दिन उग्रतम रूप में पहुंच गया। आंदोलनकारियों ने प्रशासनिक भवन के मुख्य द्वार समेत बोकारो स्टील प्लांट के सभी 12 प्रवेश द्वारों को पूरी तरह अवरुद्ध कर अभूतपूर्व नाकेबंदी कर दी। एशिया के सबसे बड़े स्टील संयंत्रों में शुमार बीएसएल में उत्पादन और परिचालन गतिविधियां पूरी तरह चरमराकर ठप हो गई हैं। प्लांट प्रबंधन के अनुसार, इस गतिरोध के चलते अब तक लगभग ₹80 करोड़ का वित्तीय नुकसान हो चुका है, जबकि शनिवार को एक ही दिन में करीब ₹30 करोड़ की सीधी क्षति दर्ज की गई। यदि इकाइयों को तत्काल सामान्य नहीं किया गया तो यह घाटा ₹150 करोड़ के पार पहुंच सकता है। ब्लास्ट फर्नेस, सिंटर प्लांट, स्टील मेल्टिंग शॉप और रोलिंग मिलों का परिचालन रुक गया है।

गेटों पर पूर्ण जाम होने के चलते शनिवार की तीनों पालियों में नए कर्मियों की उपस्थिति शून्य रही। इसके विपरीत शुक्रवार रात की पाली में पहुंचे करीब 4 हजार कर्मी पिछले 18 घंटे से अधिक समय से प्लांट परिसर के भीतर बंधक बने हुए हैं। अंदर फंसे कर्मियों के लिए भोजन और पानी ले जा रही एंबुलेंस को भी प्रदर्शनकारियों ने रोक दिया। प्लांट एक संवेदनशील तापीय इकाई है, जहां उच्च तापमान की भट्ठियां और ज्वलनशील गैस पाइपलाइनें हैं। इनकी नियमित निगरानी न होने से तकनीकी दुर्घटना का अंदेशा गहरा गया है। इसके अलावा किरीबुरू और मेघाहातुबुरू खदानों से लौह अयस्क, चूना पत्थर, तेल टैंकर और मेंटेनेंस उपकरण लाने वाले ट्रकों के पहिए बाहर हाईवे पर ही थम गए हैं। प्रबंधन ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से रात में ही हस्तक्षेप कर सुरक्षा बहाली की गुहार लगाई है।

इधर दिनभर चले तनाव के बाद उपायुक्त अजय नाथ झा और झारखंड सरकार के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की उपस्थिति में सेल प्रबंधन के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ता पूरी तरह बेनतीजा रही। वार्ता विफल होने पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर खुद टू टैंक गार्डन में विस्थापितों के साथ धरने पर बैठ गए। उन्होंने प्रबंधन को फटकारते हुए कहा कि जमीन झारखंड की जनता की है और अधिकारी इतिहास सुनाने के बजाय 10 हजार विस्थापित परिवारों के नियोजन पर बात करें। उन्होंने प्रेम महतो मामले के आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन दिन का अल्टीमेटम दिया। डुमरी विधायक जयराम महतो ने भी पहले ही आंदोलन को अपना समर्थन दिया था। वहीं स्टील एक्जीक्यूटिव फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष व बीएसओए महासचिव अजय कुमार पांडेय ने संयंत्र की सुरक्षा और हजारों परिवारों की रोजी-रोटी का हवाला देते हुए सभी पक्षों से गतिरोध शीघ्र सुलझाने की अपील की है।

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