-लाइव ख़बर नेशन || संतोष श्रीवास्तव
बालू लदे टिपर ट्रक छोड़ने के नाम पर मांगी थी रिश्वत; ट्रैप होते ही कार्यालय में गिरे, अस्पताल में इलाज के बाद मुजफ्फरपुर कोर्ट ले जा रही टीम
मधुबनी, 28 अक्टूबर 2026 : बिहार में भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ निगरानी अन्वेषण ब्यूरो ने कड़ा शिकंजा कसते हुए मधुबनी के ट्रैफिक पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) सुजीत कुमार को 30,000 रुपये रिश्वत लेते रंगेहाथ दबोच लिया। निगरानी टीम की इस कार्रवाई के दौरान कार्यालय परिसर में हाई वोल्टेज ड्रामा देखने को मिला। ट्रैप होते ही डीएसपी अचानक जमीन पर गिरकर छटपटाने लगे, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। बुधवार को स्थिति सामान्य होने पर चिकित्सकों की अनुमति के बाद निगरानी की टीम उन्हें विशेष निगरानी अदालत (मुजफ्फरपुर) में पेश करने के लिए रवाना हो गई।
सकरी थाना क्षेत्र के गंधवारी निवासी रोहित मिश्रा ने पटना स्थित निगरानी मुख्यालय में शिकायत दर्ज कराई थी। परिवादी अपने टिपर ट्रक (BR 32GC 2817) से निजी कार्य के लिए पीला बालू लेकर घर लौट रहे थे। इसी दौरान रांटी चौक पर यातायात डीएसपी सुजीत कुमार ने गाड़ी रोक ली और छोड़ने के एवज में ₹1 लाख घूस मांगी। दबाव में आकर परिवादी ने ₹50,000 दिए, जिसके बदले ₹500 का चालान काटकर गाड़ी छोड़ी गई। इसके बाद भी डीएसपी द्वारा ₹20,000 और देने तथा हर महीने निर्बाध परिचालन के नाम पर ₹15,000 बंधी (मंथली) देने का लगातार दबाव बनाया जा रहा था।
निगरानी द्वारा गुप्त सत्यापन में आरोप सही पाए जाने के बाद 26 अक्टूबर को कांड संख्या 125/2026 दर्ज किया गया। वरीय पुलिस उपाधीक्षक पवन कुमार के नेतृत्व में गठित धावादल ने 27 अक्टूबर की शाम जाल बिछाया। जैसे ही डीएसपी ने रिश्वत के 30,000 रुपये अपने बैग में रखे, टीम को देखते ही बैग अंगरक्षक की ओर फेंककर जमीन पर गिर पड़े। अंगरक्षक द्वारा उठाए गए बैग से रिश्वत की पूरी रकम बरामद कर ली गई। अस्पताल में चिकित्सकों की मौजूदगी में हाथ धुलवाने की प्रक्रिया पूरी कर उनकी विधिवत गिरफ्तारी की गई। निगरानी ब्यूरो द्वारा इस वर्ष ट्रैप का यह 115वां मामला है, जिसमें अब तक 115 घूसखोरों को रंगेहाथ पकड़ा जा चुका है।

